जानिये भारत के राजनैतिक वास्तु दोष में क्या है गड़बड़ी ? जो देश के विकास को प्रभावित करती है ? योगेश मिश्र |

क्या आपने कभी विचार किया कि भारत के विकास के लिए पिछले 70 सालों से भारत के राजनीतिज्ञों ने जी तोड़ मेहनत की किंतु इसके बाद भी भारत का विकास के विषय में उसके साथ ही आजाद हुए अन्य देशों के मुकाबले बहुत पीछे है !

क्या आपने कभी महसूस किया कि भारत को नित नई आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, आतंकवादी आदि घटनाओं से जूझना पड़ रहा है ! जिसमें मोदी जी जैसे लोग भी अपना मनचाहा विकास भारत के लिए नहीं कर पा रहे हैं ! जब कि यही व्यक्ति जब अहमदाबाद में मुख्य मंत्री थे तो देश के सफलतम मुख्यमंत्री में गिने जाते थे !

आखिर वह कौन सी वजह है के अन्य देशों के मुकाबले भारत का व्यक्ति ज्यादा धार्मिक है, संस्कारी है, ईमानदार है और यहां के राजनीतिज्ञ भी अन्य देशों के मुकाबले राष्ट्र के प्रति अधिक समर्पित हैं, इसके बाद भी भारत का विकास उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा है, जिस तेजी से भारत के साथ ही आजाद हुए अन्य देशों ने अपना विकास किया !

इस पर बहुत चिंतन करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि भारत का राजनैतिक वास्तु ही गड़बड़ है सभी जानते हैं कि भारत के लगभग मध्य से कर्क रेखा होकर गुजरती है ! यह भारत को उत्तर भारत और दक्षिण भारत दो हिस्से में बांटती है कहने को तो यह एक काल्पनिक रेखा है किंतु वास्तु के दृष्टिकोण से यह अति महत्वपूर्ण रेखा है !

कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में भूमध्य रेखा‎ के समानान्तर 23°26′22″N 0°0′0″W निर्देशांक: 23°26′22″N 0°0′0″W पर, ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं। यह रेखा पृथ्वी पर उन पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक हैं जो पृथ्वी के मानचित्र पर परिलक्षित होती हैं। कर्क रेखा पृथ्वी की उत्तरतम अक्षांश रेखा हैं, जिस पर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हैं । कर्क रेखा भारत के बीच से गुजरती है ! यह भारत के 8 राज्यों से होकर गुजरती है !

भारत के शहरों के इतिहास देखें तो जब तक भारत की राजधानी कर्क रेखा से दक्षिण दिशा की ओर महाराज विक्रमादित्य के समय में उज्जैन रही तब तक भारत ने इतनी प्रगति की है कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाने लगा और जब से कर्क रेखा से उत्तर दिल्ली राजधानी बनी तब से भारत का निरन्तर पतन हो रहा है ! संपन्नता दक्षिण दिशा से उत्तर की ओर देखने (शासन चलाने से) प्राप्त होती है । यही वास्तु का सामान्य नियम है !

इसीलिए देखिए के कर्क रेखा से दक्षिण की ओर सरकार के जितने भी कार्यालय हैं, वह सब अधिक व्यवस्थित तरीके से कम संसाधनों में चल रहे हैं ! उन्हीं के मुकाबले कर्क रेखा से उत्तर की ओर जो कार्यालय बनाए गए हैं उनमें भ्रष्टाचार, अनियमितता, आलस्य, स्वार्थ, निरंकुशता आदि का बोलबाला दिखाई देता है !

रावण लंका से भारत में शासन चलता था उसके स्वर्ण भंडार भरे थे ! वह स्वयं सोने की लंका में रहता था ! उसके राज्य में कोई भी व्यक्ति निर्धन नहीं था, हर व्यक्ति को भरपेट भोजन मिलता था, उसका अनुशासन इतना कठोर था कि किसी भी व्यक्ति में राज्य सत्ता के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस नहीं था ! भारत में तो कभी वामपंथी झंडा लेकर खड़े हो जाते हैं और कभी मुसलमान पाकिस्तानी झंडा फहराने लगते हैं !

इसका रहस्य यह है कि भारतीय ऋषियों ने इस देश की भौगोलिक स्थिति को समझकर प्रकृति से दिशा-ज्ञान प्राप्त कर लिया था । यहां कोई भी शुभ काम पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर की ओर मुख करके या जाता है। आसमान की ओर देखने वाले को तेज, तो नीचे देखने वाले को धरती का शैर्य, पूर्व की ओर देखने वाले को सूर्य की ज्योति, उत्तर की ओर देखने वाले को हिमालय जैसी उन्नति मिलती है !

दक्षिण और वायव्य (दक्षिण पश्चिम) की ओर देखने वाले को हिन्दमहासागर को अन्तहीन भटकाव और आस्ट्रेलियाई जैसी बंजरता मिलती है ! पश्चिम में देखने वाले को अस्ताचल मिलता है । भारत की अग्नेय दिशा मे (बंगाल की खाड़ी) पानी है इसलिये देश मे शूरवीर अब ना के बराबर है और कायरताये अपनी चरमसीमा पर है.

भारत तो सदैव से केवल चार दिशाओं की ओर उन्मुख होकर ही कार्य सम्पादन करता आया है । ये चार दिशायें हैं उत्तर, पूर्व, ईशान (उत्तर-पूर्व) और आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)।

दिल्ली को भारत की ओर देखने के लिए वायव्य, नैऋत्य, पश्चिम और दक्षिण दिशा में ही देखना पड़ता है । इसीलिए दिल्ली दरबार की सत्ता का हश्र बुरा ही होता आया है । मुग़ल आपसी कलह में नष्ट हो गये ! अंग्रेजों ने मद्रास छोड़कर कर्क रेखा के ऊपर कलकत्ता को राजधानी बनाया तब से पराभव का बीज डल गया । इन्द्रप्रस्थ के कारण तो यहां महाभारत तक हो गया । भगवान राम भी अयोध्या में परेशान ही रहे और भगवान कृष्ण भी जब तक कर्क रेखा के ऊपर मथुरा रहे परेशान रहे और जब कर्क रेखा के नीचे द्वारिकाधीश बने तो सम्पन्नता की पराकाष्ठ पर थे !

नरेन्द्र मोदी भी अहमदाबाद में देश के सफलतम मुख्यमंत्री थे, जो आज सर्वगुण समपन्न होते हुये भी जब से दिल्ली में प्रधानमंत्री बने हैं तब से नित नये नये झंझावातें से झूझ रहे हैं ! अब तो लोकप्रियता भी प्रभावित होने लगी है !

अतः यदि कर्क रेखा के नीचे राजधानी बना दिया जाए तो इस स्थिति में फर्क आ जायेगा ।

वास्तु विज्ञान के अनुसार इस दक्षिण दिशा के स्वामी यमराज माने जाते हैं। इसे संकट का द्वार भी कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यम को मृत्यु, अवरोध, विनाश का देवता माना गया है।

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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