# Sanatan Gyan Peeth ## Posts - [प्रकृति सभी समस्याओं का समाधान है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/nature-is-the-solution-to-all-problems/): यदि प्रकृति को परिभाषित करना हो तो एक लाइन में कहा जा सकता है कि पंचतत्व का प्रगट स्वरूप ही प्रकृति है ! अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये कि प्रकृति में जो भी प्रगट स्वरूप इंद्रियों से अनुभूत हो रहा है ! वह सब पंच तत्वों से ही निर्मित है ! लेकिन इन पंच तत्वों से निर्मित प्रकृति में समानता नहीं है ! अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह मनुष्य जैसे दिखने वाले सभी व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होते हैं ! ठीक उसी तरह एक जैसे दिखने वाले पशु-पक्षी, जीव-जंतु, वनस्पति आदि सब कुछ एक-दूसरे […] - [क्या यह संघ का ब्राह्मणत्व पर हमला है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-this-sanghs-attack-on-brahminism/): श्री एस. एस. उपाध्याय, पूर्व न्यायाधीश एवं पूर्व विधिक परामर्शदाता, मा० राज्यपाल, उत्तर प्रदेश, लखनऊ ने अपना मत प्रगट किया है कि ब्राह्मणों का एक वर्ग 21वीं शताब्दी में भी यह मानने को तैयार नहीं है कि भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था ने तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उनकी जातीय सर्वोच्चता समाप्त कर दी है और उन्हें पूर्वकालीन भारतीय शूद्रों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है ! लेकिन आज ब्राह्मण यह भी मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके अनेकों प्राचीन एवं मध्यकालीन ग्रन्थों में कतिपय ऐसे संदर्भ, द्रृटान्त और कथानक विद्यमान हैं, जो वर्तमान लोकतांत्रिक और संवैधानिक […] - [सामाजिक हिंसा का जिम्मेदार कौन : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/who-is-responsible-for-social-violence/): वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को वासना का एक साधन ही समझता है । वह उसे पुज्या नहीं भोग्या ही समझता है । वह हर पल वासना की दृष्टि से उसे देखता है । वह उसे प्रेम की नजर से नहीं देख पाता है । जबकि स्त्री सदैव प्रेम से भरी रहती है । वह सदैव पूर्ण रहती है । इसीलिये वह एक पूर्ण संतान को जन्म दे पाती है ! स्त्री की निरंतर एक ही खोज चलती रहती है । वह सुन्दर पुरुष को खोज नहीं करती है । वह एक प्रेम करने वाले और उसे समझने वाले […] - [मूर्ति, प्रतिमा और विग्रह में अंतर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/idol-statue-and-deity/): प्राय: लोग मूर्ति, प्रतिमा और विग्रह को एक ही समझते हैं ! लेकिन ऐसा नहीं है, इन तीनों में बहुत अंतर है ! “प्रतिमा” यह एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब है, किसी देवता या महापुरुष की छवि के अनुरूप यथार्त तुल्य निर्माण करना ! इसमें किसी कल्पना का कोई स्थान नहीं है ! जबकि “मूर्ति” भी एक संस्कृत शब्द है, लेकिन इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति के प्रतिबिम्ब को कल्पना के आधार पर साकार रूप में अभिव्यक्त करना ! यह पूरी तरह से श्रुति या स्मृति की सूचनाओं पर आश्रित कल्पना पर निर्मित होती है ! “विग्रह” […] - [बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र जी महाराज की भविष्यवाणी : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/prediction-of-bageshwar-dham-peethadhishwar-shri-dhirendra-ji-maharaj/): यह भारत का इतिहास रहा है कि जब भी कोई सनातन धर्म की रक्षा के लिए कोई भी प्रभावशाली कदम उठाता है उसे वैश्विक षड्यंत्रकारी किसी न किसी महान संकट में जरूर डाल देते हैं ! फिर वह चाहे आसाराम बापू हों या फिर राम रहीम जैसे प्रभावशाली संत ! इसी विश्लेषण को आधार मानते हुए मैंने आज दिनांक 24 जनवरी 2023 को प्रातः 9:00 लखनऊ में एक प्रश्न कुंडली के आधार पर बागेश्वर धाम सरकार, जिला – छतरपुर, मध्य प्रदेश के मुख्य सेवा कार एवं पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र जी महाराज के विषय में प्रश्न कुंडली के माध्यम से भविष्य […] - [सुपरबग क*रोना से भी ज्यादा खतरनाक होगा : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/superbug-will-be-more-dangerous-than-crying/): आधुनिक चिकित्सा जगत की सबसे महत्वपूर्ण और शोध परक पत्रिका “लांसेट” ने अपने शोध के द्वारा विश्व को यह अवगत कराया है कि वर्ष 2023 में एलोपैथिक दवाई की दुनिया में एक बहुत बड़ा भूकंप आने वाला है ! जिसे सुपरबग नाम दिया गया है ! इस पत्रिका के शोधकर्ता वैज्ञानिकों एवं डॉक्टरों का यह मत है कि सुपरबग का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा ! जिसमें पूरी दुनिया में ऐसे लोगों का विस्तार होगा ! जिन पर कोई भी एंटीबायोटिक दवा काम नहीं करेगी ! और एक अनुमान के मुताबिक मात्र वर्ष 2023 में पूरी दुनिया में इस सुपरबग […] - [शिव भक्ति सरल, सहज, सस्ती, प्रकृति अनुकूल और अनुकरणीय क्यों है ? : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/why-shiva-devotion-is-simple-easy-cheap-nature-friendly-and-exemplary/): शैव साहित्यों की शृंखला ही बहुत विस्‍तृत है ! वैरोचन के ‘लक्षणसार समुच्‍चय’ में इन आगमों के विशाल वांगमय का विस्‍तार से वर्णन है ! शिव के शास्‍त्र के रूप में ‘शिवधर्म’ और ‘शिवधर्मोत्‍तर’ ग्रंथों को शैव साधकों द्वारा रचा गया ! ‘शिवधर्म’ में ब्राह्मीलिपि का जिक्र है जबकि ‘शिवधर्मोत्‍तर’ ग्रन्थ में नंदिनागरी लिपि का वर्णन है ! इसी कारण से लगता है कि ‘शिवधर्म’ ग्रंथ अधिक प्राचीन है जबकि ‘शिवधर्मोत्‍तर’ ग्रन्थ बाद में लिखा गया मालूम पड़ता है ! इनका मूल शैव भाषा से अनुवाद तथा विस्तार गुप्त काल तथा चालुक्‍य काल में हुआ प्रतीत होता है ! जिनसे […] - [स्वतंत्र विचारकों को आतंकवादी घोषित करने की तैयारी : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/preparation-to-declare-free-thinkers-as-terrorists/): 2019 के बाद जिस तरह वैक्सीन का विरोध कुछ डॉक्टर और चिंतकों द्वारा किया गया ! उसको लेकर 7 फरवरी 2022 में अमेरिका की संसद के अंदर एक बिल लाया गया ! जिसमें उपलब्ध तथ्यों का गहराई से अध्ययन करने पर यह पता चला कि वैश्विक षड्यंत्रकारियों ने एक कार्य योजना बनाकर उसे मान्यता दे दी है ! जिसके तहत डब्ल्यू.एच.ओ. या यू.एन.ओ. के मानकों के विपरीत जाकर यदि कोई व्यक्ति कोई भी विचार समाज में रखेगा तो उससे मानवता के विरुद्ध आतंकवादी घोषित कर दिया जाएगा ! इसी नियम के तहत आप लोग देखते होंगे कि आये दिन आपकी […] - [किसकी कृपा से बना था बेलूर मठ : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/by-whose-grace-belur-math-was-built/): बेलूर मठ भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के पश्चिमी तट पर बेलूर में स्थित है ! यह रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ का मुख्यालय है ! इस मठ के भवनों की वास्तु में हिन्दू, इसाई तथा इस्लामी तत्वों का सम्मिश्रण है, जिसे धार्मिक एकता का प्रतीक बतलाया जाता है ! इसकी स्थापना रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के बाद 1 मई 1897 को में स्वामी विवेकानन्द द्वारा की गयी थी ! इस 40 एकर की भूमि पर अवस्थित इस मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी, स्वामी विवेकानंद और स्वामी ब्रह्मानन्द की देहाग्निस्थल पर उनकी समाधियाँ […] - [क्या राम और कृष्ण इतने हल्के हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/are-ram-and-krishna-so-light/): अभी बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर जी ने राजनीतिक कारणों से रामचरितमानस पर कुछ टिप्पणी कर दी और उसका परिणाम यह हुआ कि पूरे भारत का वैष्णव समाज शिक्षा मंत्री के टिप्पणी का विरोध करने लगा ! अब प्रश्न या खड़ा होता है कि क्या रामचरितमानस या भगवान श्रीराम का चरित्र इतना हल्का है कि एक राजनीतिक व्यक्ति के टिप्पणी के कारण उनका व्यक्तित्व ढह जाएगा ! और यदि नहीं तो उस पर इतना हो हल्ला मचाने की जरूरत क्या है ? शिक्षा मंत्री का तो उद्देश्य ही था कि वह टिप्पणी करें और वैष्णव चीखना चिल्लाना शुरू कर दें […] - [मर्डर ऑफ गॉड : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/murder-of-god/): भारतीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया जो कि एक प्रबल दार्शनिक ही नहीं, अच्छे चिंतक और विचारक भी हैं ! इन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हिंदू समाज के विनाश का कारण हिंदुओं के अवतारवाद की अवधारणा है ! ऐसा ही निष्कर्ष आज से लगभग 100 साल पहले जर्मन के एक विचारक दार्शनिक और अध्यापक डॉ. नीत्से ने भी निकाला था ! जब प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मन के 16 टुकड़े हो गये थे ! तब डॉ. नीत्से ने जर्मन विश्वविद्यालय के छात्रों को आंदोलन करके जर्मन सरकार पर यह दबाव डालने के लिए बाध्य करने को कहा कि जर्मन […] - [प्रजनन से मनुष्य को मुक्ति : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/liberation-of-man-from-reproduction/): एक्टोलाइफ प्रजनन कम्पनी कृतिम पध्यति से प्रति वर्ष 30,000 मन चाहे बच्चे पैदा कर सकती है ! इस समय कंपनी के पास 75 लैब हैं जिन्हें जल्द ही 200 से अधिक बना लिया जायेगा ! इस पूरे कॉन्सेप्ट की शुरुआत करने वाले वैज्ञानिक “हासिम अल गायली” ने फेसबुक पर एक वीडियो जारी किया है ! इसमें दिखाया गया है कि कैसे आर्टिफिशियल गर्भाशय के जरिए बच्चों को जन्म दिया जाएगा ! हासिम अल गायली पेशे से एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट और साइंस कम्यूनिकेटर हैं ! उनकी इस बात का समर्थन खुद टेस्ला और ट्विटर के CEO एलन मस्क ने किया है ! […] - [नॉलेज और विजडम में अंतर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/difference-between-knowledge-and-wisdom/): नॉलेज का सामान्य अर्थ सूचना की जानकारी होना है और विजडम का तात्पर्य सूचना के संदर्भ में विवेक पूर्ण अनुभूति होना है ! नॉलेज सामान्य सूचना प्राप्ति और मस्तिष्क का विषय है ! जबकि विजडम आंख, नाक, कान, मस्तिष्क, के अतिरिक्त अनुभूति और विवेक पूर्ण चिंतन का भी विषय है ! अर्थात दूसरे शब्दों में विजडम का तात्पर्य सही और गलत सूचना के मध्य अंतर कर पाने की क्षमता विकसित करना है, जो विवेकपूर्ण, चिंतन, बुद्धिमानी से विकसित होती है ! यह विद्या अर्थात सूचना प्राप्त करने से एकदम अलग विषय है ! विद्या के अंतर्गत हम बस सिर्फ सूचनाओं […] - [भारत के सर्वनाश की नई दास्तान : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/new-story-of-indias-apocalypse/): समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जिनका काम ही दूसरों की आलोचना करना होता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए कि चाहे कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो, उद्योगपति हो, धार्मिक व्यक्ति हो, या अपने जीवन निर्वाह के लिए कड़ी मेहनत करने वाला मजदूर हो, यह वर्ग सदैव हर व्यक्ति की आलोचना करता रहता है ! ऐसे लोगों को छिद्रान्वेषण स्वभाव का व्यक्ति कहा जाता है ! नया-नया हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध बने हिंदुओं में आज हिंदू मंदिरों की दान पेटिका को देखकर उन्हें क्रोध और बुखार दोनों चढ़ता है ! लेकिन जब वह मंदिरों को कोई दान नहीं […] - [रामचरितमानस का हिन्दुओं के लिये महत्व : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/importance-of-ramcharitmanas-for-hindus/): रामचरितमानस का निर्माण भारतीय सनातन संस्कृति के विकट संघर्ष काल में हुआ है ! उस समय लंबे समय तक भारत में मुगलों का शासन था ! जिन्होंने छल और बल दोनों तरीके से भारतीय संस्कृति को नष्ट करके अपनी इस्लामिक संस्कृति का विस्तार करने के लिये अनेक षड्यंत्र रचे थे ! उसका यह परिणाम हुआ था कि लोग अपनी सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लामिक राजाओं के प्रभाव में इस्लामिक संस्कृति को स्वीकार करने लगे थे ! जिससे समाज में हिन्दू रीति रिवाज और हिंदू चाल चलन का प्रभाव तेजी से ख़त्म रहा था ! हिंदुओं के होते […] - [क्या हनुमान जी की गदा काल्पनिक है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-the-mace-of-hanuman-ji-imaginary/): हनुमान ने अपने पराक्रम से एक लाख किंकर, अकंपान, जंबुमाली, अक्षय, देवांतक, तृषिरा, ध्रुमराक्स, कालनेमि, अहिरावण, महिरावण, सिम्हिका का वध और रावण, इंद्रजीत, लंकिनी को परास्त करने के साथ साथ कुंभकरण को घायल कर दिया था ! पर उन्होंने बाल्मीकि रामायण के अनुसार कहीं भी गदा का प्रयोग नहीं किया था ! हनुमान ने लौहे की छड़, वृक्ष और पर्वत के अलावा और किसी अस्त्र का प्रयोग नहीं किया था क्योंकि उनमें ताकत अनंत है ! हनुमान ने रथ या गदा का इस्तेमाल कभी रामायण में किया नहीं क्योंकि उनकी शरीरिक ताकत ही काफी है ! जिससे किसी को भी […] - [मानवीय संस्कृति का आधार कैलाश पर्वत है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/mount-kailash-is-the-basis-of-human-culture/): मानवता के इतिहास की शुरुआत बन्दर से नहीं बल्कि कैलाश पर्वत से होती है ! जो कि शैवों का पवित्र स्थल है ! कैलाश पर्वत का ग्लेशियर ही एशिया में अनादि काल से सभी महत्वपूर्ण नदियों का स्रोत रहा है ! इसी के किनारे मानवता की कई अनेक सभ्यताएँ फली-फूलीं ! 17,000 ईसा पूर्व से पहले सिंधु घाटी सभ्यता भी इसी के जल स्रोत से निकली सिंधु नदी के तट पर पनपी थी ! 12,000 ईसा पूर्व भी हड़प्पा की सभ्यता भी यही पनपी थी ! वहीं पूर्व में भारत की सबसे लम्बी ब्रह्मपुत्र नदी का स्रोत भी इसी कैलाश […] - [दुनिया के सारे दर्शन वेदों से ही क्यों निकले हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/why-all-the-philosophies-of-the-world-have-emerged-from-the-vedas-only/): न्याय दर्शन कहते हैं कि वेदों की रचना ईश्वर ने की है ! क्योंकि यह मानवीय नहीं हो सकते हैं ! सांख्य दर्शन कहा कि वेदों की रचना ईश्वर ने भी नहीं की है ! वेद प्राकृतिक हैं ! प्रकृति का मतलब जिसकी रचना किसी ने नहीं की है ! जो नित्य है, वही प्राकृतिक है ! हाँ, यह हो सकता है कि वेदों के ज्ञान को कुछ लोगों ने संगृहीत कर लिया हो, लेकिन वेदों की रचना ईश्वर भी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि सांख्य दर्शन ईश्वर को नहीं मानता है ! क्योंकि वह ईश्वर को मानता नहीं है, […] - [स्वयं से संवाद की कला : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/art-of-self-communication/): स्वयं से संवाद सनातन जीवन शैली का मूल आधार है ! जो व्यक्ति स्वयं से संवाद करना नहीं जानता वह कभी भी न तो संसार में सफल हो सकता है और न ही मृत्यु के उपरांत मुक्ति को प्राप्त कर सकता है ! क्योंकि “स्व”यं 2 शब्दों से मिलकर बना है ! “स्व” और “अहं” अर्थात अपने “स्वयं का “अहं” ! हम लोग जीवन भर दूसरे के “अहं” को खोजते रहते हैं और उसकी समीक्षा में समय नष्ट करते रहते हैं ! इसीलिए हमारा कभी भी ध्यान अपने “स्व” के “अहं” की ओर नहीं जाता है ! जब की आवश्यकता […] - [जीने की चाहत में मौत : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/death-in-the-desire-to-live/): शरीर के दो हिस्से है एक दिल और दूसरा दिमाग ! इन्हीं दोनों के सामंजस्य से शरीर चलता है ! यदि इनका सामंजस्य बिगाड़ जाये तो पहले तो शरीर बीमार पड़ता है, फिर नष्ट हो जाता है ! अर्थात मनुष्य की मृत्यु हो जाती है ! अमेरिका से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका “नेचर” ने 3 लाख व्यक्तियों पर शोध करके यह निष्कर्ष निकाला है कि जिन व्यक्तियों को कोरोना वैक्सीन दी जा रही है, उनको अंदर एक नई तरह की बीमारी दिखाई दे रही है ! इस बीमारी में यदि कोई व्यक्ति 10 मिनट से ज्यादा खड़ा होता है […] - [गुरु कृपा आवश्यक क्यों है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/why-gurus-grace-is-necessary/): गुरु में एक ऐसा आध्यात्मिक चुम्बकीय बल होता है कि गुरु के प्रति सम्पूर्ण समर्पण मात्र से ही व्यक्ति की रक्षा स्वत: होने लगती है ! इसलिए गुरु निवास स्थल को आश्रय की सकारात्मक ऊर्जा के कारण आश्रम कहा जाता है ! जहाँ की सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा से व्यक्ति स्वत: सुरक्षित हो जाता है ! इसलिये वर्ष में कम से कम एक बार गुरु आश्रय स्थल पर अवश्य जाना चाहिये क्योंकि संसार में गुरु की आध्यात्मिक ऊर्जा ही आपकी रक्षक है, जो आप व आपके परिवार की रक्षा कर सकती है ! और कभी भी गुरु के यहाँ खाली हाथ […] - [ग्रह हमारे साथ कैसे काम करते हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-planets-work-with-us/): एक वैज्ञानिक विश्लेषण आम ज्योतिषियों की अवधारणा है कि व्यक्ति के जन्म के समय ग्रह, पृथ्वी के किस दिशा से पृथ्वी पर अपना प्रकाश कैसा प्रकाश डालते हैं ! उसी के आधार पर व्यक्ति के जीवन की घटनायें घटती हैं ! इसी के आधार पर जन्मकुंडली का निर्माण किया जाता है ! जबकि मैंने अपने शोध में यह पाया है कि जन्म के समय ग्रहों के पृथ्वी पर प्रकाश डालने का व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं से कोई संबंध नहीं है ! बल्कि होता यह है कि इस ब्रह्मांड में हर गतिशील पिण्ड अपने आकार, प्रकार, दूरी, गति […] - [देश के बंटवारे पर एक शोध पत्र : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/a-research-paper-on-the-partition-of-the-country/): यह प्रश्न हमेशा से मुझे कचोटता था कि आखिर देश के बंटवारे के समय कश्मीर से खींची गई रेखा ने जब कश्मीर, पंजाब, राजस्थान को दो हिस्से में बांट दिया तो गुजरात के ऊपर थारपारकर जिला, सिंध, पाकिस्तान से यह रेखा अचानक पश्चिम की ओर क्यों मोड़ दी गई और गुजरात को काटकर पाकिस्तान में क्यों नहीं दिया गया ! इस पर मैंने बहुत गहराई से शोध किया, तो कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि जिनको मैं इस लेख के माध्यम से आपके समक्ष रखना चाहता हूं ! इसमें पहला तथ्य तो यह है कि भारत के बंटवारे के […] - [स्त्रियां कभी युद्ध का कारण नहीं रहीं हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/women-have-never-been-the-cause-of-war/): वैष्णव संस्कृति के पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों को सदैव से युद्ध का कारण बतलाया गया है ! फिर चाहे वह राम रावण का युद्ध हो या महाभारत का ! दोनों की वजह अहंकारी पुरुष ने माता सीता और द्रोपती को बतलाया है ! जबकि सत्य यह है कि इतिहास में कोई भी युद्ध कभी भी किसी स्त्री के कारण ही हुए, बल्कि हर युद्ध पुरुष की वासना, षड्यंत्र और साम्राज्यवादी अहंकार के कारण हुए हैं ! उदाहरण के लिए जब विश्वामित्र रावण की नानी ताड़का की हत्या के लिए राम को दशरथ से मांग कर अपने साथ ले गए […] - [स्त्रियाँ जल का प्रतीक क्यों हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/why-women-are-the-symbol-of-water/): भगवान शिव की बहन मां सरस्वती जो कि ब्रह्म संस्कृति की जननी और पालनकर्ता थी ! जिनके प्रतीक रूप में अफगानिस्तान में प्राचीन काल में सरस्वती नदी बहा करती थी अर्थात सरस्वती जल के समान निर्मल थी ! जो विद्या, बुद्धि, संगीत, कला, वाणी, मातृत्व, आध्यात्मिकता, विद्या, ज्ञान, ग्रंथ, मन्त्र, तंत्र, ज्ञान, और नदियों की अधिष्ठात्री देवी हैं ! यह दक्षिण मार्ग, वैदिक मार्ग और तंत्र (वाम) मार्ग की देवी हैं ! इसी तरह देवी लक्ष्मी जोकि महाराज सागर की पुत्री थी ! जिनका विवाह विष्णु के साथ हुआ था ! महाराज सागर दक्षिण भारत समुद्र के देवता थे अर्थात […] - [क्या फिलॉसफी और दर्शन अलग अलग हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/are-philosophy-and-philosophy-different/): क्या फिलोसोफी दर्शन का अनुवाद है ! ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग हैं ! दुनिया में कोई भी दो शब्द पूरी तरह से एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हो सकते हैं ! दर्शन शब्द भारतीय परंपरा ने गढ़ा है और दर्शन का जो मूल शब्द है वह “दृश्” धातु से बना है ! अर्थात देखने की क्रिया या देखना ! सामान्यतया देखने का कार्य आँखों करती हैं ! जिसके लिए संस्कृत में एक शब्द चलता है “चक्षु” ! लेकिन जब हम किसी विषय को देखे हुए उससे अपने को जोड़ कर अनुभूत करने लगते हैं और इस देखने के […] - [मात्र विद्या से विनय नहीं बल्कि अहंकार आता है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/mere-learning-does-not-bring-modesty-but-arrogance/): एक सूक्ति है “विद्या ददाति विनयम” अर्थात “विद्या से विनय की प्राप्ति होती है ! लेकिन यह सूक्ति गलत है ! विद्या से विनय की प्राप्ति नहीं होती है विद्या से अहंकार की प्राप्ति होती है ! जब व्यक्ति विद्या अर्थात सूचनाओं को संग्रहित कर लेता है, तो सदैव अपने से कम सूचना रखने वाले व्यक्ति को नाकारा और अयोग्य मान लेता है ! इसके विपरीत जब व्यक्ति विद्या अर्थात प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करने का सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है, तब उसका अहंकार लुप्त हो जाता है क्योंकि उसे पता चलता है कि हर तरह की विद्या अधूरी है […] - [कृत्रिम कथावाचक के पाप : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/sins-of-the-artificial-narrator-2/): भक्ति काल के दौर में व्यक्ति स्वप्रेरणा से ईश्वर की भक्ति करता था ! इसके लिए सबसे पहले वह अपने आराध्य को समझने की चेष्टा करता था ! जिसके लिए या तो वह शास्त्रों का अध्ययन करता था या फिर किसी योगी गुरु के सानिध्य में रहकर अपने आराध्य के विषय में अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठा करता था ! फिर उस जानकारियों के आधार पर वह अपना मन मस्तिष्क आराधना के लिए तैयार करता था और फिर अनंत काल तक अपना संपूर्ण जीवन उस आराध्य की आराधना में लगा देता था ! किंतु अब दौर बदल रहा है, अब […] - [क्या अब भगवान की मनुष्य को आवश्यकता नहीं है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-god-no-longer-needed-by-man/): विश्व के कई देशों ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि अब मनुष्य को भगवान की जरूरत नहीं रह गई है ! क्योंकि जिन देशों ने भगवान को नकार दिया है ! वह सभी देश आज पहले से अधिक सुखी और संपन्न हैं ! वास्तव में भगवान की जरूरत मनुष्य को कभी थी ही नहीं ! भगवान की उत्पत्ति तो मनुष्य ने अपने अज्ञानता के कारण उत्पन्न अज्ञात भय से निपटने के लिये की थी ! और धर्म की दुकान चलाने वाले कथा वाचकों ने फिर इस भय से उत्पन्न भगवान के हजारों स्वरूपों का निर्माण कर दिया ! […] - [भारत के सर्वनाश का कारण और निवारण : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/reason-and-prevention-of-indias-destruction/): जब किसी भी समाज में धन और सुविधाएं मनुष्य के ज्ञान और विवेक से अधिक हो जाती हैं, तो वह समाज विकृति की ओर बढ़ने लगता है ! भारतीय समाज ने भी यह दौर देखा है ! चोल वंश के शासनकाल से लेकर गुप्त वंश तक जब भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था ! तब भारत का व्यापार उद्योग आदि अति विकसित थे ! लेकिन यहां के आम नागरिकों का बौद्धिक स्तर अपनी संपन्नता के अनुरूप विकसित न होने के कारण भारत का आम आदमी भोगी विलासी हो गया ! और इसी भोग विलास की प्रवृत्ति के कारण भारतीय […] - [जीवन में सफलता के प्रथम सूत्र : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/first-formula-of-success-in-life/): जीवन की सफलता का कोई निश्चित मानक नहीं है ! आपका व्यवहार, आपकी शिक्षा, आपका रंग, रूप, स्वभाव आदि यह सब आपके सहायक हैं ! इनमें से कोई भी चीज हर व्यक्ति को सफल बना सकती हैं ! यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है ! हर व्यक्ति के कार्य करने की प्रवृत्ति और उसके स्वभाव का तालमेल व्यक्ति के सफल होने में बहुत सहायक हो सकता है ! जैसे कि कोई व्यक्ति कठोर प्रवृत्ति का है, तो वह पुलिस प्रशासन या मिलिट्री की सेवा के लिए उचित है ! लेकिन कोई व्यक्ति मृदुल स्वभाव का है और […] - [संपन्नता के लिए राम के साथ रुपये की भी चिंता करो : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/worry-about-money-along-with-ram-for-prosperity/): धर्म की उत्पत्ति समाज के मंदबुद्धि वर्ग के मनुष्यों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी ! इसीलिए धर्म ने स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म, देव-दैत्य, सुर-असुर जैसे सांकेतिक शब्दों का निर्माण किया ! जिन शब्दों के माध्यम से मंदबुद्धि के व्यक्तियों को यह बतलाया जा सके, कि वह धर्म के अनुसार जीवन यापन कर रहे हैं या धार्मिक नियमों के विपरीत जीवन यापन कर रहे हैं ! इस तरह यह सिद्ध होता है कि समाज जितना अधिक मानसिक रूप से कमजोर होगा, धर्म की पकड़ समाज पर उतनी अधिक होगी ! लेकिन यह स्थिति यह भी बतलाती है कि समाज […] - [नाथ परंपरा का तिब्बत से सम्बन्ध : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/relation-of-nath-tradition-with-tibet/): तिब्बत का प्राचीन नाम त्रिविष्टप है ! तिब्बत प्राचीन काल से ही योगियों और सिद्धों का घर माना जाता रहा है ! पहले यह भारत का हिस्सा था ! 1912 में तिब्बत के 13वें धर्मगुरु दलाई लामा ने तिब्बत को भारत से अलग स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया ! राहुलजी सांस्कृतायन के अनुसार तिब्बत के 84 सिद्धों की परम्परा ‘सरहपा’ से आरंभ हुई और नरोपा पर पूरी हुई ! सरहपा चौरासी सिद्धों में सर्व प्रथम थे ! इस प्रकार इसका प्रमाण अन्यत्र भी मिलता है लेकिन तिब्बती मान्यता अनुसार सरहपा से पहले भी पांच सिद्ध हुए हैं ! इन सिद्धों […] - [ब्राह्मणों को कोई पराजित नहीं कर सकता है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/no-one-can-defeat-brahmins/): आजकल हिंदू धर्म और ब्राह्मणों को पानी पी पी कर गाली देने का एक प्रचलन सा शुरू हो गया है ! इसके पीछे विदेशी इसाई संस्थाओं और बौद्ध षड्यंत्रकारियों का स्पष्ट हाथ है ! प्रशासनिक सेवाओं की कोचिंग पढ़ाने वालों से लेकर फिल्म बनाने वालों तक और लोकतंत्र की तथाकथित राजनीति करने वालों से लेकर सड़क पर आवारागर्दी करने वाले अनपढ़ जाहिल लफंगों तक ! बिना किसी रोक-टोक के हिंदू धर्म और ब्राह्मणों को गाली देने का प्रचालन चल रहा है ! किंतु गाली देने वालों को यह नहीं पता है कि 400 साल के अथक परिश्रम के बाद स्थापित […] - [रावण काल का क्रिस्टल कपाल सुपर कंप्यूटर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/crystal-skull-supercomputer-of-ravana-period/): अमेरिका की निवासी महिला केर्लिन फोर्ट जो कि एक व्यवसायिक फोटोग्राफर हों ! उनको माया सभ्यता के नागरिकों से वर्ष 2001 में एक 15 किलो का क्रिस्टल कपाल मिला है ! उस महिला ने इस क्रिस्टल कपाल का नाम आइंस्टाइन रखा है ! उसका कहना है कि उस कपाल से आकर्षित होकर वह उसे लेकर अपने घर पर आ गई और उस क्रिस्टल कपाल ने वास्तव में खुद अपने मुंह से बोलकर अपना परिचय उस महिला को दिया, कि वह आधुनिक युग के अनुसार एक सुपर कंप्यूटर है ! उस जैसे पूरी पृथ्वी पर 27 सुपर कंप्यूटर हैं ! जिनमें […] - [तत् और श्री में अंतर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/difference-between-tat-and-shri/): वैष्णव जीवन शैली में धर्म के नाम पर लूट की अलग-अलग दुकान चलाने के लिए दर्जनों देवी देवताओं का निर्माण वैष्णव धर्माचार्यों ने किया है ! और अलग-अलग देवी-देवताओं को अलग-अलग मानवीय इच्छाओं की पूर्ति करने का पर्याय बना दिया है ! जिसके लिए अलग-अलग तरह के मंत्र, पूजा, अनुष्ठान, कर्मकांड आदि करने का विधान निर्मित किया है ! साथ ही वैष्णव जीवन शैली ने अवतारवाद की अवधारणा को भी समाज में प्रचलित किया है ! जिसमें वैष्णव परंपरा को मानने वाले जिन राजाओं ने शैवों का दमन कर वैष्णव का जीवन शैली का प्रचार प्रसार किया था ! उन […] - [मनुष्य मृत्युंजयी कैसे बनता है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-does-a-man-become-mrityunjayi/): सनातन शैव संस्कृति अनादि है, अनंत है और काल से परे है ! क्योंकि इस संस्कृति के संस्थापक भगवान शिव ने स्वयं की है ! जो स्वयं काल से परे हैं ! भगवान शिव का कभी जन्म नहीं हुआ है इसलिये वह अनादि हैं, उनका जन्म नहीं हुआ है इसलिए उनकी कभी मृत्यु भी नहीं होगी इसीलिए भगवान शिव अनादि और अनंत हैं ! इस तरह जिस संस्कृति के संस्थापक भगवान शिव स्वयं हैं, वह सनातन शैव संस्कृति भी अनादि और अनंत है ! भगवान शिव का अनुगमन करने वाले लोगों ने कब वृक्ष की पूजा शुरू की, कब नदियों […] - [याचक नहीं दाता बनो : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/dont-be-a-beggar-be-a-donor/): वैष्णव जीवन शैली में भक्त जीवन भर गुरु से, भगवान से, प्रकृति से याचना करते हुए ही जीवन व्यतीत करता है ! उसे सदैव प्रतिक्षण कुछ न कुछ चाहिए ही होता है ! किसी को पुत्र की कामना होती है, तो किसी को संपत्ति की, कोई यश मांगता है, तो कोई स्वस्थ शरीर मांगता है ! और इसके लिए वैष्णव लोगों ने तरह-तरह के भगवान, मंत्र, कर्मकांड और अनुष्ठान आदि बना रखे हैं, और समाज में यह अवधारणा फैला रखी है कि इस पद्धति से यदि कोई पूजा की जाएगी, तो निश्चित रूप से आपको वह वस्तु प्राप्त होगी ! […] - [जीवन की समस्याओं को मिटाना है तो शैव बनो : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%a8/): मनुष्य के जीवन में हर तरह की हर समस्या का कारण कृत्रिम जीवन पद्धति है ! जो हमें वैष्णव जीवन शैली से प्राप्त हुई है ! आज साम्राज्यवादी सोच भी इसी कृत्रिम जीवन पद्धति का विकसित रूप है ! कृत्रिम जीवन पद्धति में सबसे बड़ा दुर्गुण यह है कि इसमें संचय को ही विकास का आधार माना जाता है, जबकि किसी भी व्यक्ति के विकसित होने की पहचान उसका विकसित मानसिक स्तर है ! किंतु वाह्य आडंबर को विकास मनाने के कारण जिस व्यक्ति के पास जितना बड़ा मकान, जितनी बड़ी गाड़ी, जितना अधिक पैसा है, वह व्यक्ति समाज में […] - [वैष्णव संतों का वास्तविक चेहरा : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/real-face-of-vaishnav-saints/): वैष्णव धर्म ग्रंथों के अनुसार भारत में जब वैष्णव जीवन शैली अपने पूर्ण प्रसार पर थी ! तब दो महायुद्ध हुए ! एक राम रावण का युद्ध और दूसरा महाभारत का धर्म युद्ध और यह दोनों ही युद्ध धर्म और संत समाज की रक्षा के लिए हुए ! ऐसा बतलाया जाता है ! मगर आश्चर्य की बात यह है कि इन दोनों ही युद्धों में कहीं कोई भी साधु-संत न तो राम के साथ युद्ध लड़ने गया और न ही कृष्ण के साथ ! जबकि युद्ध धर्म और वैष्णव संत समाज की रक्षा के लिए ही हुआ थे ! क्योंकि […] - [चोल वंशियों ने बनाया था भारत को सोने की चिड़िया : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/what-is-sanatan-shaiv-gram-2/): 300 ईसा पूर्व से 13वीं सदी चोल वंशियों का दक्षिण भारत पर शासन था ! अर्थात 1600 वर्षों तक कावेरी नदी घाटी में इस राजवंश ने शासन किया था और इनकी राजधानी तमिलनाडु स्थित वरायूर (अब तिरुचिरापल्ली) थी ! चोल राजवंश तमिलनाडु से आंध्र तक फैला हुआ था ! यह भगवान शिव के भक्त थे और अपने को रक्ष संस्कृति का प्रतिनिधि बतलाते थे ! इनकी शासन व्यवस्था रावण की शासन नीति के अनुरूप थी ! मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेखों में भी इनका जिक्र मिलता है ! ज्ञानत इतिहास में विजयालय चोल 848-871 से राजेन्द्र चोल 1246-1279 तक का […] - [सनातन शैव ग्राम क्या है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/what-is-sanatan-shaiv-gram/): मनुष्य को ईश्वर ने इस पृथ्वी पर अपनी स्वाभाविक अवस्था में जीवन निर्वाह के लिए भेजा था ! जिससे मनुष्य प्रकृति के रहस्य को समझते हुए अपना आंतरिक उत्थान कर सके ! लेकिन हम लोगों ने अपने सुविधाओं की तलाश के लिए एक कृत्रिम जीवन शैली अपना लिया है ! इन मानवीय सुविधाओं की खोज ने साम्राज्यवादी शक्तियों को अपने स्वार्थ के लिए उकसाया और उन्होंने अपने लाभ के लिये विज्ञान की मदद से हमारे संपूर्ण जीवन को ही कृत्रिम बना डाला है ! और उसका परिणाम यह हुआ कि अब हम यह कल्पना ही नहीं कर सकते हैं कि […] - [समृद्ध जीवन कैसे जियें : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-to-live-the-rich-life/): जब हम अपने जीवन की छोटी छोटी खुशियों में बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं, तो प्रकृति अपने बड़े बड़े खजाने हमारे लिये स्वत: खोल देती है ! तब हमें जीवन में अपार धन, सम्पदा, यश आदि स्वत: प्राप्त होने लगते हैं ! जिसे तलाशने की हमें कोई अतिरिक्त जरूरत नहीं पड़ती है ! दूसरे शब्दों में कहा जाये तो प्रेम और उत्साह ही व्यक्ति का असली खजाना है ! प्रेम अनादि और अनंत है ! प्रेम आत्म चिंतन और ध्यान से पैदा होता है ! जब हम ध्यान की गहराई में जाते हैं, तो हमें ईश्वर के अस्तित्व […] - [डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की शैक्षिक योग्यता : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/educational-qualification-of-dr-bhimrao-ambedkar-yogesh-mishra/): (सनातन धर्म विरोधी तथा अम्बेडकरवादी इस पोस्ट से दूर रहें) डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित महू में 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। प्राय: सभी अंबेडकर भक्त यह बतलाते हैं कि भीमराव अंबेडकर के पास 32 शैक्षिक डिग्रियां थी, लेकिन वह उन्होंने कितने समय में और कैसे प्राप्त की थी और उसमें कितने प्रतिशत नंबर प्राप्त हुए थे ! इस संदर्भ में कोई भक्त कभी कोई चर्चा नहीं करता है ! और न ही आज के इस इंटरनेट के युग में डा. भीमराव अंबेडकर जी की 32 शैक्षिक डिग्रियों की कोई प्रति कहीं भी […] - [अपने बचत का पैसा कहां सुरक्षित रखें : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/sins-of-the-artificial-narrator/): हर व्यक्ति बहुत ही परिश्रम से पैसे कमाता है और बैंक में अकाउंट खोल कर या एफ.डी.आर. आदि के माध्यम से उस कमाये हुए पैसे का एक अंश बचाता है ! लेकिन ज्ञान के अभाव में आज व्यक्ति यह नहीं जानता है कि वह व्यक्ति बैंक में पैसे को रख कर उस पैसे को धीमा जहर देकर उसकी हत्या कर रहा है ! क्योंकि बैंक रुपये के अवमूल्यन से कम मूल्य पर ही सदैव ब्याज देता है ! अत: बैंक में रखा धन बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं बढ़ता है और वह धन धीरे-धीरे प्रभावहीन होकर समाप्त हो जाता है […] - [भक्ति धर्म का हिस्सा नहीं है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/bhakti-is-not-a-part-of-religion/): प्रायः यह अवधारणा है कि जो व्यक्ति भक्त होता है वह धार्मिक भी होता है लेकिन यह अवधारणा अनादि काल से अस्वीकार्य है क्योंकि प्राचीन काल में भी यह माना गया कि जिस व्यक्ति ने धर्म के लक्षणों को स्वीकार नहीं किया है वह चाहे जितनी भक्ति कर ले कभी भी धार्मिक नहीं हो सकता है ! महर्षि मनु ने धर्म के दस लक्षण बतलाये हैं :- धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह: ! धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌ ! ! (मनुस्‍मृति 6.92) अर्थ – धृति (धैर्य ), क्षमा (अपना अपकार करने वाले का भी उपकार करना ), दम (हमेशा संयम से धर्म […] - [बौद्ध धर्म की सत्यता : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/truth-of-buddhism/): जैसा कि मैंने पूर्व के अपने एक लेख में बतलाया कि बौद्ध धर्म को लेकर आज तक कभी नहीं इतिहास में कोई प्रमाणिक ग्रंथ नहीं मिला है ! जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बौद्ध थे ! बल्कि सच्चाई यह है कि बौद्ध के नाम से जो संदेश आज बतलाए जाते हैं, वह आनंद नाम के एक व्यवसाई द्वारा प्रचारित प्रसारित किये गये थे, जो ग्रीक के साथ व्यापार करता था ! जो ग्रीक को भारत से राजनीतिक लाभ दिलाने के लिए और भारतीय क्षत्रिय एवं शुद्र राजाओं को प्रभावित करने के उद्देश्य […] - [अवतारवाद का विज्ञान : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/science-of-avatarism/): अवतार के विषय में कोई भी चर्चा करने के पहले यह जान लेना बहुत आवश्यक है कि अवतार का वर्णन न तो वेदों में मिलता है और न ही वेदांत में ! इसी तरह अवतार का वर्णन न तो सनातन दर्शन में मिलता है और न ही उपनिषदों में ! यहां तक की श्रीमद भगवत गीता में भी अवतार का कोई वर्णन नहीं मिलता है ! अवतार की अवधारणा गुप्त काल में पुराणों में लिखी गई है ! जिसे सामान्य भाषा में प्रकटीकरण कहा जा सकता है ! अर्थात जब कोई ऊर्जा हमारी इंद्रियों द्वारा हमें अनुभूत नहीं होती है, […] - [शैवत्व एक आंदोलन है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/shaivism-is-a-movement/): विश्व की कई संस्कृतियों के मिट जाने के बाद भी सत्य सनातन धर्म आज भी अपनी संस्कृति के साथ इस धरातल पर जीवित है ! इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि समय-समय पर सनातन धर्म को शुद्ध विकसित और परिष्कृत करने के लिए अनेक संतों का पृथ्वी पर आगमन हुआ है ! जिन्होंने इस पृथ्वी पर ऐसे सैकड़ों आंदोलन चलाए हैं ! जिससे भटके हुए धर्म को सही दिशा मिली है और मानवता का कल्याण हुआ है ! इस प्रतिस्पर्धात्मक विश्व जहां हर व्यक्ति साम्राज्यवादी सोच रखने के साथ दूसरे के अधिकार का हनन करने के लिए उत्सुक है […] - [क्या बौद्ध धर्म वास्तव में कोई धर्म है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-buddhism-really-a-religion/): भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को न मानने वाले बौद्ध धर्मी पहले यह सिद्ध करें कि क्या वास्तव में बौद्ध धर्म जैसा कोई धर्म कभी था ! जिस के संस्थापक कोई गौतम बुद्ध जैसा व्यक्ति हुआ करता था ! क्योंकि आज तक गौतम बुद्ध के रूप में दो अलग-अलग काल खण्ड में दो अलग-अलग गौतम बुद्ध के होने का इतिहास मिलता है ! कहीं-कहीं तो सात गौतम बुद्धों का भी वर्णन आता है और कहीं-कहीं तो गौतम बुद्धों की संख्या 14 तक बतलाई गई है ! और इससे अधिक ताज्जुब की बात यह है कि आज तक इस पृथ्वी […] - [ईश्वरीय कैसे हमारी रक्षा करता है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-god-protects-us/): प्रायः लोग मुझसे यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत कितना बड़ा आध्यात्मिक देश था, तो भारत अलग-अलग समय में विभिन्न विधर्मियों के अधीन गुलाम कैसे हो गया ! इस रहस्य को जानने के लिए यह परम आवश्यक है कि हम यह जाने के ईश्वरीय ऊर्जायें कैसे कार्य करती हैं ! ईश्वरी ऊर्जायें तीन तरह से हमारी सहायता करती हैं ! पहला यह कि पृथ्वी पर हमारी मदद के लिए वह अलग-अलग समय में ऐसे संतो को भेजता है, जो हमें ईश्वर के कार्य के योग्य तैयार होने में हमारी मदद करते हैं ! किंतु दुर्भाग्य यह है कि हम […] - [क्या योग वशिष्ठ शैव ग्रंथ है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-yoga-vashishtha-a-shaivite-text/): वशिष्ठ ऋषि वैदिक काल के विख्यात थे ! इनके ज्ञान के कारण इन्हें सप्तर्षि में भी शामिल किया गया था ! यानि ऐसा माना जाता है कि इन्हें वेदों की रचना करने वाले ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था ! इनका विवाह दक्ष प्रजापति और प्रसूति की पुत्री अरुंधती से हुआ था ! विश्वामित्र ने इनके 100 पुत्रों को मार दिया था, फिर भी इन्होंने विश्वामित्र को माफ कर दिया ! कोई भी सूर्य वंशी राजा इनकी आज्ञा के बिना कोई धार्मिक कार्य नही करते थे ! इसीलिये वशिष्ठ को राजा दशरथ ने अपना राजकुल गुरु निश्चित किया […] - [दोगले वैष्णव कथावाचकों का झूठ : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/lies-of-double-faced-vaishnav-storytellers/): वैष्णव कथा वाचक एक तरफ तो कहते हैं कि यदि व्यक्ति धर्म ग्रंथ वेद, पुराण, उपनिषद, वेदांत आदि का अध्ययन करता है, तो वह सभी तरह के विकारों से मुक्त हो जाता है ! और दूसरी तरफ यहीं कथावाचक कहते हैं कि रावण धर्म मर्मज्ञ था ! उसने अपनी प्रतिभा से आचार्य का पद प्राप्त कर लिया था ! उसे वेद, वेदांत उपनिषद् आदि कंठस्थ थे ! इतना ही नहीं वह ज्योतिषी, तांत्रिक, आयुर्वेदाचार्य, संगीत और संस्कृत का मर्मज्ञ ज्ञाता होने के साथ-साथ महा तपस्वी ब्राह्मण भी था ! इसके ज्ञान का स्तर इतना उच्च था कि भगवान शिव ने […] - [सनातन धर्म और हिन्दू धर्म में अंतर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/difference-between-sanatan-dharma-and-hindu-dharma/): सनातन धर्म मानवता के साथ स्व विकसित, प्रकृति और पर्यावरण अनुगामी धर्म है ! इसे शैव जीवन शैली का धर्म भी कहा जा सकता है ! इसमें उपासना के लिए किसी भी भक्त पर किसी भी प्रकार का कोई कर्मकांड का बंधन नहीं होता है ! जबकि हिंदू धर्म ईश्वर की आराधना से अधिक हिन्दू समाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिये वैष्णव विचारधारा के समर्थक ऋषि, मुनि, मनीषी, चिंतक, राजा, धर्मगुरु आदि के द्वारा निर्मित किया गया धर्म है ! हिंदू धर्म वास्तव में वैष्णव आक्रांताओं द्वारा शैव जीवन शैली के निवासियों पर बलपूर्वक थोपा गया धर्म है […] - [वाल्मीकि ने रामायण लिखी ही नहीं थी : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/valmiki-did-not-write-ramayana-at-all/): महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रत्नाकर था और इनके पिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र प्रचेता थे ! ब्रह्मर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न ब्राह्मण थे ! जिसकी पुष्टि स्वयं वाल्मीकि रामायण और महाभारत नामक ग्रन्थ से होती है ! ‘“संनिबद्धं हि श्लोकानां चतुर्विंशत्सहस्र कम् ! उपाख्यानशतं चैव भार्गवेण तपस्विना !! ( वाल्मीकिरामायण ७/९४/२५)’ महाभारतमें भी आदिकवि वाल्मीकि को भार्गव (भृगुकुलोद्भव) कहा है, और यही भार्गव रामायणके रचनाकार हैं – ‘“श्लोकश्चापं पुरा गीतो भार्गवेण महात्मना ! आख्याते रामचरिते नृपति प्रति भारत !!” ‘(महाभारत १२/५७/४०) एक भीलनी ने बचपन में इनका अपहरण कर लिया गया था और भील समाज में इनका लालन […] - [रावण की संपन्नता का रहस्य : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/the-secret-of-ravanas-prosperity/): यह त्रेता युग के उस समय की घटना है, जब वैष्णव आक्रांताओं द्वारा छल और बल से शैवों को इस पृथ्वी पर पूरी तरह से नष्ट करके वैष्णव साम्राज्य स्थापित करने का षड्यंत्र अपने चरम पर था ! वैष्णव आक्रांताओं से शैव संस्कृति की रक्षा के लिए परशुराम जी अकेले ही 21 बार महायुद्ध लड़ चुके थे ! आयु के अधिक होने के कारण अब परशुराम जी ने कश्मीर में कश्यप ऋषि के समक्ष अपना फरसा “परसु” उनके चरणों में रख दिया था और खुद तपस्या करने के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए थे ! किन्तु सत्यता से […] - [अनियंत्रित इंद्रियां ही अपराध का कारण हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/uncontrolled-senses-are-the-cause-of-crime/): वैष्णव मत दर्शन के अनुसार मनुष्य को 14 इंद्रियां प्राप्त हैं ! पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार व्यक्ति को अपराध के लिये उकसाती हैं ! तब व्यक्ति की ज्ञानेंद्रियां, कर्मेंद्रियां अपराध में लिप्त होती हैं ! शैव मत दर्शन के अनुसार मस्तिष्क के भीतर कपाल के नीचे एक एक ग्रंथी है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं ! वहीं से सुषुन्मा नाड़ी रीढ़ के अन्दर से होती हुई मूलाधार तक गई है ! यह सुषुन्मा नाड़ी सहस्त्रार […] - [सांसारिक दरिद्रता वैष्णव जीवन दर्शन की देन है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/worldly-poverty-is-the-gift-of-vaishnava-philosophy-of-life/): प्राय: वैष्णव विचारकों के मुख से यह बात सुनने में आती है कि लक्ष्मी और सरस्वती का मेल नहीं है अर्थात जो व्यक्ति संपन्न है वह विद्वान नहीं हो सकता और जो विद्वान है वह संपर्क नहीं हो सकता है ! लेकिन यह वैष्णव दर्शन नितांत अव्यवहारिक और षड्यंत्रकारी है ! वैष्णव जीवन शैली की सदैव से यह सोच रही है कि सामान्य व्यक्ति सदैव ही पराधीन पराआश्रित जीवन यापन करे ! इसके लिए उन्होंने अवतार और राजा की व्यवस्था के साथ नगरीय जीवन शैली को स्थापित किया है ! साथ ही समाज के सबसे प्रबुद्ध वर्ग ब्राह्मण को संग्रह […] - [नव चिंतकों पर प्रतिबंध लगाता समाज : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/society-banning-new-thinkers/): जिस तरह प्रत्येक मनुष्य के बुद्धि का अपना एक स्तर होता है ! ठीक उसी तरह समाज की सामूहिक बुद्धि का भी अपना एक स्तर होता है ! इन दोनों ही तरह के बुद्धियों को विकसित करने का एक क्रम है ! जिसकी अनिवार्य आवश्यकता समय है ! अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए कि कम समय में यदि व्यक्ति बुद्धि को अधिक विकसित करना चाहता है तो उसे अपने से विकसित व्यक्ति के बुद्धि का अनुकरण करना पड़ेगा ! यही हमारे यहां शिक्षा परंपरा का सार है ! इसीलिए शिष्य अपने से योग्य और विकसित गुरु के द्वारा दिए […] - [राम को पिनाक धनुष तोड़ना क्यों जरुरी था : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/why-was-it-necessary-for-rama-to-break-the-pinaka-bow/): वाल्मीकि रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन नहीं है ! महर्षि वाल्मीकि के अनुसार रावण की नानी केतुमती जिसे तुलसीदास ने ताड़का कहा, उसकी अकारण विश्वामित्र के उकसाने पर राम द्वारा हत्या कर दी गयी थी ! उस समय विश्वामित्र को यह पता था कि रावण इसका बदला जरुर लेगा ! जिसके लिये महाराजा जनक जी के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवरात को जो पिनाक धनुष शिवजी ने धरोहर के रूप में दिया था ! जो अभी तक जनक के पास सुरक्षित है उसे तत्काल नष्ट करना आवश्यक है ! क्योंकि उत्तर भारत में यह एक मात्र […] - [शैव साधना के सात चरण हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/there-are-seven-stages-of-shaiva-sadhana/): शैव साधना पद्धति के सात चरण हैं ! जो पूरी तरह से वैष्णव साधना पद्धति से भिन्न हैं ! शैव साधना में सबसे ज्यादा कार्य स्वयं अपने आप पर करना होता है, जबकि वैष्णव साधना पद्धति में सबसे अधिक कार्य भगवान अर्थात अवतार पर करना होता है ! जिन्हें वैष्णव प्रपंचकारियों ने अपने धार्मिक व्यवसाय के लाभ के लिए कुछ हिंसक, छली, षड्यंत्रकारी राजाओं को भगवान घोषित कर रखा है और उनके गुणगान के लिए तरह-तरह के चालीसा, स्त्रोत, कीर्तन, भजन, मंत्र आदि का निर्माण कर रखा है ! इसी वजह से वैष्णव उपासना पद्धति में व्यक्ति को सर्वप्रथम व्रत, […] - [हर व्यक्ति जन्म से शैव ही है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/everyone-is-a-shaivite-by-birth/): शैव जीवन शैली का अनुपालन करने वाले व्यक्ति की तीन पहचान होती है ! पहला वह संग्रह नहीं करता है ! दूसरा वह किसी से राग द्वेष नहीं रखता है और तीसरा वह सबको समान समझता है ! यह तीनों ही गुण मनुष्य में जन्मजात होते हैं ! जिसे मनुष्य की सहज अवस्था कहा गया है ! इसलिए यह सिद्ध होता है कि प्रत्येक व्यक्ति जन्म से शैव ही होता है ! मनुष्य को सबसे वैष्णव बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है, जिस प्रक्रिया की शुरुआत यज्ञोपवीत से होती है ! वैष्णव जीवन शैली में जब व्यक्ति दुनिया को समझने […] - [भारतीय शास्त्रीय संगीत से चिकित्सा : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/indian-classical-music-therapy/): भारतीय शास्त्रीय संगीत पूर्णतया वैज्ञानिक है ! हमारे ऋषियों, मुनियों, मनीषियों, चिंतकों ने मानव चित्त, मन, बुद्धि, संस्कार और अहंकार पर गहन शोध करने के बाद, उनका ध्वनि से संबंध स्थापित किया और यह निष्कर्ष निकाला कि विभिन्न तरह की ध्वनियां मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर सीधा प्रभाव डालती हैं ! आयुर्वेद में भी ध्वनि तरंगों से मनुष्य के चिकित्सा का विधान पाया जाता है ! इसलिए हम स्पष्ट रूप से यह कह सकते हैं कि जब कोई भी दवा काम नहीं कर रही है तो सही पद्धति से गाया गया भारतीय शास्त्रीय संगीत व्यक्ति के मन मस्तिष्क को बदलकर […] - [पाखंडी ध्यान गुरुओं से सावधान : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/beware-of-hypocritical-meditation-gurus/): ध्यान के दो अर्थ होते हैं ! सामान्य प्रचलित भाषा में किसी विषय, वस्तु, व्यक्ति, उद्देश्य पर मन और भाव को केन्द्रित करना ध्यान है ! जिसे हम त्राटक के नाम से भी जानते हैं ! वैष्णव जीवन शैली में इसका बड़ा महत्व है ! ध्यान का दूसरा अर्थ है विचारशून्य हो जाना, निष्क्रिय हो जाना, केवल दृष्टा मात्र बनकर रह जाना ! ध्यान की यह पध्यति शैवों में पाई जाती है ! दोनों ही प्रकार के ध्यान का अपना अपना महत्व है, लेकिन शैव ध्यान पध्यति का अपना विशेष महत्व है ! क्योंकि इसका उद्देश्य है “स्वयं को जानना” […] - [जीवन क्या है ? : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/what-is-life/): बड़े-बड़े मनीषी, चिंतक, विचारक, आध्यात्मिक गुरु और समाज के आम लोग जीवन भर यही चिंतन करते रहते हैं कि आखिर जीवन क्या है ? यह एक बहुत गहरा प्रश्न है और व्यक्ति इस प्रश्न का उत्तर इंद्रियों के माध्यम से खोजना चाहता है ! इसीलिए व्यक्तियों को पूरा जीवन जी लेने के बाद भी यह पता नहीं चलता है कि जीवन क्या है ? जबकि यदि जीवन के रहस्य को समझना है, तो पहली शर्त है कि व्यक्ति को अपने प्रति दृष्टा भाव को प्रगट करना होगा ! क्योंकि जब तक आप स्वयं को दृष्टा भाव से नहीं देखेंगे, तब […] - [क्या संत समाज हिंदुत्व की रक्षा करने में अक्षम है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-sant-samaj-incapable-of-protecting-hindutva/): आज हिंदुओं का बौद्धिक विकास आधुनिक युग के अनुक्रम में रुक सा गया है, और जो लोग विकसित हो रहे हैं, वह हिंदुस्तान ही छोड़ कर बाहर चले जाते हैं ! क्योंकि हिंदुस्तान में संत समाज का एक ऐसा संगठित गिरोह है ! जो हजारों साल पुराने नियमों को जबरजस्ती हिंदुत्व के नाम पर आज की नई पीढ़ी पर थोपना चाहते हैं ! अब नई पीढ़ी धर्म के नाम पर भावुक नहीं है बल्कि बुद्धिजीवी है, विचारशील है, तटस्थ है और वह भविष्य में विकास पर विश्वास रखती है ! ऐसी स्थिति में हजारों साल पुराने परंपरागत नियम जिन्हें हिंदू […] - [राम के वनवास का सच : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/truth-of-ramas-exile/): प्राय: आरोप लगाया जाता है कृष्ण एक कुटिल राजनीतिज्ञ थे और राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे ! यह बात अलग है कि राम को मर्यादा पुरुषोत्तम घोषित करने का श्रेय एक पैतृक कथावाचक और कवि गोस्वामी तुलसीदास को जाता है ! यदि राम को एक राजा के रूप में देखा जाए तो राम अपने जीवन में अत्यंत सफल राजा हुये ! जो कि एक कबीले के राजा के पुत्र होकर उन्होंने पूरे एशिया में अपना साम्राज्य स्थापित किया और साम्राज्य विस्तार ही राजा के सफलता का मानक है ! फिर वह साम्राज्य विस्तार छल से किया गया हो या धर्म से […] - [परजीवी कथावाचक : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/parasitic-narrator/): सामान्यतया यह कहा जाता है कि अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ सबसे अधिक झूठ बोलते हैं ! किंतु मैंने व्यवहार में देखा है कि अपना धंधा चलाने के लिए सबसे अधिक झूठ बोलने का कार्य भगवान के नाम पर कथावाचक करते हैं ! यह इनकी मजबूरी भी है क्योंकि यह लोग परजीवी होते हैं ! समाज का भावनात्मक शोषण ही इनके जीविकोपार्जन का आधार होता है ! ऐसे लोग हमेशा भावुक और अध्ययन हीन भक्तों के बाहुल्य क्षेत्र को अपने व्यवसाय का केंद्र बनाते हैं ! जहां पर मनगढ़ंत कपोल कल्पित कहानियां सुना कर समाज का भावनात्मक मनोरंजन करवाते हुये उनका शोषण […] - [क्या दशरथ चक्रवर्ती सम्राट नहीं बल्कि एक काबिले के राजा थे : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/was-dasaratha-chakravarti-not-an-emperor-but-a-clan-king/): गोस्वामी तुलसीदास ने राजा दशरथ को रामचरितमानस में एक चक्रवर्ती सम्राट कह कर संबोधित किया है और साथ में यह भी बतलाया है कि राजा दशरथ का इतना प्रभाव और सामर्थ्य था कि वह किसी भी व्यक्ति को राजा बना सकते थे और किसी भी राजा को दंडित कर सकते थे ! लेकिन यह एक कवि की कल्पना है ! जो अपने नायक को महानायक बनाने के लिए तरह-तरह के काल्पनिक व प्रपंचों को रचता है ! जबकि यथार्थ इसके बिल्कुल विपरीत है ! अयोध्या का तथाकथित साम्राज्य उत्तर में सरजू नदी से लेकर दक्षिण में लगभग 16 किलोमीटर दूर […] - [राम रावण युद्ध में हमने क्या खोया : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/what-did-we-lose-in-ram-ravana-war/): बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि आज से 7500 साल पहले जब विश्व की आबादी मात्र डेढ़ करोड़ थी ! तब उसमें भी अधिकांश लोग अपनी सुविधाओं के लिए रावण के साम्राज्य “रक्ष प्रदेश” में निवास करते थे ! रावण का साम्राज्य कर्क रेखा के नीचे संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका से होते हुये दक्षिण अमेरिका फैला हुआ था ! जो उस समय बालीद्वीप (बाली), मलायाद्वीप (मलेशिया), अंगद्वीप, शंखद्वीप, खुशद्वीप आदि अनेकों नाम से जाना जाता था ! रावण के साम्राज्य का सबसे बड़ा घनी आबादी वाला क्षेत्र “कुमारी कंदम” था ! जो वर्तमान श्रीलंका से नीचे दक्षिण […] - [वैष्णव लेखकों ने समाज को कैसे विकास विरोधी बना : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-vaishnav-writers-made-the-society-anti-development/): सभी कथावाचक बतलाते हैं कि रामायण समाज के हर वर्ग को जोड़ने का दिव्य ग्रंथ है ! यह कोई भी कथावाचक नहीं बतलाता है कि रामायण ने ही व्यक्ति के स्वतन्त्र चिंतन करने और अपनी राय प्रकट करने के संदर्भ में प्रतिबंध लगाने की शुरुआत की थी ! जिसकी पूरी कथा रामायण में इस प्रकार है ! राजा दशरथ ने जाबालि के यश और गुण से प्रभावित होकर उन्हें अपनी सभा में सलाहकार रख लिया था । जब राम वन गये । भरत उन्हें मनाने पहुंचे । साथ में जाबालि ऋषि भी थे । वह यथार्थवादी दर्शन को मानते थे […] - [स्व ही कर्मों का प्रमाण है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/self-is-the-proof-of-karma/): प्राय: सभी धर्मों में ऐसा चिंतन है कि ईश्वर के समक्ष हर व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत प्रस्तुत होना पड़ता है और उस समय व्यक्ति ने जो भी अच्छे या बुरे कर्म किए हैं, उसका सबूत देना पड़ता है ! साक्ष्य के तौर पर वैष्णव अग्नि को प्रमाण मानते हैं ! उनका कहना है कि व्यक्ति को हर सात्विक कार्य में अग्नि को साक्षी रखना चाहिए ! जिससे ईश्वर के यहां जब कर्मों का हिसाब किताब हो तब अग्नि उनके पक्ष में गवाही दे सके ! इसीलिए वैष्णव हर पूजा पाठ, कर्मकांड, अनुष्ठान आदि में अग्नि का दिया जलाते हैं […] - [सनातन धर्म वितण्डावादियों के हवाले : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/quoting-sanatan-dharma-vitandavadis/): सामान्य भाषा में वितण्डावाद का अर्थ निरर्थक दलील, हुज्जत करना या निराधार लड़ाई-झगड़ा करना होता है ! जिसे दूसरे शब्दों में दूसरे की बातों या तर्कों की उपेक्षा करते हुए बस अपनी बात कहते चले जाने की क्रिया को वितण्डावाद कहते हैं ! और जब स्वार्थ या भावनात्मक कारणों से वितण्डावादी लोग किसी भी विषय को लेकर समाज में एक समूह बना लेते हैं, तब समाज का ज्ञान प्रवाह रुक जाता है ! क्योंकि ज्ञान की जीवनी शक्ति तर्क में सन्निहित और वितण्डावादी कभी नहीं चाहते कि समाज में धार्मिक विषयों पर तर्क हो ! इसीलिए वैष्णव धर्म लेखकों ने […] - [मात्र संस्कृत भाषा हिंदुत्व का आधार नहीं है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%81/): यह एक चिंतन का विषय है कि भारत अनादि काल से विभिन्न भाषा और संस्कृतियों का देश रहा है ! फिर भी सभी धर्म ग्रंथ संस्कृत भाषा में ही क्यों मिलते हैं ? जबकि भारत के संदर्भ में तो यह विश्व विख्यात लोकोक्ति है कि “कोस कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी” अर्थात भारत में अनादि काल से सैकड़ों क्षेत्रीय भाषाएं रही है ! जिनके अपने सामाजिक सुरक्षा के कुछ विशेष वैज्ञानिक कारण थे ! इसीलिए बहुत से विचारक जैसे कबीर दास, रहीम दास, रैदास, गोरखनाथ, गुरु नानक जी महाराज जैसे हजारों दिव्य विद्वानों ने क्षेत्रीय भाषा में […] - [लाक्षाग्रह का सत्य : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/truth-of-lakshagraha/): प्रयागराज इलाहबाद से 50 किलोमीटर दूर हंडिया के तथाकथित लाक्षागृह के निकट गंगा घाट पर बरसात के कारण टीला की मिट्टी ढह जाने के कारण करीब छह फीट चौड़ा सुरंग दिखाई देने लगी ! क्षेत्र में सुरंग की बात चर्चा में आने पर ग्रामीण वहां पहुंचने लगे ! साथ ही लाक्षागृह पर्यटन स्थल विकास समिति के ओंकार नाथ त्रिपाठी ने इस संबंध में बताया कि यहाँ पर महाभारत काल के समय के कई अवशेष मिले हैं, जिसे संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है ! केंद्र व राज्य सरकार से कई बार इसे पर्यटल स्थल बनाए जाने की जनता द्वारा मांग […] - [चिंतन विहीन धर्म गुरु की तलाश : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/searching-for-a-religious-teacher-without-contemplation/): आज ही नहीं अनादि काल से मनुष्य बहुत अधिक चिंतन के पक्ष में नहीं रहा है ! कुछ महत्वपूर्ण संवेदनशील व्यक्तियों ने जो चिंतन किया, उसी से सनातन धर्म ग्रंथों का निर्माण हुआ है ! मानव समाज सदैव से चिंतन से कतराता रहा है और यह परंपरा आज भी चली आ रही है ! इसी का परिणाम है कि आज चिंतनशील व्यक्ति को समाज अस्वीकार कर देता है और ढोलक मजीरा पीटने और पिटवाने वाले गुरु को समाज पसंद करता है ! क्योंकि व्यक्ति न तो धर्म के नाम पर गंभीर ऐतिहासिक घटनाओं का चिंतन करना चाहता है और न […] - [क्या ब्रह्मचर्य की अवधारणा एक भ्रम है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-the-concept-of-brahmacharya-an-illusion/): ब्रह्मचर्य को वैष्णव जीवन शैली में बहुत महत्व दिया गया है ! न जाने कितने कपोल कल्पित उदाहरणों से वैष्णव द्वारा मनुष्य को यह समझाने की कोशिश की जाती रही है कि जीवन में ब्रह्मचर्य से अद्भुत शक्तियां प्राप्त की जा सकती हैं ! प्राय: ब्रह्मचर्य के लाभ को बतलाते हुए यह बतलाया जाता है कि इससे मनुष्य का मस्तिष्क तीव्र होता है ! उसके अंदर चिंतन मनन करने की प्रबल क्षमता विकसित होती है ! इससे याददाश्त अच्छी होती है ! उस पर ईश्वर की कृपा होती है और ब्रह्मचारी मनुष्य मृत्यु को भी जीत सकने का सामर्थ्य रखता […] - [मुक्ति और मोक्ष में अंतर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/difference-between-mukti-and-moksha/): वैसे तो महाभारत के वन पर्व में लोमश ऋषि युधिष्ठिर को अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद की कथा सुनाते हैं ! इसी संवाद को कालांतर में अष्टावक्र गीता के नाम से जाना गया ! जो अद्वैत वेदान्त अर्थात शैव उपासना पध्यति का ग्रन्थ है ! जनक का संबोधन यहाँ इक्ष्वाकु पुत्र निमि के शिव भक्त परम्परा के सूर्यवंशी विदेही शासकों से है ! जिस परम्परा में अनेकों शासक हुये हैं ! इन सभी के नाम अलग अलग थे ! यहाँ राजा जनक शब्द का सम्बन्ध ऐसे शासक से है, जो अपने जनता का पोषण पुत्र के समान करता हो […] - [आपका संस्कार ही आपका भगवान है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/your-sanskar-is-your-god/): वैष्णव जीवन शैली में एक अवधारणा यह भी है कि “होई है वही जो राम रचि राखा” अर्थात इस दुनिया में आपके साथ जो कुछ भी होना है, उसे ईश्वर ने पहले से ही लिख रखा है या दूसरे शब्दों में कहा जाए कि आप इस दुनिया में जो भी कार्य करते हैं, वह ईश्वर की प्रेरणा से ही करते हैं ! आज हम लोग इसी विषय पर चर्चा करेंगे ! उपरोक्त अवधारणा को यदि सत्य मान लिया जाए तो मनुष्य द्वारा किए जाने वाले सभी अच्छे और बुरे कार्य ईश्वर द्वारा पूर्व से ही निर्धारित हैं ! मतलब व्यक्ति […] - [क्या सभी के लिये वैष्णव राजाओं की पूजा अनिवार्य है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-worship-of-vaishnava-kings-compulsory-for-all/): जैसा की मैंने अपने पूर्व के अनेकों लिखो में लिखा है कि भारत अनादि काल से शैव संस्कृति का अनुयायी रहा है ! भारत की उपजाऊ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिए कृषि प्रधान वैष्णव संस्कृति के लोगों ने भारत पर आज से 10,000 वर्ष पूर्व छल और बल से भारत पर आक्रमण करके भारत के अधिकांश क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया था ! भारत में जिन शैव परंपरा के लोगों ने इन वैष्णव आक्रांताओं का विरोध किया था, उन्हें असुर और राक्षस आदि कहकर वैष्णव लोगों ने उनका विरोध किया और कालांतर में उन्हें वैष्णव […] - [रावण नीति के 10 अध्याय : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/10-chapters-of-ravana-policy/): रक्ष संस्कृति का राजा रावण जिसने इस पृथ्वी पर एक नई जीवन शैली की स्थापना की थी, जिसे कालांतर में “रक्ष संस्कृति” कहा गया ! ऐसे ही विद्वान नीतिकार रावण ने इस समस्त पृथ्वी पर अपने साम्राज्य को चलाने के लिए 10 नीतियों का सहारा लिया था ! यह दसों नीतियां मनोविज्ञान की दृष्टि से इतनी व्यावहारिक हैं, कि यह हर काल में उपयोगी हैं ! भगवान राम भी स्वयं रावण के नीति व्यवहार से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने रावण को हराने के बाद जब रावण मृत्यु शैया पर था, तो उन्होंने अपने घायल छोटे भाई लक्ष्मण को नीति […] - [कभी इस पृथ्वी पर बस सिर्फ शैवों का शासन था : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/once-this-earth-was-ruled-only-by-shaivas/): जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि आज से 10,000 साल पहले भारत पर वैष्णव आक्रांताओं ने छल पूर्वक अपना नियंत्रण करना शुरू कर दिया था ! जिसे भारत के इतिहास में आर्यों का आगमन कहा गया ! जिससे भारत की शैव संस्कृति को अत्यधिक क्षति हुई ! कालांतर में वैष्णव गुरुकुलों के द्वारा शैव जीवन शैली के अनुयायी भगवान शिव के भक्त दैत्य, दानव, असुर आदि के नाम से जाने जाने वाले व्यक्तियों को विलेन घोषित कर दिया गया ! जबकि यह सब एक विशेष जीवन शैली थी ! एक विशेष संस्कृति थी ! लेकिन वैष्णव लोगों ने […] - [हिन्दू धर्म के आधारहीन व्याख्याकार : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/baseless-interpreters-of-hinduism/): आज हिंदू समाज में सबसे बड़ी दिक्कत यह हो रही है कि हिंदू धर्म के नये व्याख्याकार परंपरागत हिंदू धर्म के प्रवक्ताओं के लिये आधुनिक विज्ञान का सहारा लेकर चुनौती बनते जा रहे हैं ! और हिंदू धर्म के परंपरागत व्याख्याकारों के पास आधुनिक परिवेश के अनुसार नई पीढ़ी के लिए कोई भी वैज्ञानिक तार्किक आधार नहीं है और नई पीढ़ी अब परंपरागत भक्ति नहीं करना चाहती है ! नई पीढ़ी का ढोलक, मजीरा, भजन, कीर्तन आदि से विश्वास उठ चुका है, क्योंकि उसने अब विश्व के नये वैज्ञानिक तार्किक मानकों से इन परंपरागत धर्म मानकों को मानना बंद कर […] - [धनवान होना है, तो धर्म के आडंबर छोड़िये : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/if-you-want-to-be-rich-leave-the-ostentation-of-religion/): आजकल की युवा पीढ़ी बहुत दुविधा में फंसी है ! एक तरफ तो शिक्षक कहते हैं कि परिश्रम से धन मिलता है और दूसरी तरफ धर्मगुरु कहते हैं कि गणेश लक्ष्मी की पूजा से धन मिलता है ! और इसके लिए तरह-तरह के स्त्रोत, चालीसा, अनुष्ठान, मंत्र आदि का धर्म गुरुओं ने निर्माण कर दिया है ! व्यक्ति के पास मात्र 24 घंटे हैं ! जिसमें उसे अपना दैनिक जीवन निर्वाह भी करना है और पैसे कमाने के लिए रोजी रोजगार भी करना है ! अब व्यक्ति की समझ में यह नहीं आ रहा है कि मैं धर्म गुरुओं की […] - [राम की निगाह में सीता का अस्तित्व : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/the-existence-of-sita-in-the-eyes-of-rama/): ( अध्ययन हीन व्यक्ति इस लेख को न पढ़ें) गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा बलपूर्वक राम को मर्यादा पुरुषोत्तम घोषित किया गया था ! क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास एक राम भक्त कथावाचक कवि थे ! यही इनका पैतृक व्यवसाय था ! और रामकथा ही उनके जीविकोपार्जन का साधन भी था ! वह ब्राह्मण कुल से थे और राम कथा उनके यहां पीढ़ियों से की जाती थी ! जिस परिवार में उनका विवाह हुआ था, वहां भी रामकथा का कथा वाचन ही आय का मुख्य साधन था ! इस तरह गोस्वामी तुलसीदास की यह सार्वजनिक मजबूरी थी कि वह अपने जीवकोपार्जन के लिये […] - [पौराणिक शब्दों के मोह ने हिंदुत्व के विकास को रोक रखा है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/infatuation-with-mythological-words-has-stunted-the-growth-of-hindutva/): हिंदू धर्म में बहुत से ऐसे शब्द हैं, जिनके विषय में हिंदू यह मानकर चलता है कि यह अंतिम निष्कर्ष का शब्द है ! अब इसमें किसी भी पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है ! जैसे सत्य, तप, त्याग, प्रारब्ध, सुर, असुर, ब्रह्मचर्य, गुरुकुल, गीता, भगवत, भक्ति, आदि आदि ! और यदि कोई व्यक्ति उन शब्दों पर पुनर्विचार करने की बात कहता है, तो रूढ़िवादी हिंदू समाज के नेता उसे नास्तिक, बुद्धिहीन, पापी, धर्म विरोधी आदि कहकर उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं ! इसी वजह से हिंदू धर्म के प्रति लोगों की सोच समझ का विस्तार रुक जाता है […] - [शनि देव कैसे खुश होते हैं : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/how-shani-dev-becomes-happy/): (शोध परक लेख) प्राय: समाज में शनि की महादशा अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा बड़े भय से देखी जाती है ! साथ ही नव उदित ज्योतिष के अनुसार अब शनि की ढैया और साढ़ेसाती को भी भय से देखे जाने का प्रचलन शुरू हो गया है ! प्रश्न यह है कि शनि को इतना भय से देखा क्यों जाता है ! जबकि दूसरी तरफ शनि को न्याय का देवता भी कहा गया है ! आज मैं इसी का उत्तर देने की कोशिश करता हूं ! इसका सीधा उत्तर है कि बृहस्पति विस्तार का ग्रह है ! जिस तरह गुरु अपने शिष्य […] - [अज्ञात भय आप के विकास में बाधक है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/fear-of-the-unknown-hinders-your-growth/): प्रायः देखा जाता है कि कुछ व्यक्तियों में जन्मजात अज्ञात भय की शिकायत मिलती है ! जिसका कोई कारण नहीं होता है लेकिन व्यक्ति फिर भी लोगों से, समाज से, रिश्तेदारों से, मित्रों से, अपने टीचर या माता-पिता से अनावश्यक रूप से डरा हुआ रहता है ! कुछ माता पिता इस अज्ञात भय को बचपन में संकोच समझते हैं और प्राय: टिप्पणी करते हैं कि बच्चा संकोची स्वभाव का है ! लेकिन यह अज्ञात भय एक मनोरोग है ! जिसे मनोचिकित्सकों ने “फोबिया” नाम दिया है ! यह कई प्रकार का होता है ! लेकिन सभी का मूल कारण एक […] - [हिन्दू धर्म में दो राजकुमारों की कहानी : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/story-of-two-princes-in-hinduism/): यह हिंदुओं का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कभी विश्व को आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश देने वाला हिन्दू समाज अब मात्र दो राजकुमारों की आधी अधूरी, कपोल कल्पित कहानियों में उलझ कर रह गया है ! एक राम और दूसरा कृष्ण ! लेकिन हिंदू समाज का सनातन ज्ञान मात्र राम और कृष्ण तक सीमित नहीं है ! इसके अलावा भी और बहुत कुछ है, हिंदू समाज के पास सनातन ज्ञान के नाम पर ! किंतु कथावाचकों ने अपनी दुकान चलाने के लिए हिंदू समाज के अद्भुत ज्ञान को अपनी अधनंगी कथाओं के मुकाबले बहुत पीछे छोड़ दिया है ! आज […] - [अति धार्मिकता ही हमारे सर्वनाश का कारण है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/excessive-religiosity-is-the-cause-of-our-destruction/): यह एक कठोर सत्य है कि जब भी समाज में धर्म और भौतिकता का असंतुलन हुआ है, तब समाज अपने विनाश की ओर बढ़ गया है ! इसे दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि कोई भी समाज न तो अति भौतिकता से चल सकता है और न ही विशुद्ध धर्म के परायण से ! संसार में जीने के लिए दोनों के मध्य संतुलन होना परम आवश्यक है ! यह संतुलन प्राचीन काल में ऋषि, मुनि, मनीषी, चिंतक, विचारक आदि समाज में बनाए रखते थे ! जिनका पोषण समाज करता था ! किंतु महाभारत युद्ध के बाद […] - [राजीव दीक्षित का उतरता बुखार : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/rajiv-dixits-descending-fever/): 30 नवम्बर 2010 को राजीव दीक्षित की मृत्यु के तुरंत उपरांत वर्ष 2011-12 में हर व्यक्ति राजीव दीक्षित की फोटो लगाकर देश के अंदर स्वदेशी का नेता बन जाना चाहता था ! लेकिन इन लोगों को यह नहीं मालूम था कि राजीव दीक्षित ने स्वदेशी की अपनी जो योजना अचानक मृत्यु के पहले समाज के सामने रखी थी, वह अधूरी थी ! अर्थात उस योजना का बस एक ही पक्ष “समस्या” को समाज को सामने रखा गया था और इस आंदोलन का समाधान पक्ष पर चर्चा राजीव दीक्षित ने कभी कहीं नहीं की ! इस बीच एक भगवा व्यवसायी ने […] - [व्यापार का आधार मात्र पूंजी और योजना नहीं है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/the-basis-of-business-is-not-just-capital-and-planning/): उद्यम असफल होने के कई कारण हैं, किंतु इसमें सबसे पहला कारण यह है कि उद्यमी को यह पता ही नहीं होता है कि उसके उद्यम की दिशा सही है या गलत है ? अर्थात दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि उद्यम की शुरुआत करने वाले व्यक्ति को अनुभव की कमी यह नहीं पता होता कि जिस कार्य को वह शुरू करने जा रहा है, उस कार्य को किस दिशा में ले जाना चाहिये ! जिस दिशा में वह अपने कार्य को ले जाना चाहता है क्या समाज में लोग उस दिशा में उस के कार्य को […] - [दरिद्रता एक प्रजाति है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/poverty-is-a-species/): प्राय: लोग दरिद्रता का संबंध शिक्षा से जोड़कर देखते हैं ! जबकि अनुभव में यह आया है कि यदि दरिद्र प्रजाति का व्यक्ति शिक्षित हो भी जाये तब भी वह दरिद्र ही बना रहता है ! इस अनुभव से यह कहा जा सकता है कि दरिद्रता एक विशेष प्रजाति है ! इसका देश, काल, परिस्थिति, शिक्षा, परिवेश आदि से कोई संबंध नहीं है ! यहां हम दरिद्र प्रजाति के व्यक्तियों के कुछ लक्षण बतला रहे हैं ! जिससे इस प्रजाति के व्यक्ति की पहचान की जा सकती है ! दरिद्र प्रजाति के व्यक्ति को यह सबसे बड़ी गलतफहमी होती है […] - [ट्विटर का असली मालिक कौन है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/who-is-the-real-owner-of-twitter/): एक तरफ एलन मस्क ट्विटर जैसा प्रतिष्ठित सामाजिक संवाद का डिजिटल प्लेटफार्म खरीदते हैं और उसी समय दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह बयान आता है कि भारत को फर्जी सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए ! इन दोनों घटनाओं का एक साथ होना अपने आप में बहुत कुछ कहता है ! इसलिए इस संदर्भ में मैं भी कुछ कहना चाहता हूं ! निसंदेह एलन मस्क अमेरिका के बहु प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं ! किन्तु इनके उद्योग का आधार अमेरिका नहीं है बल्कि चायना है ! जहां पर इनके टेस्ला इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने का विश्व सबसे बड़ा […] - [क्या श्रीमद् भगवद गीता आपके चेतना के स्तर को गिराती है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/does-shrimad-bhagavad-gita-lower-your-level-of-consciousness/): जैसा कि मैंने अपनी पूर्व के अनेक लेखों में लिखा है कि वर्तमान में प्रचालन में श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिये गये उपदेश से अलग है ! आज प्रचालन में यह ईसाइयों द्वारा लिखवाई गई गीता है ! इसी गीता के प्रचार प्रसार के लिये अंग्रेजों द्वारा नियंत्रित मूल्य पर कागज उपलब्ध करवा कर एक विशेष प्रेस की स्थापना भी करवाई गयी थी ! जिसके द्वारा प्रकाशित दर्जनों दूषित ग्रन्थ आज समाज में चलन में हैं ! जो विधर्मियों को उपहास का मौका देते हैं ! इस श्रीमद्भगवद्गीता का उद्देश्य सनातन साधकों के चेतना स्तर को गिराना […] - [श्रीमद्भागवत गीता का ज्ञान कब अव्यवहारिक है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/when-is-the-knowledge-of-shrimad-bhagwat-gita-impractical/): क्या आपने कभी विचार किया कि भारत के सभी तत्व ज्ञानियों का सबसे अधिक जोर श्रीमद्भगवद्गीता पर ही है ! क्योंकि इसे भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को ऐसे समय पर दिया था, जब अर्जुन अपने जीवन का निर्णायक युद्ध लड़ने जा रहे थे ! यह अवधारणा है कि अर्जुन जो अपने क्षत्रिय कर्म को त्याग चुके थे ! वह भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिये गये श्रीमद्भागवत गीता के प्रवचन के बाद युद्ध में तत्पर ही नहीं हुए बल्कि उस युद्ध को जीतने में कृष्ण के छल और बल का मुख्य कारण भी बने ! अब प्रश्न यह है कि […] - [क्या भगवान भी एक व्यवसायिक आधार है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/is-god-also-a-business-base/): भगवान के नाम पर होने वाले 6000 करोड़ से अधिक के व्यवसाय का परिचय बतलाने की जरूरत आज किसी को नहीं है ! भारत के अंदर 12 लाख से अधिक छोटे-बड़े मंदिर, गांव गांव में भगवा लपेटकर और टीका लगाकर कर्मकांड करने वाले पंडित, बड़े-बड़े मंचों पर बैठकर भगवान का गुणगान करने वाले कथा वाचक, तो भगवान के नाम से सीधा कमा ही रहे हैं ! साथ ही पूजा में प्रयोग किये जाने वाली सामग्रीयों का उत्पादन, संग्रह और विक्रय करने वाले लाखों लोग भी भगवान के नाम पर अपना व्यापार करके जीवन यापन कर रहे हैं ! कमोवेश अगर […] - [संघर्ष एक भ्रम है : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/struggle-is-an-illusion/): प्रायः लोग सही समय पर सही निर्णय न लेने के कारण अपने आप को एक तनावपूर्ण जीवन में ढकेल लेते हैं और फिर उस तनाव से निकलने के लिए जीवन भर अतिरिक्त ऊर्जा लगाते रहते हैं ! जिसे वह लोग संघर्ष कहते हैं ! जबकि इसे आलस्य या गलत समय लिये गये निर्णय का परिणाम कहना चाहिये, संघर्ष नहीं ! ठीक इसी तरह जब कोई व्यक्ति अध्ययन और अनुभव के अभाव में कोई कार्य आरंभ करता है और कार्य की दिशा सही न होने के कारण अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता है ! तब वह व्यक्ति अपनी इस […] - [रावण द्वारा ग्रहों को तहखाने में कैद करने का रहस्य : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/the-secret-of-ravana-imprisoning-the-planets-in-the-dungeon/): जैसा कि आज का विज्ञान भी अब स्वीकार करने लगा है कि प्रत्येक ग्रह के ब्रह्मांड में गोचर करने के कारण एक विशेष तरह की तरंग उत्पन्न होती है, जो तरंग पृथ्वी से टकरा कर पृथ्वी पर पंचतत्व में असंतुलन की स्थिति पैदा करती है ! जिससे इस पृथ्वी पर विभिन्न तरह की शुभ और अशुभ घटनाएं घटती हैं ! भूकंप, अकाल, सुनामी, महामारी, जन आक्रोश (क्रांति), आदि जैसी सैकड़ों सामूहिक जनसमस्यायें इन्हीं ग्रहों की तरंगों से इस पृथ्वी पर उत्पन्न होती हैं ! जिसे अनादि काल से ज्योतिषी, मेदनी ज्योतिष के द्वारा पूर्व में ही भविष्यवाणी करके लोगों को […] - [वैश्विक आर्थिक मंदी भारतीयों के लिए एक सुनहरा अवसर : Yogesh Mishra](https://sanatangyanpeeth.in/global-economic-slowdown-a-golden-opportunity-for-indians/): जैसा कि विश्व के सभी अर्थशास्त्री घोषणा कर रहे हैं कि दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 तक पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएगी ! इस तरह की घोषणा अपने आप में यह सिद्ध करती है कि आर्थिक मंदी आती नहीं बल्कि प्रायोजित तरीके से लायी जाती है ! अब प्रश्न यह है कि पिछले 100 वर्षों में जब से पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी शक्तियों ने उद्योग धंधों के साथ लोकतंत्र का विस्तार किया तब से लगभग हर 10 से 15 वर्ष के अंतर पर पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी क्यों आ जाती है ? जबकि उद्योग घरानों […] ## Pages - [Main Hoon Na](https://sanatangyanpeeth.in/event/) - [Contact](https://sanatangyanpeeth.in/contact/): Don’t Know What To Do?Call Me Today +91 94530 92553 Not sure anyway? Book a Consultation More About Me Few words about our background At Sanatan Gyan Peeth, we don’t just read charts—we guide lives with ancient Vedic wisdom. 🌟 Guiding Lives with Authentic Jyotish & Spiritual Wisdom You can Look For their Testimonal Videos 🔱 Trust in tradition. Seek clarity. 0 Kundali Paramarsh At Sanatan Gyan Peeth, we take pride in having guided over 14 lakh individuals through accurate Kundli analyses rooted in authentic Vedic astrology. Our experience speaks through the lives we’ve touched and transformed. 0 Consultations 40,049 […] - [Classes](https://sanatangyanpeeth.in/classes/): What We Teach, No One Else Dares to — Unlock Knowledge the World Overlooks. Brahmasmi Kriya Yog Brahman Kriya Yoga is a Kriya Yoga practice that focuses on achieving the realization of oneness with Brahman, the ultimate reality or universal consciousness. It involves specific breathing techniques (Pranayama), mantra recitation, and other practices to quiet the mind and dissolve the ego. Learn More Jyotish Learn the basics of Vedic astrology—how planets, signs, and birth charts influence life. Understand dashas, yogas, and remedies to help yourself and others. Learn More Tantra Explore real Tantra—not myths. Learn about mantras, yantras, chakras, and rituals […] - [About](https://sanatangyanpeeth.in/about/): Want To Know More About Yogesh Kumar Mishra? Pandit Yogesh Kumar Mishra was born after 11 months of pregnancy on the day of Yogni Ekadashi in a Brahmin family of Prayag (Allahabad). He started Brahasmi kriya yog and meditation from the age of 7 in the Direction of (Spiritual guru) Pt. Hansraj Sharma. M.Com., L.L.B. Started working as an advocate in the Allahabad High Court in the year 1992 after completing his education. From 1997 to 2000, he worked as an advocate for the Government of India in the Supreme Court of Delhi. From the year 2001 to 2010, a […] - [Home](https://sanatangyanpeeth.in/): Welcome To Sanatan Gyan Peeth Discover the timeless wisdom of Sanatan Dharma through the profound sciences of Jyotish (Vedic Astrology) and Spiritual Research. At Sanatan Gyan Peeth, we offer personalized Kundli consultations to help guide your life with clarity and purpose. Watch Video Main Hoon Na “When you change the way you look at things, the things you look at change.” Testimonials What Our Clients Say Kundali Paramarsh 0 L Articles 0 + Consultations​ 0 + Under the guidance and blessings of my beloved Guruji, I began practicing the Brahmasmi Kriya Yoga. This sacred practice has completely transformed my life. […] - [Articles](https://sanatangyanpeeth.in/articles/) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)