डॉ. आंबेडकर ब्राह्मणों की ही उपज थे ? : Yogesh Mishra

बाबा साहेब के अनुयायियों की ब्राह्मण विरोध की वृत्ति बाबासाहब के विचारों से अलग है और ब्राह्मणों का विरोध करने मात्र की है ! क्योंकि उनका कहना है कि बाबासाहब ने सदैव ‘ब्राह्मणवाद’ का विरोध किया ! जो कि गलत है अम्बेडकर ने ब्राह्मणों का विरोध अंग्रेजों की चाटुकारिता में अपने को नेता बनने के लिये किया करते था ! वरना इनकी पत्नी खुद ब्राह्मण थी और यह स्वयं ब्राह्मणों के ही मोहल्ले में रहा करते थे ! ब्राह्मण ही इनके राजनीतिक सलाहकार थे और वक्त जरूरत पर ब्राह्मण इनकी मदद भी किया करते थे ! ब्राह्मणों द्वारा उनका मार्गदर्शन, स्नेह उन्हें जीवन भर मिला और वह स्वयं भी ब्राह्मणों का बहुत सम्मान किया करते थे ! कुछ उदहारण नीचे दे रहा हूँ !

1. बाबासाहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 की प्रात: 4.00 बजे इंदौर नगर के निकट महू नामक छावनी (म.प्र.) में माता भीमाबाई व पिता श्री रामजीराव के घर पर हुआ ! उनका नाम माता के नाम से भीम, पिता के नाम से राव लेकर भीमराव रखा गया था ! उनका कुलनाम सकपाल था ! भीमराव के पितामह महाराष्ट्र प्रदेश के रत्नागिरी जिले के अंबावडे गांव के रहने वाले थे ! अत: उनके नाम के आगे ‘अंबेडकर’ जोड़ दिया गया !

2. एक छोटे आत्मचरित्रात्मक में बाबासाहब ने अपने संस्मरण बताया है कि उनके विद्यालय में अंबेडकर नाम के एक ब्राह्मण शिक्षक थे ! वह भीमराव को अपने साथ बैठाकर भोजन कराते थे ! उन शिक्षक महोदय ने इनका उपनाम बदलकर अंबेडकर किया और वही विद्यालय के रजिस्टर में भी लिखा जो आगे चलकर अंबेडकर नाम से विख्यात हुआ !

3. मुंबई के एलफिंस्टन हाईस्कूल में एक दिन बालक भीम को श्यामपट पर सवाल हल करने को कहा ! भीम सवाल हल करने आगे बढ़े, तो कुछ ल़ड़के चिल्लाने लगे कि भीम के श्यामपट को स्पर्श करने पर उनके खाने का डिब्बे स्पर्शदोष से दूषित हो जायेगे ! गणित के ब्राह्मण शिक्षक महोदय ने उन विद्यार्थियों से कहा कि भीम श्यामपट पर लिखेगे, आप चाहें तो अपने डिब्बे वहां से हटा लें और भीम ने सवाल हल किया !

4. महार जाति का पहला बालक मैट्रिक पास होने पर 1907 में भीमराव की उपलब्धि पर सारे समाज द्वारा अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया ! उस समारोह में श्रीकृष्णजी केलुस्कर ब्राह्मण वक्ता थे ! उन्होंने भीमराव के सम्मान में दो शब्द कहे और स्वयं का लिखा एक ‘बुद्व चरित’ नामक मराठी ग्रंथ भी उपहार स्वरूप उन्हें भेंट किया ! केलुस्कर द्वारा भेंट में दी गई यह पुस्तक भीमराव के जीवन का आधार बनी ! वास्तव में डॉ. आंबेडकर ने अपना बौद्व-धम्म सम्बधी अध्ययन इसी पुस्तक द्वारा आरम्भ किया था !

भीमराव ने एफ.ए. इन्टर पास कर लिया और भीम आगे शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे; किन्तु धन का अभाव था ! तो ब्राह्मण केलुस्कर जी भीम के पिता जी से स्वयं मिले तथा भीमराव को लेकर चन्द्रावरकर जी के साथ बडौदा नरेश महाराज सयाजी गायकवाड से मिले और इसी कारण उच्च शिक्षा के लिए बडौदा महाराज से आर्थिक सहायता रु.25/- मासिक छात्रवृति मिलना संभव हो सका ! जिससे वह बैरिस्टर बन सके ! ब्राह्मण केलुस्कर जी आंबेडकर के प्रति बिना किसी भेदभाव के, मानव प्रेमी व काफी उदार थे !

5. हिन्दू कोड बिल मार्गदर्शक का काम करते समय बाबासाहब का साथ देने वाला कोई भी नहीं था ! ऐसे समय दो ब्राह्मण हृदयनाथ कुंजरू, न.वि. गाडगील ने ही उस बिल के समर्थन में लोकसभा में जोरदार भाषण दिये थे !

6. कोलाबा जिले के महाड नामक ग्राम में एक ‘चवदार’ नामक तालाब है ! उस तालाब का पानी ब्राह्मण अछूतों को पीने नहीं देते थे ! भीमराव ने पानी पीने के लिए आंदोलन चलाया ! ब्राह्मणेतर नेताओें ने इस शर्त पर बाबासाहब के आंदोलन को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया कि किसी भी ब्राह्मण को, उन ब्राह्मणों को भी जो अस्पृश्यों के ध्येय के विषय में सहानुभूति रखते हैं, आंदोलन में सहभागी नहीं बनाया जाएगा ! भीमराव ने दो टूक शब्दों में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और घोषणा की कि, ‘‘यह दृष्टिकोण प्रमादपूर्ण है कि सारे ब्राह्मण अस्पृश्यों के शत्रु नहीं हैं ! ब्राह्मणों का हम स्वागत करते हैं !’’

7. पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी द्वारा स्थापित सिद्वार्थ महाविद्यालय का पहला प्राचार्य बनने का निवेदन बाबासाहब ने प्र.बा. गजेन्द्रगडकर के बड़े भाई अश्‍वत्थाचार्य बालाचार्य गजेन्द्रगडकर से किया ! उन्होंने मुंबई के एलफिंस्टन महाविद्यालय से समयपूर्व सेवा निवृत्ति लेकर बाबासाहब के निवेदन को स्वीकार किया ! गजेन्द्रगडकर जी भी महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मण ही थे !

8. और अंत में, बाबासाहब का डॉ. शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण) से 15 अपैल 1948 को उनके दिल्ली के निवास पर सिविल मैरिज एक्ट के अनुसार अत्यंत सादगी व सामान्य पद्धति से विवाह हुआ ! विवाह के पश्‍चात डॉ. शारदा कबीर डॉ. सविता आंबेडकर (माई) हो गईं ! वह भी ब्राह्मण ही थी ! इस पर बाबासाहब ने कहा, ‘‘पुरानी हिन्दू धारणा के अनुसार स्त्री व पुरूष दो स्वतंत्र अस्तित्व नहीं रहते, वह एक ही अस्तित्व में विसर्जित हो जाते हैं ! मेरा यह विवाह एक आदर्श है !’

9. आंबेडकर को संविधान सभा में बंगाल से चुना गया था ! लेकिन 1947 मे भारत विभाजन के बाद आंबेडकर का चुनाव क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान चला गया था ! तब आंबेडकर का संविधान सभा में पहुंचना मुश्किल हो गया था ! तब बड़े दिल वाले उदार ब्राह्मण महापुरुष पी. जयकर ने पुणे की अपनी सीट आंबेडकर के लिये खाली कर दी ! ताकि आंबेडकर संविधान सभा पहुँच सकें !

10. इसके अलावा भीमराव अंबेडकर जीवन भर ब्राह्मणों के ही मोहल्ले में रहे हैं और उनके राजनैतिक सलाहकार के रूप में ब्राह्मण ही उनके प्रिय सलाहकार रहे हैं उन्होंने अपनी राजनीति चमकाने के लिए और अंग्रेजों से निकटता बढ़ाने के लिए अंग्रेजों के ब्राह्मण विरोधी एजेंडे के तहत ब्राह्मणों का विरोध किया जबकि वह स्वयं वास्तव में ब्राह्मणों का बड़ा सम्मान करते थे और उनका कभी भी किसी भी ब्राह्मण के साथ कोई विवाद नहीं हुआ इतिहास इसका साक्षी है !

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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