हिंदुओं में ‘तलाक’ नेहरू की देंन है । एक और एतिहासिक तथ्य आ सामने । जरूर देखें ।

 जैसा कि आप जानते है इंदिरा गांधी नेहरू की बेटी थी ,और इसकी माँ का नाम कमला नेहरू था इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरू को जब यह पता चला कि इंदिरा गांधी जूनागढ़ गुजरात के नवाब खान,जो की एक मुस्लिम व्यापारी है और आनन्द भवन (नेहरू का घर) में सामान सप्लाई करते थे उनके बेटे फिरोज गांधी (खान) से विवाह करना चाहती है तब उन्होंने इसका विरोध किया किन्तु जब कमला नेहरू की मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी का इलाज करवाने के दौरान हो गई।
 
मौका देखकर तब फिरोज गांधी (खान) ने इन्दिरा गांधी को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाकर सन् 1942 में लन्दन की एक मस्जिद में उससे शादी रचा ली और उनका नाम मैमूना बेगम रख दिया । नेहरू को पता चला तो वे बहुत लाल-पीले हुए, लेकिन अब क्या किया जा सकता था.जब यह खबर मोहनदास करमचन्द गाँधी को मिली तो उन्होंने ताबड़तोड़ नेहरू को बुलाकर समझाया, राजनैतिक छवि की खातिर फिरोज गांधी (खान) को मनाया जाए कि यदि वह अपना नाम गाँधी रख ले.. तो उन्हें कांग्रेस से सांसद बना दिया जाएगा भले ही गुप्त रूप से वह अपना इस्लाम धर्म मानते रहें |
 
यह एक आसान काम था जो एक शपथ पत्र के जरिये, बजाय धर्म बदलने के सिर्फ नाम बदल कर किया जा सकता था इस तरह वह फिरोज खान (खान ) से फिरोज (गाँधी) बन गये । फिर उन दोनों (फिरोज और इन्दिरा) को भारत बुलाकर जनता के सामने दिखावे के लिये एक बार पुनः वैदिक रीति रिवाज़ से उनका विवाह करवाया गया ।
 
इस बारे में नेहरू के सेक्रेटरी एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक “रेमेनिसेन्सेस ऑफ द नेहरू एज’ के (पृष्ट नंबर 94 पैरा २), जो अब भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्धित है, में लिखते हैं कि पता नहीं क्यों नेहरू ने सन 1942 में एक अन्तर्जातीय और अन्तर्धार्मिक विवाह को वैदिक रीति रिवाजों से किये जाने को अनुमति दी, जबकि उस समय यह अवैधानिक था। कानूनी रूप से उसे सिविल मैरिज होना चाहिये था।
 
 
सांसद बनने के बाद फिरोज गाँधी अक्सर नेहरू परिवार को परेशान किया करते थे, और नेहरू की राजनैतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप तक करने लगे थे। तंग आकर नेहरू ने फिरोज का तीन मूर्ति भवन मे आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और कानूनी रूप से भी पीछा छुड़ाने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 को संसद में भारी विरोध के बाद भी पास करवा कर संपूर्ण भारत में लागू करवा दिया और इस अधिनियम के तहत कानूनी रुप से इंदिरा गांधी व फिरोज गांधी का विधिक तलाक हो गया ।
 
जबकि तलाक शब्द मुस्लिम विवाह पद्धति का अंश है उर्दू का शब्द है क्योंकि मुसलमानो के यहां विवाह एक संविदा है जो कि मेहर के रकम से पूरी की जाती है, जबकि हिंदू रीति रिवाजों में विवाह को एक संस्कार माना गया है और हिन्दू मान्यता के अनुसार संस्कार कभी समाप्त नहीं होते | जिस सभ्यता मे जो वस्तु हो ही नही सकती थी उस के लिये भाषा शब्द भी नही हो सकेंगे पुराने समय में हिन्दू सभ्यता में ‘तालाक’ की कोई परिकल्पना ही नहीं होती थी इसी वजह से हिंदुओं में तलाक जैसा कोई शब्द नहीं होता ।
 
 

जब तलाक शब्द को कानूनी रुप से चुनौती दी गई तो अब तलाक के स्थान पर विवाह विच्छेद शब्द का प्रयोग किया जाता है किंतु यह सारी की सारी पद्धति और प्रक्रिया हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत चलती है जो अधिनियम इंदिरा गांधी फिरोज गांधी के तलाक के लिए बनाया गया था | नेहरू ने अपने निजी हित के लिए संसद मे पास करवाया । जिसे पूरा हिन्दू समाज आजतक भुगत रहा है ।

 

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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