Diabetes (मधुमेह) का कारण वास्तु दोष भी हो सकता है । पढ़ें कैसे करें उपाय ।

भारत के महान चिकित्सक चरक ने मधुमेह के बारे में लगभग 2500 साल पहले चरक संहिता में लिख दिया था जबकि पश्चिमी चिकित्साशास्त्र जिसे आज हम बहुत उन्नत मानते हैं, को यह रोग लगभग 17वीं शताब्दी में पता लगा था कि इंसुलिन हारमोंस खून में शक्कर को नियंत्रित करता है

यह हारमोंस पेट के पीछे की और स्थित पैनक्रियाज में आइलेट आफ लैंगरहान्स नकोशिकाये होती है इनमे कुछ अल्फा और कुछ कोशिकाये होती है अल्फा कोशिकाओ में ग्लुकागन तथा बीटा में इंसुलिन हारमोंस बनते है यह यकृत में उपस्थित निर्माण पर नियंत्रण रखता है यह शरीर की कोशिकाओ में ग्लूकोज के आक्सीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाता हैं तथा अतिरिक्त ग्लूकोज को यकृत (LIVER) तथा मांस पेशियों में ग्लायिकोजिन के रूप में निक्षेपित करता है

यदि पैनक्रियाज में इंसुलिन कम मात्रा में लगे तो व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित हो जाता है, साथ ही खून शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाता है तो मधुमेह के रोगी को बार बार मूत्र त्यागने की प्रवृति होती है मूत्र के द्वारा काफी मात्रा में शुगर निकल जाता है |रोगी को अत्यधिक भूख ,प्यास लगना साथ ही शरीर में कमजोरी और शिथिलता आना इसके लक्षण हैं |

मधुमेह यानी डायबिटीज, यह एक ऐसी बीमारी है जो पैंक्रियाज पर आधारित है। यदि पैंक्रियाज सही कार्य कर रहा है तो मधुमेह की आशंका न्यूनतम रहती है। पैंक्रियाज जन्म पक्ष के पांचवें भाव को प्रदर्शित करता है इसीलिये मधुमेह निर्धारण के लिए पंचम भाव में बैठे ग्रह पंचमेश की स्थिति का अध्ययन आवश्यक है। इसके अलावा जन्मांग चक्र में इस रोग का प्रमुख कारक ग्रह शनि, मंगल, शुक्र एवं गुरु हैं | छठे भाव में इसकी दूषित स्थिति मधुमेह होने की आशंका को प्रबल बना देती है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला और वृश्चिक लग्न के जातक आसानी से इस रोग की पकड़ में आ जाते हैं।

निम्नलिखित वास्तुदोष भी डायबिटीज रोग का कारण हो सकते हैं |

– दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआँ,जल बोरिंग या भूमिगत पानी का स्थान मधुमेह बढाता है।

–दक्षिण-पश्चिम कोण में हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पोधे भी शुगर का कारण है।

–घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम कोना बड़ा हुआ है तब भी शुगर आक्रमण करेगी।

–यदि दक्षिण-पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड भी हुआ है तो समझो मधुमेह का द्वार खुल गया।

—दक्षिण-पश्चिम भाग घर या वन की ऊँचाई से सबसे नीचा है मधुमेह बढेगी. इसलिए यह भाग सबसे ऊँचा रखे।

——-दक्षिण-पश्चिम भाग में सीवर का गड्ढा होना भी शुगर को निमंत्रण देना है।

—ब्रह्म स्थान अर्थात घर का मध्य भाग भारी हो तथा घर के मध्य में अधिक लोहे का प्रयोग हो या ब्रह्म भाग से जीना सीडीयां ऊपर कि और जा रही हो तो समझ ले कि मधुमेह का घर में आगमन होने जा रहा हें अर्थात दक्षिण-पश्चिम भाग यदि आपने सुधार लिया तो काफी हद तक आप असाध्य रोगों से मुक्त हो जायेगे..

डायबिटीज के उपचार के लिए वास्तु के समाधान —

—अपने भूखंड और भवन के बीच के स्थान में कोई स्टोर, लोहे का जाल या बेकार का सामान नही होना चाहिए, अपने घर क़ी उत्तर-पूर्व दिशा में नीले फूल वाला पौधा लगाये..

—अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाए।

—अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखे।

—मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।

–दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाए।

–अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।

—प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।

—-वृहस्पति देव की हल्दी की एक गाँठ लेकर एक चम्मच शहद में सिलपत्थर में घिस कर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह से मुक्त हो सकते है।

—रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।

—ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा ले।

ज्योतिषीय उपाय :—-

ज्योतिषी के परामर्शनुसार रत्न धारण कर इस रोग पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है | रुद्राक्ष की माला पहनें | कष्टकारी ग्रहों के मंत्र का निश्चित संख्या में विधि अनुसार जप करें ।

सरपोरवा की जड़ सफेद रेशमी कपड़े में बांधकर दायीं भुजा में धारण करें। जनन मुद्रा में नियमित 30 मिनट आसान लगायें ।

डायबिटीज के लिये औषधीय हवन सामाग्री

डायबिटीज को समाप्त करने के लिए हल्दी, निर्मली बीज, कालमेघ, सप्तरंगी, गिलोय, खस, लाजवंती के बीज, पुनर्नवा, शिलाजीत, मीठी नीम, कुटज, मैथीदाना, आम की गुठली की मींगी, अतीस, दारूहल्दी, रसौत, हरड़, कैथे का गूदा, अजवाइन, कुटकी, विजया भांग, जामुन की गुठली, विजयसार, करेले का फल, गुड़मार, गूलर के फल, द्रोणपुष्पी, कुन्दरु इन 27 औषधियों को समान भाग में लेकर सुखाकर कूट पीस कर चूर्ण बनाकर रख लें तथा नियमित रूप से सामान्य 50 ग्राम हवन सामग्री में 25 ग्राम चूर्ण मिलाकर गूलर, पाकर, बरगद, पीपल, या आम की संविधा पर नियमित रूप से नित्य प्रातः 240 दिन हवन करने से डायबिटीज नियंत्रित हो जाती है |

भोजन व्यवस्था

मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन खाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से बार-बार भूख लगती है। ऐसी स्थिति में खीरा खाकर अपनी भूख मिटानी चाहिए। तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का सेवन अधिक करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम हो जाती है। अतः शलजम की सब्जी और विभिन्‍न रूपों में शलजम का सेवन करना चाहिए। उबले करेले का पानी मधुमेह को शीघ्र और स्थाई रूप से खत्‍म करने की क्षमता रखता है। प्रतिदिन प्रात:काल खाली पेट दो-तीन चम्‍मच मेथी के चूर्ण को पानी के साथ निगल लेना चाहिए।

जामुन खाएँ :

मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। यदि कहा जाए कि जामुन मधुमेह के रोगी का ही फल है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में अत्‍यंत लाभकारी हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन करना चाहिए।

जामुन की गुठली भी बहुत फायदेमंद होती है। इसके बीजों में जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार तीन ग्राम चूर्ण का पानी के साथ सेवन करने से मूत्र में शर्करा की मात्रा कम होती है।

 

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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