ब्राह्मणों का विरोध क्यों

परशुराम जयंती पर विशेष लेख जब किसी भी समाज के प्रबुद्ध चिन्तक वर्ग के तर्क, शास्त्र और वास्तविक ‘तत्व बोध’ का विरोध शुरू हो जाये तो उस राष्ट्र को नष्ट होने से कोई नहीं बचा सकता है ! जहां योजना…

परशुराम जयंती पर विशेष लेख जब किसी भी समाज के प्रबुद्ध चिन्तक वर्ग के तर्क, शास्त्र और वास्तविक ‘तत्व बोध’ का विरोध शुरू हो जाये तो उस राष्ट्र को नष्ट होने से कोई नहीं बचा सकता है ! जहां योजना…

आज यह चिंतन का विषय है कि “आदिपुरुष” जैसे फिल्मों से किन लोगों का अस्तित्व खतरे में आ गया है ! इसका यदि वर्गीकरण किया जाये, तो सबसे पहला नाम उन वैष्णव भक्तों का आता है, जिन्होंने महर्षि वाल्मीकि की…

30 नवम्बर 2010 को राजीव दीक्षित की मृत्यु के तुरंत उपरांत वर्ष 2011-12 में हर व्यक्ति राजीव दीक्षित की फोटो लगाकर देश के अंदर स्वदेशी का नेता बन जाना चाहता था ! लेकिन इन लोगों को यह नहीं मालूम था…

यह भारतीयों का दुर्भाग्य रहा है कि भारत के प्राकृतिक रूप से संसाधन संपन्न होने के बाद भी भारतीय लोग स्व प्रेरणा से अपने को कभी संपन्न नहीं बना चाहे हैं ! कुछ दूरदर्शी राजाओं के शासनकाल को यदि छोड़…

भारतीय शास्त्रीय संगीत पूर्णतया वैज्ञानिक है ! हमारे ऋषियों, मुनियों, मनीषियों, चिंतकों ने मानव चित्त, मन, बुद्धि, संस्कार और अहंकार पर गहन शोध करने के बाद, उनका ध्वनि से संबंध स्थापित किया और यह निष्कर्ष निकाला कि विभिन्न तरह की…

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जिनका काम ही दूसरों की आलोचना करना होता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए कि चाहे कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो, उद्योगपति हो, धार्मिक व्यक्ति हो, या अपने जीवन निर्वाह के लिए…

जब किसी भी समाज में धन और सुविधाएं मनुष्य के ज्ञान और विवेक से अधिक हो जाती हैं, तो वह समाज विकृति की ओर बढ़ने लगता है ! भारतीय समाज ने भी यह दौर देखा है ! चोल वंश के…

(सनातन धर्म विरोधी अम्बेडकरवादी इस पोस्ट से दूर रहें) डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित महू में 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। प्राय: सभी अंबेडकर भक्त यह बतलाते हैं कि भीमराव अंबेडकर के पास…

आज के युग में पूरी दुनिया में वस्तु विनिमय का माध्यम अब मात्र धन रह गया है और धन अर्थात मुद्रा का मूल्य नियंत्रित करने का अधिकार मात्र सरकार के पास है ! अर्थात कितने धन से अब कितनी वस्तु…

मानवता सतत विकासशील रही है ! इसी वजह से मनुष्य अन्य जीव-जंतुओं के मुकाबले क्रमशः आधुनिक और विकसित होता चला गया ! जब किसी प्रजाति में निरंतर विकास होगा, तो स्वाभाविक है कि उस प्रजाति की जीवनशैली भी निरंतर परिवर्तित…