मांसाहारी भोजन क्यों नहीं करना चाहिए : Yogesh Mishra

मांसाहारी भोजन क्यों नहीं करना चाहिए : Yogesh Mishra
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर शरीर के अंदर एक विशेष तरह का डी.एन.ए. अर्थात डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल होता है ! जो प्रत्येक व्यक्ति की अनुवांशिक विशेषज्ञता को बतलाता है ! इसी से हमारे चेतना के स्तर का भी निर्धारण होता है !

यह डी.एन.ए. ही हमारे चेतना के स्तर में परिवर्तन कर हमारे बौद्धिक विकास में सहायक होता है ! अर्थात कहने का तात्पर्य है कि हम इसी डी.एन.ए. की मदद से अपने आहार-विहार-विचार को विवेक के प्रयोग से शुद्ध करके अपने को और परिष्कृत अवस्था में ले जाते हैं !

या दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि शाकाहारी भोजन करके हम अपनी जीवनी शक्ति का उधर्व गमन करते हैं ! जिससे हमारी मेधा शक्ति में उत्तरोत्तर विकास होता है और हम सामान्य से विशिष्ट मनुष्य हो जाते हैं !

इसी तरह प्रत्येक पशु-पक्षी, जीव-जंतु में भी एक विशेष तरह का डी.एन.ए. होता है ! जब हम किसी पशु-पक्षी, जीव-जंतु को मार कर खाते हैं ! तब उसके शरीर का डी.एन.ए. भोजन के कारण हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है !
जो डी.एन.ए. हमारे शरीर के लिए बाहरी अपरिचित डी.एन.ए. होता है ! जिसे हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली पूरी तरह से उस बाहरी अपरिचित डी.एन.ए. के प्रभाव को नष्ट करने के लिए भारी आतंरिक संघर्ष करती है !

जिससे हमारी जीवनी शक्ति का ह्रास होता है और हमारी जीवनी शक्ति अधोगामी हो जाती है ! क्योंकि पशु की चेतना शक्ति मनुष्य के मुकाबले काफी नीचे स्तर की होती है !
अतः साधना आदि करने वाले व्यक्ति को अपनी जीवनी शक्ति का निरंतर उधर्व गमन करने के लिए यह आवश्यक है कि वह मांसाहारी भोजन न करे !
इसीलिए यदि हमें अपने कल्याण की इच्छा है तो हमें मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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