नये नागरिकता बिल की ओट में विदेशी घुसबैथ बढ़ेगा ! जानिए कैसे !

लगता है भारत के राजनीतिज्ञ देश को गुलाम बना कर ही छोड़ेंगे !

वैसे तो भारत के सभी संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिये व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है किन्तु किस किस को भारत का नागरिक माना जाये इसके लिये भारतीय संविधान के अलावा एक और चोर दरवाज़ा भी बनाया गया जिसे भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 कहते हैं ! जिसमें कई बार चुपके से संशोधन कर विदेशियों को खास तौर से ईसाईयों को भारत में घुसाने का कार्य भारतीय राजनीतिज्ञों के द्वारा बड़ी शांत गति से चलता रहा है ! वर्तमान में भी सदन में एक प्रक्रिया चल रही है ” नया नागरिक बिल 2019 ” !

इसी क्रम में बतलाया जा रहा है कि नये नागरिकता बिल के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आये हुये हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख शरणार्थियों को नागरिकता मिलने में आसानी होगी ! इसके अलावा अब भारत की नागरिकता पाने के लिये 11 साल नहीं बल्कि 6 साल तक देश में रहना अनिवार्य होगा ! जिसे विधेयक को सदन में 82 के मुकाबले 293 मतों से पेश कर स्वीकृति दी गई !

विचार करने का विषय यह है कि विदेशियों को भारत में जल्दी नागरिकता देने के लिये इतनी आनन-फानन तैयारी क्यों की जा रही है ! जैसा कि पूर्व के राजनीतिक दलों को चंदा दिये जाने के संदर्भ में हुए संशोधन से पता चला है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट की धारा 138 के तहत जो राजनैतिक बांड जारी किये जाते थे, वह अब रिजर्व बैंक की जगह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जारी करेगा !

इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट की धारा 11 के तहत राजनीतिक दलों तथा चन्दा देने वाले व्यक्तियों को अब राजनैतिक बॉन्ड पर कोई भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा और चन्दादाता का भी नाम गुप्त रखा जायेगा !
इसी तरह लोकप्रतिनिधी अधिनियम की धारा 29 सी के तहत 20,000 से अधिक चंदे के संदर्भ में जो जानकारी देना आवश्यक था उसे भी अब समाप्त कर दिया गया है !

एफ.सी.आर.ए. की व्यवस्था मैं भी बड़ा फेरबदल किया गया है ! अब यदि कोई भी विदेशी कंपनी भारत के अंदर अपनी कंपनी की कोई शाखा रजिस्टर्ड करवाती है तो उस शाखा के अंतर्गत किया गया कार्य विदेशी कंपनी का कार्य नहीं माना जायेगा और न ही भारत में रजिस्टर्ड उस विदेशी कम्पनी की शाखा के अंतर्गत जो धनराशि किसी राजनैतिक दल को बतौर चन्दा दी जायेगी, उसकी कोई जांच-पड़ताल की जा सकेगी !

इसके साथ यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि पूर्व में व्यवस्था यह थी कि अधिकतम 7.5 % कोई भी कंपनी अपने लाभ का किसी भी राजनीतिक दल या अनेक राजनैतिक दलों को चन्दा दे सकती थी लेकिन अब इसकी सीमा भी समाप्त कर दी गई है ! अब कोई भी कंपनी अपने लाभ का अधिकतम कितना भी हिस्सा किसी भी राजनीतिक दल को चंदे के रूप में दे सकती है !

ध्यान रहे गत वर्ष 2017-18 में 222 करोड़ के राजनैतिक बांड में से 210 करोड़ों बांड अकेला मात्र बीजेपी को दिये गये थे जो गुप्त दान था !

यह सारी स्थितियां यह बताती है कि भारत के अंदर अब विदेशी कंपनियां अपने धन के प्रभाव से भारत की राजनीति को बहुत शीघ्र ही प्रभावित करेंगी और जो विदेशों में रहने वाले लोग भी मात्र 6 वर्ष के अंदर भारत में आकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर भारत की राजनीति में सीधा हस्तक्षेप करेंगे और भारत की सत्ता पर काबिज हो जायेंगे !

ऐसी स्थिति में वह दिन दूर नहीं जब वर्ष 2029 के चुनाव में विदेशी मूल के लोग भारत के नागरिक के रूप में भारत की राजनीति में प्रवेश करेंगे और भारत की सत्ता 2034 आते-आते तक विदेशियों के हाथ में चली जायेगी !

यह स्थिति देश के लिये बहुत बड़ा खतरा है जिसे मैं वर्ष 1996 में ही भांप लिया था और अपनी पहली पुस्तक लिखी थी “भारत की आजादी एक धोका है !” जिसे पढ़ कर राजीव दीक्षित ने अनेक वक्तव्य दिये थे ।

आज भी इसके लिये आगाह होना चाहिये और चिंतन करना चाहिये कि क्या भारत की राजनीति या भारत के नेता भारत को सही दिशा में ले जा रहे हैं या हम पुन: व्यवस्थित गुलामी की ओर बढ़ चुके हैं !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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