अम्बेडकर के जन्म से पहले ही रच लिया गया था संविधान सभा का षडयंत्र : Yogesh Mishra

संविधान सभा की प्रेरणा का स्रोत 17वीं और 18वीं शताब्दी की लोकतांत्रिक क्रांतियां हैं ! इन क्रांतियों ने इस विचार को जन्म दिया कि शासन के मूलभूत कानूनों का नियमन नागरिकों की एक विशिष्ट प्रतिनिधि सभा द्वारा किया जाना चाहिये !

1757 ई. की प्लास की लड़ाई और 1764 ई. बक्सर के युद्ध को अंग्रेजों द्वारा जीत लिये जाने के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शासन का शिकंजा कसा ! इसी शासन को अपने अनुकूल बनाए रखने के लिये अंग्रेजों ने समय-समय पर कई एक्ट पारित किये, जो भारतीय संविधान के विकास की सीढ़ियां बनीं !

जिसके लिये समय समय पर विभिन्न एक्ट और चार्टर पास हुये ! 1773 ई. का रेग्यूलेटिंग एक्ट, 1784 ई. का पिट्स इंडिया एक्ट, 1793 ई. का चार्टर अधिनियम, 1813 ई. का चार्टर अधिनियम, 1833 ई. का चार्टर अधिनियम, 1853 ई. का चार्टर अधिनियम, 1858 ई. का चार्टर अधिनियम, 1861 ई. का भारत परिषद् अधिनियम, 1892 ई. का भारत शासन अधिनियम, 1909 ई० का भारत शासन अधिनियम आदि प्रमुख थे !

फिर भारत में अंग्रेजों के दबाव में संविधान सभा की परिकल्पना सदैव कांग्रेस के राष्ट्रीय आंदोलन के विकास के साथ जुड़ी रही ! भारत की संविधान सभा का निश्चित उल्लेख, भले ही इन शब्दों में न किया गया हो किंतु भारत शासन अधिनियम, 1919 के लागू होने के पश्चात् 1922 में महात्मा गांधी ने इस तथ्य का उल्लेख किया था !

जनवरी 1925 में दिल्ली में हुए सर्वदलीय सम्मेलन के समक्ष कॉमनवेल्थ ऑफ़ इण्डिया बिल को प्रस्तुत किया गया, जिसकी अध्यक्षता महात्मा गाँधी ने की थी ! उल्लेखनीय है कि, भारत के लिये एक संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करने का यह प्रथम प्रमुख प्रयास था !

19 मई, 1928 को बंबई में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन में भारत के संविधान के सिद्धांत निर्धारित करने के लिये मोतीलाल नेहरु के सभापतित्व में एक समिति गठित की गई ! 10 अगस्त, 1928 को प्रस्तुत की गई इस समिति की रिपोर्ट की नेहरू रिपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है ! उल्लेखनीय है कि, संसद के प्रति उत्तरदायी सरकार, न्यायपालिका द्वारा प्रवर्तनीय मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकार सहित मोटे तौर पर जिस संसदीय व्यवस्था की संकल्पना 1928 की नेहरू रिपोर्ट में व्यक्त की गई थी ! इसे लगभग ज्यों-का-त्यों 21 वर्ष बाद 20 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत स्वाधीन भारत के संविधान में समाविष्ट कर लिया गया !

जून 1934 में कांग्रेस कार्यकारिणी ने घोषणा की कि श्वेत-पत्र का एकमात्र विकल्प यह है कि वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित संविधान सभा द्वारा एक संविधान तैयार किया जाए ! यह पहला अवसर था जब संविधान सभा के लिये औपचारिक रूप से एक निश्चित मांग प्रस्तुत की गयी !

1940 के अगस्त प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार ने संविधान सभा की मांग को पहली बार अधिकारिक रूप से स्वीकार किया, भले ही स्वीकृति अप्रत्यक्ष तथा महत्वपूर्ण शर्तो के साथ थी ! यद्यपि 1942 का क्रिप्स मिशन पूर्णतः असफल सिद्ध हुआ, फिर भी उसमें संविधान सभा बनाने की बात को स्वीकार कर लिया गया था !

अंततः कैबिनेट मिशन, 1946 द्वारा संविधान निर्माण के लिये एक बुनियादी ढांचे का प्रारूप प्रस्तुत किया गया ! कैबिनेट मिशन ने संविधान-निर्माण निकाय द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को कुछ विस्तारपूर्वक निर्धारित किया जो इस प्रकार है-

प्रत्येक प्रांत को और प्रत्येक देशी रियासत या रियासतों के समूह को अपनी जनसंख्या के अनुपात में कुल स्थान आवंटित किये गए ! स्थूल रूप से 10 लाख के लिये एक स्थान का अनुपात निर्धारित किया गया ! इसके परिणामस्वरूप प्रांतों की 292 सदस्य निर्वाचित करने थे और देशी रियासतों को कम से कम 93 स्थान दिए गए !
प्रत्येक प्रांत के स्थानों को जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तीन प्रमुख समुदायों में बांटा गया ! ये समुदाय थे-मुस्लिम, सिख और साधारण !

प्रांतीय विधान सभा में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों को एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करना था ! देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की पद्धति परामर्श से तय की जानी थी !

जनवरी 1925 में ‘कॉमनवेल्थ ऑफ इण्डिया बिल’ के रूप में एक संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा के प्रस्तुतीकरण का भारत के ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रथम प्रयास किया गया था !

फिर 1935 में ब्रिटेन की संसद ने भारत शासन अधिनियम 1935 परित किया जिसमें 451 धारायें और 15 परिशिष्ट थे ! यही अधिनियम बाद को भारत के संविधान का आधार बना !

फिर ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई, 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तावित किया गया ! जो 18 जुलाई 1947 को स्वीकृत हो गया ! इस अधिनियम में 20 धाराएं थीं ! जिसमें भारत के आजादी की विधिक शर्तें लिखी हुई थी ! जो आज भी संविधान की व्याख्या का आधार है !

3 जून 1947 की योजना के अंतर्गत विभाजन के परिणामस्वरूप पाकिस्तान के लिये एक पृथक् संविधान सभा गठित की गई ! बंगाल, पंजाब, सिंध, पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत, बलूचिस्तान और असम के सिलहट जिले (जो जनमत संग्रह द्वारा पाकिस्तान में सम्मिलित हुए थे) के प्रतिनिधि भारत की संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे ! पश्चिमी बंगाल और पूर्वी पंजाब के प्रांतों में नए निर्वाचन किये गए !

परिणामस्वरूप जब संविधान सभा 31 अक्टूबर, 1947 को पुनः समवेत हुई तो सदन की सदस्यता घटकर 299 ही गई ! इसमें से 284 सदस्य 26 नवंबर, 1949 की वास्तव में उपस्थित थे और उन्होंने अंतिम रूप से पारित संविधान पर अपने हस्ताक्षर किये !

संविधान सभा सदस्य-संख्या की दृष्टि से एक काफी बड़ी सभा थी ! क्योंकि ब्रिटेन द्वारा भेजे गये कैबिनेट मिशन ने उसके सदस्यों की कोई अधिकतम संख्या निर्धारित नहीं की थी ! कैबिनेट मिशन का प्रस्ताव था कि हर दस लाख की आबादी के लिये एक प्रतिनिधि होना चाहिये ! इस फॉर्मूले के अनुसार संविधान सभा में प्रांतों के अधिक-से-अधिक 296 सदस्य हो सकते थे ! जिसमें देशी राज्यों के 93 प्रतिनिधि भी संविधान सभा के सदस्य थे !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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