सीता माता को अशोक के पेड़ के नीचे कष्ट में नहीं बल्कि गुफा में समस्त सुख सुविधाओं में रखा था रावण ने : Yogesh Mishra

अशोक वाटिका लंका में स्थित है ! जहां रावण ने माता सीता को राजनैतिक हरण करने के पश्चात समस्त सुख सुविधाओं के साथ रखा था ! लेकिन यह किसी अशोक के पेड़ के नीचे नहीं बल्कि एलिया पर्वतीय क्षेत्र की एक गुफा में समस्त सुख सुविधाओं के साथ सीता माता को रखा गया था ! जिसे ‘सीता एलिया’ नाम से जाना जाता है ! यहां सीता माता के नाम पर एक मंदिर भी है !

वेरांगटोक, जो महियांगना से 10 किलोमीटर दूर एक स्थान है ! वहीं पर रावण ने सीता को पुष्पक विमान से उतारा था ! महियांगना मध्य श्रीलंका स्थित नुवारा एलिया का एक पर्वतीय क्षेत्र है ! इसके बाद सीता माता को जहां ले जाया गया था ! उस स्थान का नाम गुरुलपोटा है ! जिसे अब ‘सीतोकोटुवा’ नाम से जाना जाता है ! यह स्थान भी महियांगना के पास ही है !

इसी एलिया पर्वतीय क्षेत्र की एक गुफा में सीता माता को रखा गया था ! जिसे ‘सीता एलिया’ नाम से जाना जाता है ! यहां सीता माता के नाम पर एक मंदिर भी है ! इसके अलावा सीता माता को एलिया में रावण की भतीजी विभीषण की बेटी त्रिजटा जो कि बहुत ही खुबसूरत थी, को सीता माता की देखभाल के लिये रावण ने नियुक्त किया था ! जो निरंतर सीता माता के साथ ही रहती थी जिससे उन्हें कोई असुविधा न हो !

सीता माता प्राय: विभीषण की बेटी त्रिजटा के साथ सुबह शाम न्यूरा ऐलिया से उदा घाटी तक भ्रमण करती थी ! जो कि उनके निवास अशोक वाटिका से पांच मील की दूरी पर स्थित थी ! इसी सड़क पर हक्गला उद्यान के पास एक छोटा मन्दिर बना है ! जिसे आज “सीता अम्मन कोविले” कहते हैं !

सीता माता को नित्य नये फल, और सात्विक भोजन उपलब्ध करवाया जाता था ! नियमित रूप से वैध परीक्षण करते थे ! आवश्यकतानुसार सभी वस्तु उपलब्ध करवाई जाती थी !

इसका प्रमाण इस घटना से भी मिलता है कि रामेश्वरम् की स्थापना के समय जब रावण के ताऊ जामवंत ने रावण से सीता को पूजन स्थल पर लाने रावण को पांडित्य कर्म करने का आग्रह किया तो उस समय सीता को देख कर राम लक्ष्मण सहित किसी को भी यह एहसास नहीं हुआ कि माता सीता कष्ट में हैं !

या अगर रावण चाहता तो अंतिम निर्णायक युद्ध के पहले वह सीता की हत्या भी कर सकता था ! पर उसने पूरे जीवन में कभी भी किसी भी स्त्री को प्रताड़ित नहीं किया था ! जबकि राम ने तो अपने क्षत्रिय जीवन की शुरुआत ही रावण की 120 वर्षीय वृद्ध नानी तड़का के वध से ही शुरू किया था !

रावण के पास पुष्पक विमान था ! रावण इस पुष्पक विमान में प्रयोग होने वाले ईंधन से संबंधित जानकारियों पर मद्रास की ललित कला अकादमी के सहयोग से भारत अनुसंधान केंद्र द्वारा बड़े पैमाने पर शोध कार्य किया था ! और यह निष्कर्ष निकला कि यह विमान विपरीत गुरुत्व से चलता था ! श्रीलंका की श्रीरामायण रिसर्च कमेटी के अनुसार रावण के पास मात्र उसकी राजधानी लंका में ही 4 हवाई अड्डे थे ! जबकि पूरे देश में 200 से अधिक हवाई अड्डे थे !

उसके राजधानी के 4 हवाई अड्डो का नाम उसानगोड़ा, गुरुलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला था ! सिंहली भाषा में वारियापोला का अर्थ हवाई अड्डा ही होता है ! कुरनांगला जिले में एक हवाई अड्डा था ! दूसरा अड्डा मातली जिले में था ! सबसे अहम था वेरेगनटोटा हवाई अड्डा ! जहाँ से रावण उसानगोड़ा हवाई अड्डा नष्ट होने के बाद उड़ान भरता था ! इस हवाई अड्डे की व्यवस्था अहिरावण देखता था ! इसके अलावा अहिरावण तोतूपोलाकंदा हवाई अड्डे की व्यवस्था भी देखता था !

इन चार में से रावण का निजी उसानगोड़ा हवाई अड्डा हनुमान ने लंका दहन के समय नष्ट कर दिया था ! जब वह सीता माता की तलाश में लंका पहुंचे थे ! इसका रनवे लाल रंग का था ! इसके आसपास की जमीन कहीं काली तो कहीं हरी घास लगवाई गयी थी ! जिससे इसे आपातकाल में लड़ाकू जहाजों के लिये इस्तेमाल किया जा सके हो !

रिसर्च कमेटी के अनुसार पिछले 4 साल की गयी खोज में यह हवाई अड्डे मिले हैं ! कमेटी की रिसर्च के मुता‍बिक रामायण काल से जुड़ी लंका वास्तव में श्रीलंका ही है ! कैंथ ने बताया कि श्रीलंका में 50 जगहों पर रिसर्च की गई थी ! जिसमें बहुत से ऐसे तथ्य मिले हैं जिन्हें समझ पाना अभी हम लोगों के लिये संभव नहीं है ! हो सकता है कि वह दूसरे ग्रहों से सम्बंधित हों !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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