अंग्रेजी शासन व्यवस्था को भारत में लागू करवाने के लिए मनुस्मृति को बदनाम किया अंबेडकर ने ! Yogesh Mishra

डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपनी जातिगत राजनीति को चमकाने के लिए ऐसा बताया कि मनुस्मृति ब्राह्मण  संरक्षित  तथा  ब्राह्मण पोषित है  जबकि यह सूचना गलत है मनु स्मृति का अध्ययन करने वाला कोई भी व्यक्ति स्पष्ट रुप से यह देख सकता है कि  मनु स्मृति में किसी भी अपराध के लिए सबसे अधिक दंड की व्यवस्था ब्राह्मणों के लिए है, उससे कम क्षत्रियों के लिए, क्षत्रियों से कम वैश्यों के लिए तथा शूद्रों के लिए उसी अपराध में सबसे कम दंड की व्यवस्था थी  उदाहरण के तौर पर नीचे मनुस्मृति के कुछ उदाहरण में दे  रहा हूं

 मनु स्मृति में यह व्यवस्था है कि यदि कोई अपनी स्वेच्छा से और अपने पूरे होशोहवास में चोरी करता है तो उसे एक सामान्य चोर से ८ गुना सजा का प्रावधान होना चाहिए यदि वह शूद्र है,  और अगर वैश्य है तो १६ गुना, क्षत्रिय है तो ३२गुना, ब्राह्मण है तो ६४ गुना दण्ड का विधान है| यहां तक कि ब्राह्मण के लिए दण्ड १०० गुना या १२८ गुना तक भी हो सकता है | दूसरे शब्दों में दण्ड अपराध करने वाले की शिक्षा और सामाजिक स्तर के अनुपात में होता था |
इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति के शब्दों से ही ब्राह्मण को यह लगता है कि उसका अपमान किया गया है तो उस व्यक्ति के लिए कम से कम एक दिन बिना खाए रहने की सजा है जबकि ब्राह्मण यदि किसी का अपमान करे तो उसे कम से कम लगातार ६४ दिनों का उपवास करना पड़ता था |
अत: सी प्रकार मनु स्मृति के अनुसार चोरी, हत्या, डकैती, ठगी, परस्त्री गमन आदि अपराध होने पर शूद्रों के लिए सबसे कम दण्ड का विधान था जबकि ब्राह्मणों और शासकीय अधिकारीयों को कठोरतम दण्ड देने काविधान था |अत:  स्पष्ट होता है कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अंग्रेजो की फूट डालो और शासन करो की नीति को बढ़ावा देने के लिए दलितों के मसीहा बनकर दलितों को गुमराह किया और ब्राह्मण विरोधी नारा लगा कर मनुस्मृति को आरोपित कर अंग्रेजी शासन व्यवस्था को भारत में लागू करवाने में अंग्रेजों की मदद की तथा भारत की  सामाजिक संरचना को नष्ट करते हुए अंग्रेजों की विधिक संरचना का प्रचार प्रसार किया  तथा अंग्रेजों की इच्छा पर भारत के संविधान निर्माण में भारतीय सामाजिक संरचना को नष्ट करने हेतु अंग्रेजों को अपना पूर्ण सहयोग दिया तथा  हिंदू समाज  और भारतीय संस्कृति के साथ – साथ सनातन विचारधारा को नष्ट करते हुए यूरोपीय विचारधारा व जीवनशैली को बढ़ावा दिया जिससे अंग्रेजो के हाथ मजबूत हुए | क्या यह अपने राष्ट्र के साथ विश्वासघात नहीं है ?

योगेश मिश्र
ज्योतिषाचार्य,संवैधानिक शोधकर्ता एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)
संपर्क – 9044414408

comments

Check Also

मिस्र के पिरामिड लाशों की कब्रगाह नहीं बल्कि वास्तु यंत्र है जरूर पढ़ें पूरा इतिहास ।

आज से 3000 वर्ष पूर्व समस्त प्रथ्वी पर एकमात्र सनातन धर्म ही था | गौतमबुद्ध …