अब हमें काल्पनिक ईश्वर से पीछा छुड़ाना होगा : Yogesh Mishra

ईश्वर का तात्पर्य अंधविश्वास नहीं है ! ईश्वर वह ऊर्जा है, जिसके पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अनुभूतियां स्पष्ट रूप से प्रगट होती हैं ! ईश्वर कोई कोरी कल्पना नहीं है बल्कि यह ईश्वरीय ऊर्जा के साक्षात्कार का विषय है !
यह सनातन धर्म का दुर्भाग्य रहा है कि कुछ लोगों ने अपने समय के राजकुमारों को मात्र क्षणिक लाभ हेतु चाटुकारिता में भगवान बना दिया ! फिर वह चाहे राम, कृष्ण, महाबीर या गौतम बुद्ध ही क्यों न हों !

उनके ऊपर बड़े-बड़े ग्रंथ लिख दिये गये ! भजन मंडलियों द्वारा उनका बखान किया जाने लगा और अब वर्तमान कथावाचक भी इन उन राजकुमारों को भगवान सिद्ध करने में लगे हुये हैं !

किंतु यह सभी मानव निर्मित भगवान मानवता के लिए खतरनाक हैं ! आज पूरी दुनिया विज्ञान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है और जिन्हें हमने भगवान मान रखा है वह भी अपने समय में उस समय के विज्ञान के साथ ही चल रहे थे ! तभी उन्हें लोगों ने भगवान माना !

किंतु आज विज्ञान की समझ न रखने वाले बेरोजगार, अनपढ़, जाहिल, कथावाचक, ढोलक मजीरा पीट कर अपने जिस भगवान का महिमामंडन कर रहे हैं उस तथाकथित भगवान द्वारा उस समय अपनाये गये विज्ञान को भी अज्ञानता वश बहुत पीछे छोड़ दिया है और वह यह नहीं जानते हैं कि उनके भगवान भी विज्ञान की मदद से ही उस समय भी चमत्कार किया करते थे ! जिसे यह कथावाचक ईश्वरीय माया, योग माया, महामाया आदि कह कर संबोधित करते हैं !
इन्हीं अज्ञानी कथा वाचकों की वजह है कि अपने स्वर्णिम साहस पूर्ण इतिहास के होने के बाद भी भारत इन कथा वाचकों की बात पर विश्वास करके 1000 साल से अधिक गुलाम रहा !

चमत्कार को नमस्कार करने वाला यह कथावाचकों का काल्पनिक वक्तव्य ही आज हिंदुत्व के सर्वनाश का कारण बन गया है ! इसलिए यह परम आवश्यक है कि विश्व के विकास की गति को पहचानना होगा और कथावाचकों के कोरे काल्पनिक भगवान से पिंड छुड़ाना होगा !

क्योंकि भगवान भरोसे बैठकर हमने भारत के पिछले 2500 साल में 24 टुकड़े करवा दिये हैं और भगवान कहीं भी हमारी मदद के लिए नहीं आया ! न जाने कितने लोग बेघर हो गये, बहू बेटियों की इज्जत लूट ली गई, हत्यारों का नंगा नाच इतिहास में दर्ज है ! पर तथाकथित भगवान कभी भी किसी की रक्षा के लिए प्रकट नहीं हुआ ! अपने तथाकथित प्रिय भक्तों और कथावाचकों के लिये भी नहीं !

इसका तात्पर्य यह है कि ईश्वर भी यह चाहता है कि जब आप अपनी रक्षा स्वयं करेंगे, तभी वह आपकी सहायता करेगा ! तो जब ईश्वर इस शर्त पर हमारी मदद करने को तैयार है कि हमें पहले अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी तो फिर हम ईश्वर के इंतजार में अपना भविष्य क्यों बर्बाद कर रहे हैं !

भारतीय जनमानस अत्यंत कल्पनाशील और भावुक है ! किंतु कल्पना और भावुकता से मनुष्य अपनी रक्षा नहीं कर सकेता है ! इसलिए अब हमें काल्पनिक ईश्वर से पीछा छुड़ाकर यथार्थ विज्ञान का सहारा लेना होगा जिसका प्रयोग सदैव से भगवान ने भी किया है ! तब ही हमें ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होगा !

जिस संदर्भ में सनातन ज्ञान पीठ बहुत जल्द “विश्व सत्ता” पर अपना प्रयोगात्मक वक्तव्य श्रंखला आरंभ करने जा रहा है ! जिसमें समाज का कोई भी व्यक्ति भागीदारी कर सकता है ! आप सभी इस वक्तव्य श्रंखला से जुड़कर भारत को महाशक्ति बनाने में अपना योगदान दें !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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