महाभारत ग्रंथ का एक अनकहा पन्ना.श्री कृष्ण की आत्मग्लानि ! जरूर पढ़े !

 

मित्रों ऋषि वेदव्यास द्वारा लिखित महाभारत ग्रंथ के कुछ अध्याय ऐसे भी हैं ,जिन पर कभी भी अधिक चर्चा नहीं हो पाई,इनके अनुसार जब  महाभारत युद्ध का समापन हो गया था | युद्ध अतिविनाशकारी सिद्ध हुआ था, विजेता भी पराजित ही सिद्ध हुए थे क्योंकि उन्हे जो धरती मिली थी वह युद्ध अग्नि में झुलसी हुई थी | विजेता दम्भ से भरे थे और उन्मत्त आचरण वाले हो गये थे |

इस महायुद्ध को धर्मयुद्ध कहा गया किन्तु युद्ध के दौरान ही प्रश्न उठने लगे थे कि क्या वास्तव मे यह धर्मयुद्ध था | प्रश्नों के घेरे मे स्वयं कृष्ण थे और प्रश्न करने वाले उनके अपने ही लोग थे | स्वयं कृष्ण को भी अब लगता था कि जो उन्होने किया, वह धर्म नही था, वह विभीषिका थी | अब उनके अपने ही अधर्म कर रहे थे | महाभारत मे तो अर्जुन को उन्होने अपनों के विरुद्ध युद्ध करने को प्रेरित किया किन्तु अब कृष्ण स्वयं अपनों को रोक नही पा रहे थे | उन्हे सब निरर्थक लग रहा था और वे आशंका और अवसाद मे जी रहे थे | परिणिति बहुत त्रासद रही | सत्ता के मद मे चूर उनके कुटुम्ब ने अपनों का वध कर दिया था और बचों-खुचों का कृष्ण ने स्वयं वध कर दिया था, बलराम ने सागर मे जलसमाधि  ( आत्महत्या ) कर ली थी और जरा नामक व्याध के द्वारा पशु के धोखे मे स्वयं कृष्ण पशु की तरह मारे गये |

इस महायुद्ध में एक करोड़ चौदह लाख  लोगों की मृत्यु के बाद कोई भी घर ऐसा नहीं बचा था, जिसमें विकलांग या रोगी के अतिरिक्त कोई पुरुष बचा हो | परिणामत: कृषि प्रधान देश की वैभव संपन्नता कृषि के अभाव में नष्ट हो गई | महिलाएं अपने परिवार के पोषण के लिए पर पुरुष गमन करने लगी | परिणामत: समाज में बहुत बड़े पैमाने पर वर्णसंकर संताने पैदा होने के लगी | संस्कार के आभाव में ये वर्णसंकर संतान अपने सामाजिक दायित्व से विमुख हो गई और गृहस्थ जीवन नष्ट हो गया |

गृहस्थ जीवन के नष्ट हो जाने के कारण गृहस्थ जीवन पर आश्रित साधु समाज हिमालय की ओर पलायन कर गया | साधुओं के पलायन करने के परिणाम स्वरुप भारत में पूरी की पूरी गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था छिन्न भिन्न हो गई और अशिक्षित संस्कार विहीन वर्णसंकर संतान समाज के लिए बहुत बड़ी समस्या बन कर खड़ी हो गई | जिस राज्य में कभी अमन और शांति थी वहां आज अकाल, भुखमरी, भ्रष्टाचार, बलात्कार, अपराध, शराबखोरी और वेश्यावृत्ति ने जन्म ले लिया था ।

यही कलियुग का आरंभ था यहीं से खुलेआम स्वर्ण के लिए हत्याएं और मदिरापान के लिए अपराध शुरू हो गए इसीलिए कलयुग का निवास स्वर्ण और मदिरा में माना गया है और इस तरह महा धर्मयुद्ध से कलयुग की शुरुआत हुई |

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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