पुत्रेष्ठि यज्ञ का अज्ञात रहस्य : Yogesh Mishra

तीन तीन पत्नियों के होने के बाद भी शुक्राणु की निर्बलता के कारण राजवैध द्वारा लंबे समय तक चिकित्सा किये जाने के बाद भी जब 40 वर्ष की आयु बीतने तक राजा दशरथ को कोई उतराधिकारी पुत्र संतान प्राप्त नहीं हुई !

तब उन्हें मजबूर होकर शिव के भक्त और अपने दमाद श्रृंग ऋषि के शरण में जाना पड़ा जोकि विशुद्ध शैव उपासक थे, साथ ही उस समय के आयुर्वेद के यज्ञ पद्धति के महाविशेषज्ञ थे !

जिनके निर्देश पर उत्तर प्रदेश मे बस्ती जिले के मनवर यानी मनोरमा नदी के किनारे मख धाम मखौड़ा मे गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से त्रेता युग में शिवरात्रि को राजा दशरथ के संतान के लिये पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया गया ! इसी यज्ञ के बाद राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ था !

यज्ञ वैसे आयुर्वेद के सूक्ष्म चिकित्सा विधान की एक पध्यति है ! यज्ञ का आश्चर्यजनक प्रभाव मनुष्य के शरीर ही नहीं बल्कि उसके आत्मा, बुद्धि एवं निरोगता पर भी पड़ता है !

पुत्रेष्ठि यज्ञ से मनुष्य की प्रजनन प्रणाली शुद्धि होती है ! जिससे याज्ञिकों को सुसंतति प्राप्त होती है ! रज वीर्य में जो दोष होते हैं उनका शमन और निवारण होता है !

साधारण औषधियों का सेवन केवल शरीर के ऊपरी भागों तक ही प्रभाव डाल पाता है ! किन्तु यज्ञ का प्रभाव सूक्ष्म है ! यह स्त्री पुरुषों के श्वाँस तथा रोम कूपों द्वारा शरीर के सूक्ष्म तम भागों तक पहुँच कर रोग का शमन करती है ! जिससे गर्भाशय एवं वीर्य कोषों की शुद्धि से पुत्र संतति प्राप्त होती है !

जिन्हें संतति नहीं होतीं, गर्भपात हो जाते हैं, बार-बार कन्या ही होती है ! बालक अल्प जीवी होकर मर जाते हैं ! उन्हें सूक्ष्म यज्ञ पध्यति से चिकित्सा करनी चाहिये ! इससे संतान सुख तो प्राप्त होता ही है ! साथ ही पूर्व संचित प्रारब्ध का भी शमन होता है !!

पुत्रेष्ठि यज्ञ में गर्भवती स्त्रियों के पेट में बच्चा आने से लेकर जन्म होने तक चार बार यज्ञ संस्कारित करने का विधान होता है, ताकि उदरस्थ बालक के गुण, कर्म, स्वभाव स्वास्थ्य रंग रूप आदि उत्तम हो !

जिन्हें गर्भाधान, पुँसवन, सीमन्त और जातक चार संस्कार के रूप में जाना जाता हैं ! जिनके कारण बालक के व्यक्तित्व पर उसका प्रभाव पड़ता है !

जितनी शिक्षा व्यक्ति को जीवन भर नहीं दी जा सकती है ! उससे अधिक प्रभाव उसके गर्भ काल में दिये गये संस्कार से उसके व्यक्तित्व विकास पर पड़ते हैं ! इसी के आधार पर ऋषियों ने षोडश संस्कार पद्धति का आविष्कार किया था ! इसीलिये सन्तान उत्पादन के कार्य में पुत्रेष्ठि यज्ञ का अत्यन्त ही महत्वपूर्ण भूमिका है !!

पुत्रेष्ठि यज्ञ विधान पर चर्चा फिर कभी होगी !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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