राक्षस नहीं ब्रह्मा के वंश का देवयोनि के उच्चकुल का ब्राह्मण था रावण ! पढ़े पूरा लेख !

सामान्यतया यह माना जाता है के रावण दुष्ट प्रवृत्ति का राक्षस व्यक्ति था लेकिन यह सूचना गलत है रावण भगवान ब्रह्मा के वंश का एक देवयोनि का उच्चकुल का ब्राह्मण था जिसने अपने ज्ञान और पुरुषार्थ से भगवान शिव को प्रसन्न कर कुछ ऐसी शक्तियां प्राप्त करली थी जिनके प्रभाव से उसने पूरे विश्व पर अपना शासन प्राप्त कर लिया था

किंतु इंद्र, यम, वरुण, प्रजापति, विष्णु आदि देव रावण के बढ़ते हुए प्रभाव से भयभीत हुए तब उन्होंने रावण की मृत्यु के लिए एक सुनियोजित योजना वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त ऋषि के साथ बनाई जिसके तहत दशरथ के पुत्र राम को वशिष्ठ और विश्वामित्र ने युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया एवं युद्ध में हथियारों की सप्लाई पूर्ति अगस्त ऋषि तथा भारद्वाज ऋषि ने की तथा इंद्र आदि देव ने वायु में चलने वाले रथ आदि उपलब्ध करा कर सामूहिक रुप से रावण का वध कर दिया जबकि महर्षि वाल्मीकि ने स्वयं रावण को महात्मा कहा है। उन्होने लिखा है कि सुबह के समय लंका में पूजा-अर्चना, शंख और वेद ध्वनियों से वातावरण गुंजायमान था । रावण अतुलित ज्ञानी तथा बहु-विद्याओं का मर्मज्ञ था। एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ राष्ट्रनायक था।

यत्र-तत्र फैली वैदिक ऋचाओं का कुशल संपादक रावण ने ही किया तथा अंक-प्रकाश, इंद्रजाल, कुमार तंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद-भाष्य, रावणीयम (संगीत), नाड़ी-परीक्षा, अर्कप्रकाश, उड्डीश तंत्र, कामचाण्डाली, रावण भेंट आदि पुस्तकों का स्वयं रचनाकार भी था। रावण ने शिव-तांडव स्तोत्र तथा अनेक शिव स्तोत्रों की रचना की। यह अद्भुत है कि जिस ‘दुराचारी’ रावण को हम हर वर्ष जलाते हैं, उसी रावण ने लंका के ख्यात आयुर्वेदाचार्य सुषेण के द्वारा घायल लक्ष्मण की चिकित्सा करने की अनुमति सहर्ष प्रदान की थी।
स्वयं हनुमानजी उसके धर्मशास्त्र और अर्थशास्त्र संबंधी ज्ञान का लोहा मानते थे। महान शिवभक्त होने के साथ-साथ उसने घोर तपस्या के द्वारा ब्रह्मा से भी वर प्राप्त किए थे। आकाशगामिनी विद्या तथा रूप परिवर्तन विद्या के अलावा पचपन विद्याओं के लिए रावण ने पृथक से तपस्याएँ की थीं।

उसने अपनी राज-सत्ता का विस्तार करते हुए अंगद्वीप, मलयद्वीप, वराहद्वीप, शंखद्वीप, कुशद्वीप, यवद्वीप और आंध्रालय (लगभग सारी प्रथ्वी ) को जीतकर अपने अधीन कर लिया था।
रावण के बारे में वाल्मीकि रामायण के अलावा पद्मपुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण, महाभारत, आनंद रामायण, दशावतारचरित आदि हिन्दू ग्रंथों के अलावा जैन ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है।

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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