मांसाहारी थे विवेकानंद ,गांजा भी पीते थे इसी कारण से हुई थी मृत्यु ! : Yogesh Mishra

स्वामी विवेकानन्द का जन्म १२ जनवरी सन्‌ १८६3 को कलकत्ता में हुआ था। इनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे।यह 9 भाई बहन थे |

सन् 1884 : पिता जी की मृत्यु के बाद घर का भार नरेन्द्र पर आ पड़ा। घर की दशा बहुत खराब थी। अत्यन्त दर्रिद्रता तथा पैतृक संपत्ति के विवाद के कारण विवेकानंद ने घर त्याग करके स्वामी श्रीरामकृष्ण के मठ में शरण ली |

16 अगस्त, 1886 में स्वामी रामकृष्ण की मृत्यु होने के उपरांत छ: माह बाद जनवरी 1887 में स्वामी विवेकानंद ने वराह नगर मठ में संन्यास की औपचारिकता पूरी की और सन् से 1890-93 तक परिव्राजक के रूप में भारत-भ्रमण किया इसी बीच इनका परिचय खेतड़ी के नरेश महाराजा से हुआ महाराजा के सहयोग से शिकागो में होने वाली धर्म सभा में स्वामी विवेकानंद को जाने का अवसर प्राप्त हुआ |

विदेश यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद ने कही भी किसी भी वक्तव्य में स्वामी रामकृष्ण को अपना गुरु नहीं माना | स्वामी विवेकानंद बहुत ही तार्किक, नास्तिक, मूर्ति पूजा विरोधी थे।

बांग्ला लेखक शंकर ने अपनी किताब ‘द मॉन्क ऐज मैन’ में कहा है, “यशस्वी विद्वान विवेकानंद अत्यधिक मांसाहार सेवन (मछली खाने ) एवं गाँजा पीने के कारण दमा, अनिद्रा, माइग्रेन, डायबिटीज़ समेत दिल, किडनी और लिवर से जुड़ी पूरी 31 बीमारियों के कारण 39 साल की उम्र में 4 जुलाई, 1902 को बेलूर मठ में निधन हो गया।”

 

योगेश मिश्र
ज्योतिषाचार्य,संवैधानिक शोधकर्ता एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)
संपर्क – 9044414408

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