Category Astrology

ज्योतिष में महालक्ष्मी योग

मन की निर्मलता और शरीर की प्रचंड ऊर्जा का सही दिशा में मिलन ही वह वास्तविक महालक्ष्मी योग है, जो मनुष्य को पूर्णतः स्वावलंबी और अनंत संपदा का स्वामी बनाता है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को हमारे मन, संवेदना और…

अदम्य साहस और प्रज्ञा का चरम उत्कर्षीय ग्रह योग

जिस मनुष्य के भीतर उद्यम का अदम्य साहस और विचार की निर्मलता एक साथ जन्म लेते हैं, वही अपने पुरुषार्थ से समाज का सच्चा उदय करता है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम का कारक माना…

ज्योतिष में संतान प्राप्ति के सात अचूक नियम

वैदिक ज्योतिष में वंश वृद्धि और संतान सुख का विचार मुख्य रूप से कुंडली के पंचम भाव, इसके स्वामी (पंचमेश) और नैसर्गिक कारक देवगुरु बृहस्पति से किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार संतान प्राप्ति के सात अचूक नियम निम्नलिखित हैं…

ज्योतिष में तलाक के प्रबल योग

ज्योतिष में विवाह और वैवाहिक जीवन का विचार मुख्य रूप से कुंडली के सप्तम भाव, सप्तमेश (सप्तम भाव का स्वामी), और विवाह के कारक ग्रह, पुरुष के लिए शुक्र और स्त्री के लिए बृहस्पति से विचार किया जाता है। जब…

क्या हम महाविनाश की ओर बढ़ रहे हैं

( ज्योतिषीय विश्लेषण ) ज्योतिषीय गणनाओं से ऐसा आभास हो रहा है, कि समस्त मानवता महाविनाश की ओर बढ़ रही है ! ज्योतिष के अनुसार मानवता की रक्षा तीन दिव्य ऊर्जा मिलकर करती हैं ! पितृ गुरु और ईश्वर !…

कालसर्प योग एक भ्रम

प्राय: “कालसर्प योग” का अर्थ यह माना जाता है कि यदि कुंडली में राहु और केतु के एक तरफ सभी ग्रह आ जाते हैं, तो उस कुण्डली को कालसर्प योग वाली कुण्डली कहा जाता है ! यह योग व्यक्ति के…

राहुकाल की गणना के सिधान्त : Yogesh Mishra

दैनिक ज्योतिष में राहुकाल का विशेष महत्व है ! यह इसे राहुकालम भी कहा जाता है ! यह प्रतिदिन में एक विशेष मुहूर्त लगभग 90 मिनट होता है ! यह नित्य स्थान और तिथि के अनुसार अलग अलग होता है…

तांत्रिक हमले में नाड़ी की गति तेज क्यों हो जाती है : Yogesh Mishra

प्रत्येक व्यक्ति के शरीर के संचालन का अपना एक निश्चित क्रम होता है ! हमारे शरीर में बहुत से ऊर्जायें प्रत्यक्ष्य और अप्रत्यक्ष्य रूप में निवास करती हैं जो शरीर संचालन के लिये विभिन्न तरह के रसायनों का निर्माण करते…

ग्रह हमारे साथ कैसे काम करते हैं : Yogesh Mishra

एक वैज्ञानिक विश्लेषण आम ज्योतिषियों की अवधारणा है कि व्यक्ति के जन्म के समय ग्रह, पृथ्वी के किस दिशा से पृथ्वी पर अपना प्रकाश कैसा प्रकाश डालते हैं ! उसी के आधार पर व्यक्ति के जीवन की घटनायें घटती हैं…

राहुकाल की गणना के सिधान्त : Yogesh Mishra

दैनिक ज्योतिष में राहुकाल का विशेष महत्व है ! यह इसे राहुकालम भी कहा जाता है ! यह प्रतिदिन में एक विशेष मुहूर्त लगभग 90 मिनट होता है ! यह नित्य स्थान और तिथि के अनुसार अलग अलग होता है…