जानिए भगवान श्री कृष्ण ने पीपल को सर्वश्रेष्ठ क्यों कहा । Yogesh Mishra

श्री कृष्ण ने पीपल को सर्वश्रेष्ठ  क्यों कहा ?
भारतीय संस्कृति में पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना पुलकित और प्रफुल्लित होती है। पीपल वृक्ष प्राचीन काल से ही भारतीय जनमानस में विशेष रूप से पूजनीय रहा है। ग्रंथों में पीपल को प्रत्यक्ष देवता की संज्ञा दी गई है। स्कन्दपुराण में वर्णित है कि अश्वत्थ(पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव- शाखाओं में नारायण- पत्तों में श्रीहर और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं। पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत:मूर्तिमान स्वरूप है। यह सभी अभीष्टों का साधक है। इसका आश्रय मानव के सभी पाप ताप का शमन करता है।

भगवान कृष्ण कहते हैं-

अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम्

अर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूं। स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्वको व्यक्त किया है। शास्त्रों में वर्णित है कि

अश्वत्थ: पूजितो यत्र पूजिता:सर्व देवता:।

अर्थात् पीपल की सविधि पूजा-अर्चना करने से सम्पूर्ण देवता स्वयं ही पूजित हो जाते हैं। पीपल का वृक्ष लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनष्ट नहीं होती। पीपल की सेवा करने वाले सद्गति प्राप्त करते हैं।

पीपल के कण कण में है औषधियों का निवास है | पीपल को प्राणवायु यानी ऑक्सीजन को शुद्ध करने वाले वृक्षों में सर्वोत्तम माना जा सकता है। पीपल फेफडों के रोग जैसे तपेदिक, अस्थमा, खांसी तथा कुष्ठ, प्लेग, भगन्दर आदि रोगों पर बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है। संपूर्ण भारतवर्ष में पीपल से लोगों की आस्था जुडी है। श्रद्धा, आस्था, विश्वास और भक्ति का यह पेड वास्तव में बहुत शक्ति रखता है। पवित्र और पूज्य पीपल का पेड बहुत परोपकारी गुणों से भरा होता है।पीपल का वृक्ष रक्तपित्त और कफ के रोगों को दूर करने वाला होता है।

पीपल का दूध — पीपल का दूध अति शीघ्र रक्तशोधक , वेदनानाशक, शोषहर होता है। दूध का रंग सफेद होता है। पीपल का दूध आंखों के अनेक रोगों को दूर करता है। पीपल के पत्ते या टहनी तोडने से जो दूध निकलता है उसे थोडी मात्रा में प्रतिदिन सलाई से लगाने पर आँखों के रोग जैसे पानी आना, मल बहना, फोला, आंखों में दर्द और आंखों की लाली आदि रोगों में आराम मिलता है।

पीपल की टहनियां — पीपल की टहनियों में से दातुन बना लें। प्रतिदिन पीपल का दातुन करने से लाभ होता है। यदि आप पित्त प्रकृति के हैं तो यह दातुन आपको विशेषकर लाभकारी होगा। पीपल के दातुन से दांतों के रोगों जैसे दांतों में कीडा लगना, मसूडों में सूजन, पीप या खून निकलना,दांतों के पीलापन,दांत हिलना आदि में लाभ देता है। पीपल का दातुन मुंह की दुर्गध को दूर करता है और साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढती है।


 

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

 -: सम्पर्क :-
-090 444 14408
-094 530 92553

comments

Check Also

आरंभिक साधक को नकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से क्यों दूर रहना चाहिए ? जरूर पढ़ें !

दो व्यक्तियों के मध्य सकारात्मक ऊर्जा का आदान प्रदान हो यह आवश्यक नहीं. इसका अर्थ …