मनुष्य को नये जीवन दर्शन की आवश्यकता क्यों है : Yogesh Mishra

मानवता सतत विकासशील रही है ! इसी वजह से मनुष्य अन्य जीव-जंतुओं के मुकाबले क्रमशः आधुनिक और विकसित होता चला गया ! जब किसी प्रजाति में निरंतर विकास होगा, तो स्वाभाविक है कि उस प्रजाति की जीवनशैली भी निरंतर परिवर्तित होती रहेगी !

जीवन शैली के परिवर्तन के साथ ही मनुष्य के सोचने और कार्य करने का तरीका भी परिवर्तित होता रहेगा अर्थात कहने का तात्पर्य है कि मनुष्य अपनी आत्मरक्षा के लिए पुराने समय में जिन तरीकों को अपनाता था, आज वर्तमान समय में बदलती हुई परिस्थितियों में आक्रमण के तरीके बदल जाने के कारण मनुष्य को आत्मरक्षा के लिये अपने पुराने तरीकों को त्याग कर आधुनिक परिवेश में नये हमले के तरीकों के अनुरूप नई आत्मरक्षात्मक पद्यतियों को अपनाना होगा !

कभी मनुष्य जब तीर तलवार से लड़ता था ! तब उसे ढाल और कवच की आवश्यकता नहीं थी किंतु अब मनुष्य ने जैविक हथियारों को विकसित कर लिया है ! अतः उसकी रक्षा ढाल और कवच से नहीं हो सकती है बल्कि उसे जैविक हथियारों का मुकाबला करने के लिये अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना होगा ! जिससे इन जैविक हथियारों के आक्रमण से वह अपने को बच सके !

ठीक इसी तरह किसी समय में जब बम बारूद से हमले होते थे तो मनुष्य आत्मरक्षा के लिए भूमिगत बंकरों का निर्माण किया जाता था किंतु अब बम बारूद की जगह आधुनिक तकनीकी की मदद से वैचारिक हमले हो रहे हैं ! इस स्थिति में मनुष्य को आत्मरक्षा के लिए अब बंकर की नहीं बल्कि उसके स्थान पर अपने बौद्धिक स्तर को विकसित करने के लिये और वैश्विक षडयंत्रों को समझना होगा !

आश्चर्य की बात यह है कि मनुष्य को मनुष्य ही नष्ट करने में लगा हुआ है ! वह मात्र थोड़े से धन या प्रतिष्ठा के लिये ! जिसका मनुष्य के लिये तो महत्व हो सकता है पर मानवता के लिये कोई महत्व नहीं हैं !

अत: आज मनुष्य से मानवता की रक्षा करने के लिये निश्चित रूप से मनुष्य को अपनी संपूर्ण जीवन शैली बदलनी होगी ! आज मानवता की रक्षा न तो मंदिर में घंटा बजाने से होगी और न चर्च में प्रार्थना करने से !
अगर मानवता को मनुष्य से बचाना है तो हमें आज के बदलते हुए आक्रमण के स्वरूप के अनुसार अपने को शारीरिक और मानसिक रूप से विकसित करना होगा !

जिस हेतु सनातन ज्ञान पीठ निरंतर अपने कार्यक्रम चला रहा है ! वैश्विक षड्यंत्र को समझने के लिए और उनसे अपने आप को बचाने के लिए आप भी ऑनलाइन इन वेबनार को ज्वाइन कर सकते हैं !

और अधिक जानकारी के लिए कार्यालय में संपर्क कीजिए और मानवता के विकास तथा रक्षा में सहयोगी बनिये !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

 -: सम्पर्क :-
-090 444 14408
-094 530 92553

Check Also

धर्म के सभी प्रपंच धोखा हैं : Yogesh Mishra

ईश्वर ने कार्य कारण की व्यवस्था के तहत सृष्टि का निर्माण किया है ! जिसे …