क्या सत्ता को ब्लैक मेल करने के लिये हुई थी, श्रीराम जन्म भूमि पर “धर्म संसद” | Yogesh Mishra

ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में 3 दिन तक चली धर्म संसद में कहा गया था कि साधू संत प्रयागराज से सीधे अयोध्या जाएंगे और 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम होगा ! कुम्भ मेला में 28, 29 और 30 जनवरी को चले धर्म संसद के अंतिम दिन ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा पारित परम धर्मादेश में हिंदू समाज से बसंत पंचमी के बाद प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करने का आह्वान किया है ! उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या में एकत्रित हुए लोगों को गोलियों को सामना करना पड़ेगा तो भी कदम पीछे नहीं हटेंगे !

इसमें शामिल होने वाले चारों पीठों के शंकराचार्य के प्रतिनिधि, 543 संसदीय क्षेत्रों के एक-एक प्रतिनिधि, 13 अखाड़ों के संत, 170 विद्वान, 99 धर्म प्रतिनिधि, 108 धर्माचार्य और संस्‍था प्रतिनिधि और राजनीतिक दलों के 36 प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी के बैठने के लिए अलग-अलग व्‍यवस्‍था के साथ दर्शक दीर्घा भी बनाई गई थी ।

धर्मसंसद के समापन के बाद जारी धर्मादेश में कहा गया था, कि “सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण में हिंदुओं की मनोकामना की पूर्ति के लिए यजुर्वेद, कृष्ण यजुर्वेद तथा शतपथ ब्राह्मण में बताए गए इष्टिका न्यास विधि सम्मत कराने के लिए 21 फरवरी, 2019 का शुभ मुहूर्त निकाला गया है !”

धर्मादेश के मुताबिक, “इसके लिए यदि हमें गोली भी खानी पड़ी या जेल भी जाना पड़े तो उसके लिए हम तैयार हैं ! यदि हमारे इस कार्य में सत्ता के तीन अंगों में से किसी के द्वारा अवरोध डाला गया तो ऐसी स्थिति में संपूर्ण हिंदू जनता को यह धर्मादेश जारी करते हैं कि जब तक श्री रामजन्मभूमि विवाद का निर्णय नहीं हो जाता अथवा हमें राम जन्मभूमि प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक प्रत्येक हिंदू का यह कर्तव्य होगा कि चार इष्टिकाओं को अयोध्या ले जाकर वेदोक्त इष्टिका न्यास पूजन करें !”

धर्म संसद के आयोजक स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने कहना था, कि ‘अब तक धर्म संसद के नाम पर मजाक होता रहा है। इस संसद में धर्म से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी। इस राम मन्दिर अभियान का किसी भी जाति और राजनीति से इसका लेना-देना नहीं है !’

धर्मादेश में कहा गया था, कि “न्यायपालिका की शीघ्र निर्णय की अपेक्षा धूमिल होते देख हमने विधायिका से अपेक्षा की और 27 नवंबर, 2018 को परम धर्मादेश जारी करते हुए भारत सरकार एवं भारत की संसद से अनुरोध किया था कि वे संविधान के अनुच्छेद 133 एवं 137 में अनुच्छेद 226 (3) के अनुसार एक नई कंडिका को संविधान संशोधन के माध्यम से प्रविष्ट कर उच्चतम न्यायालय को चार सप्ताह में राम जन्मभूमि विवाद के निस्तारण के लिए बाध्य करे ! ”

लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बहुत लम्बी लम्बी बातें होने के बाद भी कहीं कुछ नहीं हुआ ! राजनीतिज्ञों की तरह हमारे धर्मगुरु भी बस सिर्फ भावनात्मक दोहन करते हैं या फिर सत्ता को धर्म भय दिखा कर उसका दोहन करना चाहते हैं ! यह भी हो सकता है कि हमारे धर्मगुरुओं वह जन आधार ही नहीं बचा है कि वह इस तरह का कोई धार्मिक आन्दोलन खड़ा कर सकें ! या हिन्दुओं को तोड़ने के लिये विदेशों से धन लेकर आयोजन तो आयोजित कर लेते हैं लेकिन उनकी मंशा पहले से ही कुछ भी न करने की बनी रहती है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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