ब्राह्मणों के हत्या की अंतर्राष्ट्रीय कार्य योजना : Yogesh Mishra

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत एक प्राकृतिक संसाधन संपन्न देश है और सामाजिक विषयों के जानकार यह भी जानते हैं कि भारत के प्राकृतिक संसाधनों के ऊपर यदि अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारी कब्जा करना चाहते हैं ! तो उन्हें सबसे पहले भारत राष्ट्र के बैद्धिक योद्धा ब्राह्मणों से टक्कर लेनी होगी !

उसी का परिणाम है कि उन अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों ने ब्राह्मणों को नष्ट करने के लिये 4 चरणों में एक सुव्यवस्थित कार्य योजना भारत में क्रियान्वित की है ! जिस योजना के प्रथम चरण में ब्राह्मणों का सामाजिक सम्मान नष्ट करने के लिये उन्होंने सर्वप्रथम अपने एजेंटों के द्वारा भारतीय समाज में यह भ्रामक प्रचार शुरू करवाया कि ब्राह्मणों द्वारा पूर्व में दलितों का शोषण किया गया था !

इस तरह का नारा लगाते हुये उन षड्यंत्रकारियों ने दलित नेताओं को समाज में ब्राह्मणों के विरुद्ध खड़ा कर दिया और जिन दलित नेताओं ने समाज को यह समझाने का प्रयास किया कि “भारत मूलतः दलितों का देश है और ब्राह्मण यूरेशियन नस्ल के विदेशी आक्रांता है ! जिन्होंने सदियों से दलितों का शोषण किया है !

इसलिये देश की आजादी के बाद नई संवैधानिक व्यवस्था के तहत दलितों को ब्राह्मणों से अपने शोषण का बदला लेना चाहिये और ब्राह्मणों को भारत से बाहर खदेड़ देना चाहिये ! इस विचारधारा के प्रचार-प्रसार और विस्तार के लिये अरबों डॉलर की ग्रांट इन विदेशी षड्यंत्रकारियों ने भारतीय दलित समाज के नेताओं को पहुंचाई जाती है ! जिससे वह ब्राह्मणों की सामाजिक प्रतिष्ठा समाप्त करने के साथ ही ब्राह्मणों का आर्थिक वर्चस्व भी समाप्त कर सकें !

ऐसा करने के लिये एक अन्य विशेष योजना के तहत देश की आजादी के समय विशेष परिस्थितियों में मात्र 20 वर्ष के लिये लागू की गयी संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का विस्तार आज देश की तथाकथित आजादी के 72 साल बाद भी समाज के हर पहलू में किया जा रहा है !

उसी का परिणाम है कि नाकारा और अयोग्य लोग आज सभी सार्वजनिक उपक्रम के साथ-साथ देवस्थल और लोकतांत्रिक संवैधानिक संस्थाओं में भी योग्यता न होते हुये भी आधे-आधे की दावेदारी आरक्षण व्यवस्था के तहत करते हैं और नितांत अयोग्य होने के बाद भी योग्य ब्राह्मण शासन सत्ता के बाहर सड़कों पर धक्के खाते फिर रहा है और अयोग्य से अयोग्य व्यक्ति आरक्षण का लाभ उठाते हुये शासन सत्ता की शक्तियों का दुरुपयोग करते हुये विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन है ! जहाँ पहुँच कर भी वह निरंतर देश को और खोखला ही कर रहा है !

और ब्राह्मण मात्र सरकारी नौकरी ही नहीं विश्वविद्यालय, लोकतांत्रिक संवैधानिक संस्थायें, न्यायपालिका, विभिन्न आयोग, कर विभाग, रेलवे, विभिन्न मंत्रालय आदि से जानबूझ कर एक योजना के तहत दूर किया जा रहा है और आये दिन नये-नये कानून बना कर ब्राह्मणों का हर स्तर पर शोषण किया जा कर रहा है !

तीसरा देश के आजाद होते ही जातिपात उन्मूलन के नाम पर ब्राह्मणों का पैतृक कार्य पूजा-पाठ और शिक्षा से भी ब्राह्मणों को वंचित करने के लिये समय समय पर नयी-नयी कार्य नीतियों का बड़ा जोर रहा है ! उसी का परिणाम है कि भारत के सभी बड़े मंदिर के अंदर वहां के ट्रस्ट या प्रशासनिक संस्थाओं में आज हिन्दू धर्म श्रेष्ठ शंकराचार्य के स्थान पर या तो विधर्मियों का कब्जा हो चुका है या फिर हो रहा है !

इसके साथ ही पूजा-पाठ, अनुष्ठान, कर्मकांड आदि में भी गैर ब्राह्मण शूद्रों को मात्र कुछ महीने का अल्प प्रशिक्षण देकर उन्हें ब्राह्मण घोषित कर उनके द्वारा धार्मिक कार्य और अनुष्ठान आदि कानून बना कर करवाये जा रहे हैं जो कि उनके मूल स्वभाव और संस्कारों के साथ साथ सनातन धार्मिक मान्यताओं के भी बिल्कुल विपरीत है !

लेकिन इसके बाद भी मात्र ब्राह्मणों को पूजा, मंदिर, अनुष्ठान और कर्मकांड से वंचित करने के लिये इस कार्य योजना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है !

चौथा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्राह्मण जो कि एक शौर्य नस्ल का जीव है ! उसकी सारी पैतृक सम्पत्ति देश की आजादी के समय जमींदारी उन्मूलन के नाम पर कानून बना कर छीन ली गयी थी ! वह अगर आज के इस कठिन संघर्षमय दौर में अपने पुरुषार्थ से अपना निजी अस्तित्व स्थापित करता है तो ऐसे गिने चुने ब्राह्मणों को चुन-चुन कर या तो काल्पनिक अपराधों में जेलों में डाल दिया जा रहा है या फिर उन्हें अपराधी घोषित करके उनका एनकाउंटर करवा दिया जा रहा है !

यह सभी कुछ पूरे भारत में एक सुव्यवस्थित योजना के तहत ब्राह्मणों को नष्ट करने के लिये किया जा रहा है ! यह षड्यंत्रकारी इतने अधिक प्रभावशाली हैं कि मठ मंदिरों के महान्त की खुले आम हत्या होने के बाद भी उन हत्यारों के विरुद्ध कोई भी कठोर विधिक कार्यवाही नहीं हो रही है और न ही इन मठ मंदिरों को कोई विधिक संरक्षण ही प्राप्त हो पा रहा है !

यह राष्ट्र व्यापी संपूर्ण ब्राह्मणों के सर्वनाश के षड्यंत्र के लिये रची जाने वाली परिस्थितियां प्राय: ब्राह्मणों को अवसाद ग्रस्त, मानसिक रोगी, अर्थ विहीन, शक्ति विहीन करने के लिये उन्हें शोषक और सामाजिक प्रपंची आदि कहकर उसकी प्रतिष्ठा को नष्ट करते हुये ! उसे भी नष्ट किया जा रहा है ! जो इन अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों की कार्य योजना है !

जिसे राष्ट्र के लोग अभी नहीं समझ पा रहे हैं लेकिन बहुत जल्दी ही इन ब्राह्मण विरोधी विदेशी षड्यंत्रकारियों की कार्य योजना को राष्ट्र समझेगा ! कि किस तरह भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिये सार्वजनिक संपत्तियों का प्राइवेटाइजेशन के नाम पर जो सार्वजनिक उपक्रमों के साथ साथ प्राकृतिक संसाधनों पर भी कब्जा करने की जो अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों की कार्य योजना चल रही है ! वह मात्र देश के ब्राह्मणों के लिये ही नहीं बल्कि भारत जैसे महान राष्ट्र के लिये भी खतरा है और जो ब्राह्मण इसके लिये राष्ट्र को आगाह करेगा वह भी मार दिया जायेगा !

लेकिन जब तक समाज जागेगा, तब तक शक्ति विहीन ब्राम्हण की समाज में कोई नहीं सुनेगा और वह स्वयं भी किसी भी प्रकार का विरोध करने में सक्षम नहीं रह पायेगा ! तब तक यह समाज भी आपस में छिन्न-भिन्न होकर नष्ट हो चूका होगा ! भारत जैसे महान देश का अस्तित्व मिट चूका होगा ! तब भारत वैसे ही नष्ट हो जायेगा जैसे विश्व की दर्जनों अनेक अन्य संस्कृतियों नष्ट हो चुकी हैं !

इसलिये ब्राह्मणों के विरुद्ध किये जाने वाले इस गंभीर षड्यंत्र को समझना होगा और अपने और अपने राष्ट्र को बचाने के लिये समय रहते समुचित कदम उठाने होंगे ! जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियाँ और हमारा राष्ट्र सुरक्षित रह सके !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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