जानिए । ज्योतिष के अनुसार आपके लिए कौन सा व्यवसाय करना उचित रहेगा । Yogesh Mishra

आप कौन सा व्यवसाय करेंगे ?

यदि लग्न सप्तम और दशम भाव का कार्येश हो तब जातक को कारोबार के द्वारा धनार्जन होता है।

यदि षष्ठ और दशम का कार्येश हो तो नौकरी से धन, तृतीय भाव का कार्येश हो तो लेखन, छपाई, एजेन्सी, कमिशन, एजेन्ट, रिपोर्टर, सेल्समैन और संस्थाओ से धन प्राप्त होता है।

अगर द्वितीय और पंचम का कार्येश हो तो जमीन, घर, बगीचे, वाहन और शिक्षा सस्थानों से धन प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त नाटक, सिनेमा, ढोल, रेस, जुआ, मंत्र, तंत्र और पौरोहित्य कर्म से धन मिलता है।

यदि द्वितीय और सप्तम का कार्येश हो तो विवाह, विवाह मंडल, पार्टनरशीप और कानूनी सलाहकार के कार्य से धन मिलता है।

यदि द्वितीय और षष्ठ का कार्येश होता है तो साहूकारी, ब्याज, पालतू जानवरों, मुर्गी पालन, दवाएं, होटल, एम्प्लायमेंट ब्यूरों से धन प्राप्त होता है।

यदि धनेश का नक्षत्र स्वामी द्वितीय और अष्टम का कार्येश हो तो जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, पुश्तैनी जायदाद, बोनस, बोनस फण्ड, भविष्य निर्वाह निधि, ग्रेच्युटी इत्यादि से धनार्जन होता है।

यदि द्वितीय और नवम का कार्येश हो तो इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार, ग्रन्थ प्रकाशन, विदेश यात्रा, विदेशी लोगों से संबंध, धार्मिक संस्थाएं और मन्दिर से कमाई होती है।

यदि धन स्थान का नक्षत्र स्वामी द्वितीय और दशम भाव का कार्येश हो तो सरकार, सरकारी व्यक्तियों, नेतागिरी और राजनीति के कारोबार से खूब धनार्जन करता है।

यदि द्वितीय और भाव का कार्येश हो तो ऐसे व्यक्ति को धन की चिन्ता नहीं होती है। रुपए कमाने के लिए अधिक कष्ट नहीं झेलने पड़ते है। मित्रगण उसकी बहुत सहायता करते है, बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफा कमाता है, ऐसे जातक के जीवन में अचानक कई बार धन प्राप्त हो जाता है।

यदि द्वितीय और व्यय स्थान का कार्येश होता है तो हास्टल, जेल, अस्पताल और गूढ़ विद्या द्वारा धनार्जन का योग बनता है।

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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