हम विश्व सत्ता से क्यों हार रहे हैं : Yogesh Mishra

आज विश्व सत्ता के षड्यंत्र ने जो हर घर में हत्या का कोहराम मचा रखा है ! उसकी तैयारी विश्व सत्ता के नुमाइंदों ने पिछले 50 सालों से की थी ! जिसकी घोषणा वर्ष 1980 में अमेरिका के जॉर्जिया शहर में बनाई गई इमारत में कर दी गई थी ! यह योजना कुल 100 वर्ष की है ! जिस योजना में वह लोग विश्व में क्या-क्या करेंगे ! उनके लक्ष्य क्या है ! इसको उन्होंने स्पष्ट रूप से उस इमारत में पत्थर के ऊपर लिखकर हमें बतला दिया था !

लेकिन क्या हमने कभी उस पत्थर के ऊपर लिखी हुई इबारत को गंभीरता से पढ़ा ! नहीं क्योंकि हम यह मानते हैं कि जब कुछ बड़ा नुकसान होने लगेगा तब देखा जायेगा ! हमारी यह सोचा ही हमारे सर्वनाश का कारण है !

वह लोग हमारा भविष्य तय कर रहे हैं ! उसके लिए वह लोग हमारे विनाश की योजनाएं बना रहे हैं ! उन विनाश के योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं ! अरबों रुपए खर्च करके उन विनाश की योजनाओं को क्रियान्वित कर रहे हैं और अब उसके स्पष्ट परिणाम भी हमें दिखाई देने लगे हैं ! और हम सोच रहे हैं कि जब जो होगा देखा जायेगा ! या यही तो हमारा भाग्य है !

और हम अपने अतीत में मग्न हैं ! हमारे यहां चर्चा इस बात की नहीं है कि इस षडयंत्र से अपनी रक्षा कैसे करें ! बल्कि संघर्ष इस बात का चल रहा है कि आज से 10,000 साल पहले किस धर्म ग्रंथ के किस लाइन में क्या लिखा है !

वेदों की ऋचाओं में ऋषियों ने क्या क्या लिखा है ! रामायण में रावण ने क्या-क्या अत्याचार किये थे ! या महाभारत काल में कृष्ण को भगवान क्यों माना जाना चाहिये ! वह भी आधा अधूरा सुना सुनाया ज्ञान !

मेरा इतिहास को लेकर कोई विरोध नहीं है ! लेकिन पुराणों के रूप में हमारे पूर्वजों ने इतिहास लिखने की परंपरा क्यों डाली इसका अर्थ तो समझ लो ! इतिहास लिख कर हमे कायर बना देना या भाग्यवादी बना देना यह हमारे पूर्वजों का उद्देश्य कभी नहीं था !

क्योंकि इतिहास ही हमें आगाह करता है कि पूर्व में विनाशकारी शक्तियों ने हमारे पूर्वजों को किस तरह से धोखा दिया ! सभी धर्म ग्रंथ इसी का लेखा-जोखा हैं ! जिससे भविष्य में हम धोखा न खायें ! इसके लिए इतिहास हमें सतर्क रहने की प्रेरणा देता है !

लेकिन दुर्भाग्य है कि हम इतिहास का अध्ययन इस दृष्टिकोण से करते ही नहीं हैं कि हमें अपने भविष्य को कैसे सुरक्षित रखना है ! बल्कि सच्चाई तो यह है कि हमें इतिहास के संपूर्ण तत्वों की जानकारी ही नहीं है और उसी का परिणाम है कि हम अपने साथ वर्तमान में हो रहे षड्यंत्र को नहीं समझ पाते हैं और न ही अपने भविष्य की गणना कर पाते हैं !

क्योंकि हमारे अंदर सत्य सुनने का धैर्य भी नहीं है ! यदि कोई साथी ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर सत्य का विश्लेषण करता है ! तो हम अपने सुने सुनाये ज्ञान से उस सत्य के विश्लेषण को नकार देते हैं ! लेकिन स्वयं कभी किसी सत्य का विश्लेषण नहीं करते हैं !

आज विश्व सत्ता के लोग हमारे इसी अज्ञानता और निष्क्रियता को हथियार बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं ! वह जानते हैं कि हम अध्ययनशील नहीं हैं ! हम सुने सुनाये आधे अधूरे ज्ञान पर विश्वास रखते हैं ! हमें न अपने धर्म ग्रंथों का सही ज्ञान है और न ही इतिहास का ! इसीलिये वह आज हमें सूचना तंत्र के हमले से गुमराह करते हैं !

आज जो षड्यंत्र विश्व सत्ता का हमारे साथ घटित हो रहा है ! हम उस षडयंत्र का पर्दाफाश करने के स्थान पर अपने प्राचीन ग्रंथों में उन षडयंत्रों का विवरण ढूंढने में समय बर्बाद कर रहे हैं और बहुत खुश होते हैं कि भविष्य पुराण के इस श्लोक में इस षडयंत्र का संकेत पहले से ही दिया गया है !

क्या यदि भविष्य पुराण में वर्तमान की किसी घटना का वर्णन किया गया है तो क्या उस श्लोक के आगे उस षड्यंत्रकारी घटना से निकलने का रास्ता भी बतलाया गया है और यदि नहीं बतलाया गया है ! तो इसका मतलब हमारे पूर्वज क्या मूर्ख थे ! जिन्होंने षड्यंत्र का वर्णन तो कर दिया लेकिन उस षडयंत्र से निकलने का मार्ग नहीं बतलाया !

यह सारी चीजें विश्व सत्ता के नुमाइंदों द्वारा हमारे धर्म ग्रंथों को दूषित करके हमें भाग्यवादी बनाने का एक गहरा षड्यंत्र रचा गया है ! हम उनके हर षड्यंत्र को ईश्वर का लिखा विधान मानकर बर्दाश्त करते रहें और कभी भी उनके षडयंत्र पर चिंतन न करें और न ही उससे अपने को बचाने का प्रयास करें ! यही तो उनके षड्यंत्र की सफलता का रहस्य का रहस्य है !

हमें जागरूक ही नहीं उनके षड्यंत्र को असफल भी करना होगा अन्यथा हम अपने अस्तित्व को ही मिटा देंगे ! हमारे पूर्वजों ने बड़े-बड़े महायुद्ध लड़े और उस महायुद्ध में एक से एक जटिल षडयंत्रों को उन्होंने खत्म किया !

क्या आज हम उन्हीं के वंशज होकर मुट्ठी भर विश्व सत्ता के नुमाइंदे के षड्यंत्र में फंस कर अपने अस्तित्व को यूँ ही मिटा देंगे ! क्या यही हमारा वजूद है ! यदि आप ऐसा सोचते हैं तो धिक्कार है आपकी सोच को किंतु मैं ऐसा नहीं सोचता ! यही मेरे जीत का कारण होगा !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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