जानिए हिन्दू धर्म मे आरती का वैज्ञानिक महत्व । Yogesh Mishra

आरती का वैज्ञानिक महत्व

आरती का धार्मिक महत्व होने के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है।
याद कीजिए आरती की थाल में कौन कौन सी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है।
आपके जेहन में रुई, घी, कपूर, फूल, चंदन जरूर आ गया होगा। रुई शुद्घ कपास होता है इसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती है।
इसी प्रकार घी भी दूध का मूल तत्व होता है। कपूर और चंदन भी शुद्घ और सात्विक पदार्थ है।

जब रुई के साथ घी और कपूर की बाती जलाई जाती है तो एक अद्भुत सुगंध वातावरण में फैल जाती है।
इससे आस-पास के वातावरण में मौजूद नकारत्मक उर्जा भाग जाती है और सकारात्मक उर्जा का संचार होने लगता है।
मस्तिष्क में बनाने वाले नकारत्मक रसायन बनाने बंद हो जाते हैं |

आरती में बजने वाले शंख और घड़ी-घंटी के स्वर के साथ जिस किसी देवता को ध्यान करके गायन किया जाता है उसके प्रति मन केन्द्रित होता है जिससे मन में चल रहे द्वंद का अंत होता है। हमारे शरीर में सोई आत्मा जागृत होती है जिससे मन और शरीर उर्जावान हो उठता है।अवसाद समाप्त हो जाता है और व्यक्ति को महसूस होता है कि ईश्वर की कृपा मिल रही है।

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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