ब्राह्मण ही राष्ट्र की रक्षा कर सकता है अन्य कोई नहीं : Yogesh Mishra

भारतीय समाज ज्ञान के विषय में मूलतः दो परंपराओं में लंबे समय तक विभक्त है ! एक ब्राह्मण द्वारा दिये जाने वाला ज्ञान और दूसरा श्रमण परंपरा का ज्ञान ! परंपराओं का समुच्चय ही सनातन संस्कृति का मौलिक स्वरूप ले लेता है ! मोटे तौर पर इस ज्ञान पध्यति के आधार पर दो संस्कृतियों का विभाजन मानना चाहिये !

ब्राह्मण संस्कृति सामाजिक बंटवारा योग्यता के अनुसार करके वर्ग विशेष को विभिन्न ज्ञान प्रदान करती है ! यही ज्ञानी वर्ग पूरे समाज की हर गतिविधि के मानक तय करता है ! क्या खाना है, क्या पीना है, कब सोना है, कब उठना है, क्या पहनना है, क्या शुभ है व क्या अशुभ है, यह सब ज्ञानी वर्ग द्वारा समाज के विकास के लिये तय किया जाता है ! जो इन मानकों को तोड़ता है ! उसे अधर्मी कहा जाता है ! क्योंकि समाज के व्यवस्थित तरीके से चलने के लिये समाज में धर्म का अनुपालन आवश्यक है !

दूसरा श्रमण संस्कृति मूलतः श्रम को महत्व देती है ! कर्म को ही धर्म मानकर पूंजी का निर्माण करती है ! श्रम के बल पर समाज व देश दोनों चलते है ! हर कार्य श्रमण संस्कृति के बूते पर ही सम्पूर्ण होता है ! ब्राह्मण संस्कृति श्रमण संस्कृति के बल पर ही जीवन यापन करती है ! मगर श्रमण संस्कृति के ऊपर राष्ट्र को सही दिशा देने के लिये अपने ज्ञान द्वारा मार्गदर्शन करती है ! यही हमारी सनातन परम्परा है !

भारत मे अंग्रेजों के आगमन के बाद समाज को विकृत कर कमजोर करने के लिये ब्राह्मणों का महत्व घटा कर श्रमण संस्कृति के महत्व को कानून बना कर अधिक महत्व दिया गया और समाज को नियंत्रित करने वाले ब्राह्मणों को शोषक घोषित कर दिया गया !

तथाकथित आजादी के बाद भी जो लोकतंत्र का रास्ता अपनाया गया उसमें ब्राह्मण संस्कृति के स्थान पर श्रमण संस्कृति को ही अधिक महत्व व स्वतंत्रता प्रदान की गयी ! जिस वजह से अब दोनों संस्कृतियों में आपसी जंग चल रही है ! और ब्राह्मण संस्कृति को कमजोर करने के लिये नित्य नये कानून बनाये जा रहे हैं ! विदेशों से भी अथाह धन आ रहा है ! सन्तों को झूठे आरोप में जेलों में डाला जा रहा है ! जिससे धर्मान्तरण तेजी से हो सके !

यह जो खतरा धर्म पर बतलाया जा रहा है ! वह असल मे धर्म पर खतरा नहीं है बल्कि राष्ट्र पर खतरा है ! क्योंकि ब्राह्मण संस्कृति कमजोर करने और उसके लिये बहुत बड़ी मात्रा में धन व्यय करने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि विदेशी ताकत यह चाहती हैं कि ब्राह्मणों का प्रभाव समाज में खत्म हो ! जिससे देश के प्राकृतिक संसाधनों पर वह अपना कब्जा कर सकें !

क्योंकि अनुभव में यह आया है कि जब-जब विदेशियों ने भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिये कोई भी प्रयास किया है ! तो सदैव ब्राह्मणों ने समाज को संगठित करके उनका चरणबद्ध विरोध किया है ! जिससे वह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाये हैं !

किन्तु अब वह लोग यह रिस्क नहीं लेना चाहते हैं ! इसलिये योजनाबद्ध तरीके से पहले ब्राह्मणों को आर्थिक रुप से कमजोर करने के लिये उन्होंने ब्राह्मणों की संपत्ति सीलिंग आदि कानून बनाकर जप्त कर ली और फिर आरक्षण के द्वारा ब्राह्मणों को सरकारी पदों से दूर किया ! फिर विदेशों से धन भेज कर आपके ही देश के कुछ ब्राह्मण विरोधी मानसिकता के लोगों को उन्होंने ब्राह्मण विरोधी टास्क दिया और उस टास्क का उद्देश्य है कि समाज में ब्राह्मणों का प्रभाव जल्दी से जल्दी कैसे खत्म हो ! जिससे वह भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर अपना कब्जा कर सकें !

इसमें कई तथाकथित बुद्धजीवी, राजनेता, ब्राह्मण विरोधी धर्म गुरु और पूर्व अवकाश प्राप्त प्रशासनिक अधिकारी लगे हुये हैं ! इसके लिये वह लोग राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक संगठनों को ब्राह्मणों के ऊपर हर तरह के हमले करने के लिये निरंतर प्रोत्साहित करते हैं !

और ब्राह्मण बराबर अपनी आत्मरक्षा की मुद्रा में है ! लेकिन यह कब तक चलेगा ! यह मान कर चलिये कि जिस दिन ब्राह्मण आत्मरक्षा के स्थान पर आक्रामक मुद्रा में आ जायेगा ! उसी दिन इन विदेशी षड्यंत्रकारियों के सारे षड्यंत्र विफल हो जायेंगे !

ऐसा एक बार नहीं पूर्व में भी दर्जनों बार हुआ है ! जब एक सीमा के बाद ब्राह्मण संगठित हुये हैं और उन्होंने सत्य सनातन हिंदू संस्कृति पर हमला करने वाले हमलावरों को जड़ से खत्म कर दिया है ! परशुराम, चाणक्य, पुष्यमित्र शुंग, शंकराचार्य, गोस्वामी तुलसीदास, मंगल पाण्डेय, लोक मान्य तिलक, वीर सावरकर, केशव बलिराम हेडगेवार, नाथूराम गोडसे आदि आदि !

ब्राह्मण सदैव से राष्ट्र रक्षा का एक मात्र आखिरी विकल्प है ! क्योंकि ब्राह्मण में ही वह ईश्वरीय अंश है ! जो सभी सांसारिक षडयंत्र को विफल कर सकता है ! जिसे ईश्वर का पूर्ण सहयोग प्राप्त है ! यही ईश्वरीय व्यवस्था है ! यदि आपको अपनी सभ्यता और संस्कृति को सुरक्षित रखना है ! तो राष्ट्र के ब्राह्मणों को पुन: एक जुट होना ही होगा !

यह कैसे होगा इस विषय में भविष्य में लेख द्वारा अपनी योजना प्रकट करूंगा !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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