सावधान हो जाइये कहीं आपकी कुण्डली में राजयोग भंग तो नहीं हो रहा है | Yogesh Mishra

राजयोग भंग होने पर हाथ आती राज सत्ता भी चली जाती है और व्यक्ति दर-दर ठोकरें खाने के लिये बाध्य हो जाता है | जैसे राजा हरिश्चन्द्र, देव राज इन्द्र, भगवान शिव, भगवान विष्णु आदि | आजकल सुब्रत सहारा, आशाराम बापू ,देवी प्रज्ञा आदि | अर्थात राजयोग भंग के ग्रहीय योगों के प्रभाव से इन्सान तो क्या भगवान भी नहीं बच पाते हैं | उदाहरण के लिये भगवान श्री रामचंद्र जी की कुंडली लीजिये | जिसमें राजयोग भंग स्पष्ट दिखाई पड़ता है। लग्नस्थ शुभ सौम्य ग्रहों, उच्चस्थ गुरु व स्वगृही चंद्र पर प्राकृतिक पाप ग्रहों मंगल व शनि की पूर्ण दृष्टि गुरु व चंद्र द्वारा स्थापित राजयोग को भंग कर रही है। यही कारण है कि राजा के घर में जन्म लेने पर भी श्री राम को बनवासी होना पड़ा। यही नहीं सप्तमेश शनि अपनी उच्चस्थ राशि में चतुर्थ केंद्र में पंचमहापुरुष योगों में से शशयोग निर्मित कर रहा है किंतु शनि का अपनी उच्च राशि में वक्री होने के कारण श्री राम का यह राजयोग भंग हुआ व उन्हें अपनी भार्या का वियोग सहना पड़ा ।

 

इसी तरह प्रायः राजयोग के शुभ फल न मिलने के मुख्‍य कारण राजयोग बनाने वाले ग्रह का कमजोर होना पाया जाता है । ग्रह की ताकत जानने के लिए षड्बल पध्यति से गणना की जाती है। उसके अलावा पंद्रह अन्‍य पध्यतियां भी ग्रहों के शक्ति परीक्षण के लिये बतलाई गई हैं । इसके अलावा भी राजयोग भंग की गणना के अन्य बहुत से सिद्धांत हैं |

 

अगर राजयोग बनाने वाला ग्रह जिस राशि में बैठा है उसका राशि स्‍वामी बहुत कमजोर है या राजयोग बनाने वाला ग्रह पाप ग्रह खासकर मंगल या शनि से देखा जा रहा हो या फिर राजयोग बनाने वाला ग्रह दो राशियों या नक्षत्रों की संधि पर आ जाये । तब भी राजयोग भंग हो जाता है |

 

खासकर राजयोग कारक ग्रह का नीच नवमांश में होना भी राजयोग भंग करता है या कुण्‍डली की शक्ति अर्थात लग्‍न और चंद्र बहुत कमजोर होंगे तो भी राजयोग का कोई फल नहीं मिलता है ।

 

यदि जन्मपत्री में षष्ठेश व एकादशेश मंगल उच्चस्थ होकर अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बुध व शुक्र के राजयोग को भंग कर देता है। कर्मेश व केंद्राधिपति दोष से दूषित होकर गुरु द्वितीय भाव में उच्चस्थ और वक्री बैठा हुआ हो और अष्टम नवमेश शनि पंचम त्रिकोण भाव में उच्चस्थ और वक्री हो । तो भी राजयोग भंग हो जाता है |

 

कुंडली में कोई भी ग्रह चाहे उच्च का हो, बलवान स्थिति में हो | उसके साथ यदि बलवान सूर्य/चंद्र हो तो राजयोग भंग हो जाता है। इसी तरह कुंडली में नवमेश व दशमेश राजयोग कारक बुध व चंद्र के दशम भाव में होने के बावजूद उनके सूर्य के साथ होने मात्र से राजयोग भंग हो जाता है । यदि नवमेश व दशमेश राजयोग स्थापित कर रहे हों और उनके साथ बाधकेश हो तो भी राजयोग भंग हो जाता है।

 

बलवान ग्रह जब गोचर में स्तंभित हो जाता है तो राजयोग भंग कर देता है । इसी तरह अकारक ग्रह की दशा हो और यदि वह ग्रह अपनी ही दशा अंतर्दशा में फल दे तो बाकी की दशा का राजयोग भंग हो जाता है। कुंडली में

पूर्ण चंद्र होते हुए भी भाग्येश चंद्र से कर्मेश सूर्य यदि अष्टमस्थ हो, तो भी राज योग भंग होता है । कुंडली में नवमेश व दशमेश सूर्य व चंद्र आमने सामने होने पर भी राजयोग भंग हो जाता है ।

 

भाग्येश चंद्र के साथ वक्री प्राकृतिक पाप ग्रह, अकारक व नीचस्थ शनि से द्रष्ट या युत हैं तो भी राजयोग भंग हो जाता है | चंद्र से सूर्य के अष्टम होने के कारण भी राजयोग भंग होता है । आदि-आदि ऐसे ही दर्जनों ग्रह योग हैं जो कुण्डली के स्पष्ट राजयोगों को भंग कर देते हैं |

 

ग्रहों की शक्ति को शास्त्र सम्मत तरीके से बढ़ा–घटा कर या गोचर में होने वाले ग्रहीय राजयोग भंग के प्रभाव को कुछ सनातन उपायों द्वारा राजयोग भंग के प्रभाव से बचा जा सकता है | बस आवश्यकता है एक ऐसे ज्योतिष विद की जो राजयोग भंग के सही कारण को ढूढ़ कर सही पध्यति से उपाय करवा सके |

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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