Dharmik Mahtav

भारतीय गोवंश ही विश्व में सर्वश्रेष्ठ है : Yogesh Mishra

प्रागैतिहासिक भूविज्ञान के विद्वान हमें अवगत करा चुके हैं कि हमारी पृथ्वी में जीवनस्वरूपों के उद्भव व विकास क्रम के अंतर्गत गोवंश के आदिकालीन पूर्वज ‘औरक्स’ की जन्मस्थली (18 लाख वर्ष पूर्व) भारत है, जहां उसके प्रथम प्रतिनिधि ‘बास प्लैनिफ्रन्स’ ने 15 लाख वर्ष पूर्व अपना पहला कदम रखा था …

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सनातन धर्म कथायें मिथ अर्थात काल्पनिक झूठ नहीं हैं : Yogesh Mishra

मिथकीय नाटक के रूप में प्रस्तुत की जाने वाली धर्म कथा वास्तव में काल्पनिक झूठ नहीं हैं ! असल में मिथ (Myth) एवं मायथोलोजी (Mythology) मूलतः ग्रीक शब्द है ! जो पौराणिक परिकल्पनात्मक कथाओं का बोध करवाता है ! ग्रीक में ‘मुथोस’ तथा लैटिन का ‘मिथास’ मिथ शब्द की उत्पत्ति …

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तिब्बत में था यमलोक : Yogesh Mishra

प्राचीन काल में तिब्बत को त्रिविष्टप भी कहते थे ! यह अखंड भारत का ही हिस्सा हुआ करता था ! कालांतर में सोने के लालच में तिब्बत को चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है ! तिब्बत में दारचेन से 30 मिनट की दूरी पर है यमराज के राज्य …

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क्यों ब्रह्मचर्य ही सही है ! : Yogesh Mishra

आप जानते हैं कि इंटरनेट पर हमें जो अश्लील फिल्में दिखाई जाती हैं ! इन फिल्मों को बनाने और प्रसारण करने का सारा खर्चा कंडोम, कृत्रिम लिंग, सेक्स डॉल, उत्तेजक औषध आदि बनाने वाली कंपनियां और पूरे विश्व में नशे का धंधा करने वाले बड़े-बड़े ड्रग माफिया उठाते हैं ! …

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खजुराहो के मंदिर का आध्यात्मिक रहस्य : Yogesh Mishra

आज से 2000 साल पहले जब पूरे के पूरे आर्यावर्त में बौद्ध धर्म का प्रभाव इतना अधिक बढ़ गया था कि सनातन जीवन शैली की आश्रम व्यवस्था का अधिकांश लोग परित्याग करके बौद्ध भिक्षु बन बौद्ध विहारों में रमण करने लगे थे ! पूरी की पूरी सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था …

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विश्व वैदिक संस्कृति के विकास में सरस्वती नदी का योगदान : Yogesh Mishra

सरस्वती नदी पौराणिक हिन्दु ग्रंथों तथा ऋग्वेद में वर्णित मुख्य नदियों में से एक है ! ऋग्वेद के नदी सूक्त के एक श्लोक (10.75 ) में सरस्वती नदी को यमुना के पूर्व और सतलुज के पश्चिम में बहती हुए बताया गया है ! उत्तर वैदिक ग्रंथों जैसे ताण्डय और जैमिनिय …

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पुराण वेदों का व्याख्यातिक स्वरूप है ! : Yogesh Mishra

वैसे आर्य समाजी पुराणों की बहुत आलोचना करते हैं ! दयानंद सरस्वती ने तो पुराणों के विषय में यहां तक कहा था कि “पुराणों की रचना लोगों ने भांग के नशे में की थी !” इसलिये आर्य समाजी यह मानते हैं कि हिंदू धर्म में पुराणों का कोई औचित्य नहीं …

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आखिर क्यों बजाया जाता है हिन्दू धर्म में शंख : Yogesh Mishra

वैसे तो कोरोना भागने के चक्कर में हमने देश भर में थालियाँ पीट डालीं ! कुछ उत्साही लोगों ने थालियों के साथ-साथ शंख भी बजाया ! जिसका विधर्मियों ने खूब जम के उपहास किया ! तब मेरे मन में एक विचार आया कि सनातन संस्कृति में शंख क्यों बजाया जाता …

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आधुनिक संस्कृत व्याकरण के रचयिता मात्र पाणिनि नहीं थे ! : Yogesh Mishra

आज संस्कृत भाषा के विषय में हमारे पास कई मिथ्या सूचनायें हैं ! उनमें से सब से प्रसिद्ध सूचना यह है कि संस्कृत भाषा के व्याकरणकर्ता कौन थे ? यदि कोई आप से कहे कि महर्षि पाणिनि संस्कृत के व्याकरण रचयिता है तो आप समझ सकते हैं कि वह व्यक्ति …

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सनातन शास्त्र अध्ययन अत्यंत रहस्यपूर्ण हैं : Yogesh Mishra

सनातन शास्त्रों का अध्ययन और अध्ययन उपरांत उसका मनन, चिंतन और व्याख्या यह सभी अत्यंत रहस्य पूर्ण प्रक्रिया है ! जिसे सामान्य सांसारिक बुद्धि से नहीं समझा जा सकता है क्योंकि जब व्यक्ति सांसारिक चिंतन वाला होता है ! तब उसमें आध्यात्मिक ऊर्जा को समझने का सामर्थ नहीं होता है …

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