Adhyatm

इजरायल के झंडे में षडचक्र का अलौकिक रहस्य : Yogesh Mishra

योरोपियन तांत्रिकों में जोकव बोहम की ख्याति कुण्डलिनी साधकों के रूप में रही है ! उनके जर्मन शिष्य जान जार्ज गिचेल की लिखी पुस्तक ‘थियोसॉफिक प्रोक्टिका’ में चक्र संस्थानों का विशद वर्णन है जिसे उन्होंने अनुसंधानों और अभ्यासों के आधार पर लिखा है ! जैफरी हडस्वन ने इस संदर्भ में …

Read More »

कर्म का ग्रह ऊर्जा से सम्बन्ध : Yogesh Mishra

भारतीय दर्शन के अनुसार कर्म तीन प्रकार के होते हैं,- 1. संचित कर्म, 2. प्राब्ध कर्म,3. क्रियमाण कर्म ! वर्तमान तक किया गया कर्म संचित कर्म कहलाता है, वर्तमान में जो कर्म हो रहा है, वह क्रियमाण है, संचित कर्म का जो भाग हम भोगते है, वह प्रारब्ध कहलाता है …

Read More »

ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या का रहस्य : Yogesh Mishra

शंकाराचार्य के इस सूत्र ‘ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या, जीवो ब्रह्मेव नापराह’ का क्या मतलब है ? जब से यह सिद्धांत आया है तबसे इस विषय में कोई स्पष्टता से कुछ नहीं कह सका है ! कुछ विद्वानों और आचार्यों ने तो इसके “जगत मिथ्या” के विषय में अनेकों तार्किक संशोधन …

Read More »

क्या कोरोना काल में भारत को आध्यात्मिक क्षमता का प्रदर्शन करना चाहिये : Yogesh Mishra

हमारा ऐतराज़ इस नई विश्व व्यवस्था की वक़ालत करने वाले मूल्यों और नियमों को लेकर नहीं है ! बल्कि हमारी आपत्ति उन तरीक़ों और माध्यमों को लेकर है जिन्हें ईजाद करके नई विश्व व्यवस्था लागू करने के लिये किया जा रहा है ! मानो दुनिया से छल किया जा रहा …

Read More »

चौथा आयाम और दूसरी दुनिया के रहस्य : Yogesh Mishra

हम सभी जानते हैं कि यह संसार सामान्यतया तीन आयाम में चलता है ! लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई इसके अलावा एक आयाम और है जो बहुत महत्वपूर्ण होता है ! उसको कहते हैं समय अर्थात काल ! यह चौथा आयाम इतना शक्तिशाली होता है कि यह अकेले ही पिछले तीनों …

Read More »

न देव मरेंगे न दानव ! : Yogesh Mishra

विश्व में सदैव से दो आध्यात्मिक केंद्र प्रकृति द्वारा निर्धारित किये गये हैं ! पहला हिमालय और दूसरा नॉर्थ ईस्ट एशिया ! इसीलिये अधिकतर धर्मों की उत्पत्ति किन्ही दोनों आध्यात्मिक केंद्र की जीवनशैली से हुई है ! इसमें हिमालय और सनातन जीवन शैली विश्व की देव शक्तियों का आध्यात्मिक केंद्र …

Read More »

विवेक चूड़ामणि ग्रन्थ का आध्यात्मिक रहस्य : Yogesh Mishra

विवेकचूडामणि आदि शंकराचार्य द्वारा संस्कृत भाषा में रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है ! जिसमें अद्वैत वेदान्त का निर्वचन किया गया है ! इसमें ब्रह्मनिष्ठा का महत्त्व, ज्ञानोपलब्धि का उपाय, प्रश्न-निरूपण, आत्मज्ञान का महत्त्व, पंचप्राण, आत्म-निरूपण, मुक्ति कैसे होगी ! आत्मज्ञान का फल आदि तत्त्वज्ञान के विभिन्न विषयों का अत्यन्त सुन्दर निरूपण …

Read More »

ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य-एंटीमैटर : Yogesh Mishra

खुद को आईने में देखियह ! वहां भी आप ठीक आपने सामने आपने को वैसे ही पाते हैं ? तब आप कहेंगे कि यह मेरा प्रतिबिम्ब है ! ठीक इसी तरह कभी सोंचा है कि जिस पृथ्वी पर आप रहते हैं ! शास्त्रों के अनुसार उसी पृथ्वी जैसी हू-ब-हू दर्जनों …

Read More »

मोक्ष के प्राप्ति लिये कर्मफल के बंधन से छुटकारा कैसे पा सकते हैं ! : Yogesh Mishra

श्रीमद् भगवत गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है ‘न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ’ गीता 3/5 अर्थात, कोई भी व्यक्ति कर्म किये बिना क्षण भर भी नहीं रह सकता है ! अर्थात कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग किसी भी मार्ग में साधक कर्म किये बिना नहीं रह सकता है …

Read More »

मंदिरों में बैठा हुआ भगवान ईश्वर नहीं है ! : Yogesh Mishra

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्य: स सुपर्णो गरुत्मान् ! एकं सद् विप्रा बहुधा वदंत्यग्नि यमं मातरिश्वानमाहु: !! – ऋग्वेद (1/164/46) जिसे लोग इन्द्र, मित्र, वरुण आदि कहते हैं, वह सत्ता केवल एक ही है, ऋषि लोग उसे भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं ! जिसे कोई नेत्रों से भी नहीं देख सकता, …

Read More »