शैव जीवन दर्शन के चार कदम

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :– पहला कदम :– दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा। दूसरा कदम :– दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द…

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :– पहला कदम :– दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा। दूसरा कदम :– दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द…

शैव जीवन दर्शन मानता है कि “हर रोग अवचेतन का प्रगट स्वरूप है” ! अर्थात हमारे मन और शरीर के मध्य एक गहरा और अविभाज्य संबंध है। अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इस अवधारणा को ‘मनोदैहिक रोग’ के रूप में…

कुलार्णव तंत्र के नौवें उल्लास के आधार पर माता पार्वती भगवान शिव से कहती हैं :– “जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः। पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः॥” आपके द्वारा उद्धृत यह पंक्तियाँ सनातन धर्म के ‘अद्वैत वेदांत’ और…

अभी बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर जी ने राजनीतिक कारणों से रामचरितमानस पर कुछ टिप्पणी कर दी और उसका परिणाम यह हुआ कि पूरे भारत का वैष्णव समाज शिक्षा मंत्री के टिप्पणी का विरोध करने लगा ! अब प्रश्न या…

अमेरिका की निवासी महिला केर्लिन फोर्ट जो कि एक व्यवसायिक फोटोग्राफर हों ! उनको माया सभ्यता के नागरिकों से वर्ष 2001 में एक 15 किलो का क्रिस्टल कपाल मिला है ! उस महिला ने इस क्रिस्टल कपाल का नाम आइंस्टाइन…

वैष्णव जीवन शैली में धर्म के नाम पर लूट की अलग-अलग दुकान चलाने के लिए दर्जनों देवी देवताओं का निर्माण वैष्णव धर्माचार्यों ने किया है ! और अलग-अलग देवी-देवताओं को अलग-अलग मानवीय इच्छाओं की पूर्ति करने का पर्याय बना दिया…

वैष्णव जीवन शैली में भक्त जीवन भर गुरु से, भगवान से, प्रकृति से याचना करते हुए ही जीवन व्यतीत करता है ! उसे सदैव प्रतिक्षण कुछ न कुछ चाहिए ही होता है ! किसी को पुत्र की कामना होती है,…

मनुष्य के जीवन में हर तरह की हर समस्या का कारण कृत्रिम जीवन पद्धति है ! जो हमें वैष्णव जीवन शैली से प्राप्त हुई है ! आज साम्राज्यवादी सोच भी इसी कृत्रिम जीवन पद्धति का विकसित रूप है ! कृत्रिम…

वैष्णव धर्म ग्रंथों के अनुसार भारत में जब वैष्णव जीवन शैली अपने पूर्ण प्रसार पर थी ! तब दो महायुद्ध हुए ! एक राम रावण का युद्ध और दूसरा महाभारत का धर्म युद्ध और यह दोनों ही युद्ध धर्म और…

मनुष्य को ईश्वर ने इस पृथ्वी पर अपनी स्वाभाविक अवस्था में जीवन निर्वाह के लिए भेजा था ! जिससे मनुष्य प्रकृति के रहस्य को समझते हुए अपना आंतरिक उत्थान कर सके ! लेकिन हम लोगों ने अपने सुविधाओं की तलाश…