क्या सारा दोष देश के तथाकथित बुद्धिजीवियों का ही है : Yogesh Mishra

यह एक कटु सत्य है कि आज हमारे राष्ट्र और समाज में जो भी समस्याएं दिखाई दे रही हैं ! इन सब का सबसे अधिक दोषी समाज देश का तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ही है !

क्योंकि यह वर्ग विलासिता का जीवन जीते जीते अब पलायनवादी हो गया है ! आज देश के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग में वह साहस नहीं बचा कि वह अपने ए.सी. की ठंडक और सोफे की मुलायमियत छोड़कर राष्ट्र और समाज के हित में कोई जन आंदोलन खड़ा कर सके !

यह वर्ग आज संघर्ष से पीछे हट चुका है ! शायद इसी का परिणाम है कि धूर्त, स्वार्थी और अवसरवादी लोग आज भारत की राजनीति पर काबिज हैं ! जो आज देश के लिये मात्र समस्या ही नहीं बन रहे हैं बल्कि वह लोग देश के अस्तित्व को भी अपने निजी छोटे-छोटे स्वार्थों के लिये खतरे में डाल रखे हैं !

क्योंकि आज का विलासी बुद्धिजीवी वर्ग अपनी कथित स्वरचित प्रतिष्ठा बचाने के लिये किसी भी तरह के आक्षेप और आरोपों को अपने दामन तक आने ही नहीं देना चाहते हैं ! संघर्ष तो बहुत दूर की बात है !

मात्र इसलिये धूर्त, अवसरवादी सिद्धांतों को ताक पर रखकर साम, दाम, दंड, भेद के माध्यम से वह सब कुछ पा लेता हैं, जिसके वह वास्तव में हकदार नहीं हैं और न ही कभी हो सकते हैं ! फिर चाहे वह राजनीतिक संवैधानिक पद या फिर आम समाज को संचालित करने वाला प्रशासनिक पद !

आज राष्ट्र में व्याप्त विकट समस्या को देखने और सुनने के बाद यदि सभी बुद्धिजीवी जनों ने संघर्ष के लिये मन बना लिया तो यकीन मानिये कि राष्ट्र की वर्तमान स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन होने से कोई नहीं रोक सकता है !

सदैव से ऐसे ही चंद गिने चुने लोगों ने राष्ट्र, समाज, जनहित में अपने को समर्पित कर लोगों के सहयोग से बहुत से अच्छे-अच्छे कार्य किये हैं ! जिसका आज हम उपभोग कर रहे हैं !

वर्ना तो आज राष्ट्रीय नेतृत्व में दुष्ट और अपराधियों की भरमार है ! किसी भी पीने योग्य पानी से भरे हुये बर्तन को शुद्ध बनाये रखना भी आज के युग में एक बड़ा संघर्ष है ! क्योंकि व्यक्ति बर्तन से शुद्ध पानी पीना तो ले लेना चाहता है किन्तु अकेले ही ! यदि उसी बर्तन से कोई दूसरा व्यक्ति शुद्ध पानी पीना चाहे तो सदैव दुष्ट व्यक्ति की यह मंशा होती है कि वह अपने लिये पानी निकाल कर उस शुद्ध पानी को दूषित कर दे क्योंकि दूसरों को उत्पन्न कष्ट से उसे आनंद की प्राप्ति होती है !

हमारी इसी नकारात्मक सोच ने हमें सर्वनाश के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है और आज विश्व के सामने हम एक दरिद्र भिखारी राष्ट्र से अधिक और कुछ नहीं हैं ! न तो हमारे पास तकनीकी है और न ही भविष्य की कोई सकारात्मक योजना ! बल्कि सच तो यह है कि आज 140 करोड़ की आबादी वाला देश मानवता पर एक बोझ बन कर रह गया है ! जिसे विश्व के छोटे-छोटे विकसित देश ढो रहे हैं !

सुनने में बुरा जरूर लग रहा होगा लेकिन राष्ट्र की यह सारी समस्या आज सामाजिक जीवन से बुद्धिजीवियों के पलायन के कारण पैदा हुई ! जब तक बुद्धिजीवी पुनः सामाजिक जीवन में सक्रिय नहीं होंगे ! तब तक भारत का निरंतर पतन और भी तीव्र गति से होता रहेगा !

इसलिए अपने राष्ट्र और अपने आने वाली पीढ़ियों की रक्षा के लिये भारत के वास्तविक बुद्धिजीवियों को फिर से राष्ट्र को दिशा देनी होगी ! जिससे तथाकथित बुद्धिजीवी जो आज राष्ट्र का सर्वनाश कर रहे हैं ! उनके षडयंत्र को समाज के सामने प्रस्तुत किये जा सके !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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