किसी कुंड से नहीं बल्कि धृतराष्ट्र की 12 पत्नियों से प्राप्त हुये थे सौ कौरव : Yogesh Mishra

एक बार धृतराष्ट्र के नियोग पिता महर्षि वेदव्यास हस्तिनापुर आये ! गांधारी ने उनकी बहुत सेवा की ! जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने गांधारी को वरदान मांगने को कहा ! गांधारी ने अपने पति के समान ही बलवान सौ पुत्र होने का वर मांगा ! कुछ समय बाद गांधारी को गर्भ ठहरा और वह दो वर्ष तक पेट में ही रहा ! इससे गांधारी घबरा गई और उसने अपना गर्भ गिरा दिया ! उसके पेट से लोहे के समान एक मांस पिण्ड निकला !

महर्षि वेदव्यास ने अपनी योगदृष्टि से यह सब देख लिया और वह तुरंत गांधारी के पास आये ! तब गांधारी ने उन्हें वह मांस पिण्ड दिखाया ! महर्षि वेदव्यास ने गांधारी से कहा कि तुम जल्दी से सौ कुण्ड बनवाकर उन्हें घी से भर दो और सुरक्षित स्थान में उनकी रक्षा का प्रबंध कर दो तथा इस मांस पिण्ड पर जल छिड़को ! जल छिड़कने पर उस मांस पिण्ड के एक सौ एक टुकड़े हो गये !

व्यासजी ने कहा कि मांस पिण्डों के इन एक सौ एक टुकड़ों को घी से भरे कुंडों में डाल दो ! अब इन कुंडों को दो साल बाद ही खोलना ! इतना कहकर महर्षि वेदव्यास तपस्या करने हिमालय पर चले गये ! समय आने पर उन्हीं मांस पिण्डों से पहले दुर्योधन और बाद में गांधारी के 99 पुत्र तथा एक कन्या उत्पन्न हुई ! अर्थात 101 सन्तान का जन्म हुआ !

लेकिन यह कथा झूठी है ! सत्य यह है कि शान्तनु के पुत्र विचित्रवीर्य की अचानक मृत्यु के बाद “कुरु वंश” वंश विहीन हो गया था ! तब अपने पुत्र विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद माता सत्यवती जिनका विवाह राजा शांतनु से हुआ था ! वह अपने विवाह के पूर्व महर्षि परासर से जन्मे अपने सबसे पहले पुत्र वेद व्यास के पास गईं और वेद व्यास से मृत विचित्रवीर्य की दो पत्नी अम्बिका और अम्बालिका का नियोग द्वारा गर्भ धारण करवाने के आग्रह किया !

अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुये वेद व्यास ने मृत विचित्रवीर्य की दोनों पत्नियों को गर्भवती बना दिया ! तब पहले बड़ी रानी अम्बिका वेद व्यास के पास गईं लेकिन व्यासजी के भयानक रूप को देखकर डर गई और भय के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं ! इसलिये उन्हें जो पुत्र उत्पन हुआ वह जन्मान्ध था ! वह जन्मान्ध पुत्र धृतराष्ट्र था !

फिर अम्बालिका गयी वह भी वेद व्यासजी के भयानक रूप को देखकर डर गई और भय काल में धारण किये गये गर्भ के कारण जन्म से निर्बल पुत्र पांडु को उन्होंने जन्म दिया !

दोनों ही शासन के योग्य नहीं थे ! अत: सत्यवती ने पुन: अम्बिका को स्वस्थ्य सन्तान प्राप्ति हेतु व्यास से नियोग करवाने को कहा ! किन्तु व्यास के व्यक्तित्व से भयभीत अम्बिका ने इस बार अपनी दासी “परिश्रमी” को व्यास के पास भेज दिया ! जिससे स्वस्थ्य और बुद्धिमान पुत्र विदुर का जन्म हुआ ! जो दासी पुत्र होने के कारण कभी राजा तो नहीं बन पाये किन्तु आजीवन महामंत्री अवश्य रहे !

धृतराष्ट्र की नेत्रहीनता के कारण हस्तिनापुर का महाराज धृतराष्ट्र के छोटे भाई पांडु को नियुक्त किया गया ! पांडु की मृत्यु के बाद वह पुन: हस्तिनापुर के कार्यवाहक महाराज बने ! तब गंधार राज्य के रजा सुबल ने भीष्म जी के आग्रह पर अपनी 11 कन्याओं का विवाह धृतराष्ट्र से किया था ! जिनका नाम सत्यव्रता, सत्यसेना, सुवेष्णा, सुसंहिता, तेजश्रवा, सुश्रवा, निकृति, शुभा, शम्भुवा, दशार्णा तथा गांधारी था !

पांडु की मृत्यु के बाद क्योंकि कुन्ती अज्ञात वास में चली गयी थी ! अत: विशाल कुरु वंश के एक मात्र शासक ने कुरु वंश में राज कुल के क्षत्रियों की संख्या बढ़ाने के लिये अपनी 12 पत्नियों से जिससे 99 पुत्र और 1 पुत्री को प्राप्त किया ! जिनका नाम निम्न था !

1.दुर्योधन, 2. दु:शासन, 3. दुस्सह, 4. दुश्शल, 5. जलसंध, 6. सम, 7. सह, 8. विंद, 9. अनुविंद, 10.दुद्र्धर्ष,

11. सुबाहु, 12. दुष्प्रधर्षण, 13. दुर्मुर्षण, 14. दुर्मुख, 15. दुष्कर्ण, 16. कर्ण, 17. विविंशति, 18. विकर्ण, 19. शल, 20.सत्व

21. सुलोचन, 22. चित्र, 23. उपचित्र, 24. चित्राक्ष, 25. चारुचित्र, 26. शरासन, 27. दुर्मुद, 28. दुर्विगाह, 29. विवित्सु, 30.विकटानन,

31. ऊर्णनाभ, 32. सुनाभ, 33. नंद, 34. उपनंद, 35. चित्रबाण, 36. चित्रवर्मा, 37. सुवर्मा, 38. दुर्विमोचन, 39. आयोबाहु, 40.महाबाहु,

41. चित्रांग, 42. चित्रकुंडल, 43. भीमवेग, 44. भीमबल, 45. बलाकी, 46. बलवद्र्धन, 47. उग्रायुध, 48. सुषेण, 49. कुण्डधार, 50. महोदर,

51. चित्रायुध, 52. निषंगी, 53. पाशी, 54. वृंदारक, 55. दृढ़वर्मा, 56. दृढ़क्षत्र, 57. सोमकीर्ति, 58. अनूदर, 59. दृढ़संध, 60. जरासंध

61. सत्यसंध, 62. सद:सुवाक, 63. उग्रश्रवा, 64. उग्रसेन, 65. सेनानी, 66. दुष्पराजय, 67. अपराजित, 68. कुण्डशायी, 69. विशालाक्ष, 70. दुराधर,

71. दृढ़हस्त, 72. सुहस्त, 73. बातवेग, 74. सुवर्चा, 75. आदित्यकेतु, 76. बह्वाशी 77. नागदत्त, 78. अग्रयायी, 79. कवची, 80. क्रथन,

81. कुण्डी, 82. उग्र, 83. भीमरथ, 84. वीरबाहु, 85. अलोलुप, 86. अभय, 87. रौद्रकर्मा, 88. दृढऱथाश्रय, 89. अनाधृष्य, 90. कुण्डभेदी,

91. विरावी, 92. प्रमथ, 93. प्रमाथी, 94. दीर्घरोमा, 95. दीर्घबाहु, 96. महाबाहु, 97. व्यूढोरस्क, 98. कनकध्वज, 99. कुण्डाशी

99 पुत्रों के अलावा धृतराष्ट्र के एक पुत्री भी थी ! जिसका नाम दुश्शला था ! दुश्शला का विवाह राजा जयद्रथ से हुआ था !

इसके अलावा एक दासी “वैश्यवृती” से भी धृतराष्ट्र ने गन्धर्व विवाह किया था ! जिससे प्राप्त होने वाले पुत्र का नाम युयुत्स था ! जो महाभारत युद्ध में पांडव की ओर से लड़ा था और युद्ध के बाद धृतराष्ट्र की एक मात्र पुत्र सन्तान यही जीवित बचा था ! इस तरह के 100 पुत्र और 1 पुत्री किसी कुंभ से या कुंड से नहीं बल्कि धृतराष्ट्र की 12 पत्नियों से प्राप्त हुये थे !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

 -: सम्पर्क :-
-090 444 14408
-094 530 92553

Check Also

संबंधों के बंधन का यथार्थ : Yogesh Mishra

सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करते करते मनुष्य कब संबंधों के बंधन में बंध जाता है …