जानिए हिन्दू धर्म मे भिन्न-भिन्न मालाओं का क्या महत्व है ? कौन सी माला किसके लिए पहननी चाहिए । Yogesh Mishra

मालाओं की उपयोगिता
स्फटिक की माला- देवी जाप के लिए स्फटिक माला से मंत्र शीघ्र सिद्ध हो जाता है। आर्थिक स्थिति में सुधार आती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों को व क्रोध शान्ति के लिए यह माला अचूक है।

सफेद चन्दन की माला- इसका उपयोग शान्ति पुष्टि कर्मों व श्री राम, विष्णु व अन्य देवता की उपासना में होता है। इसके धारण करने से शरीर में ताजगी का संचार होता है।

तुलसी की माला- विष्णु प्रिय तुलसी की माला विष्णु, राम, व कृष्ण जी की उपासना हेतु सर्वोत्तम है। शरीर व आत्मा की शुद्धि के लिए धारण करना उत्तम माना जाता है।

मूंगे की माला- मंगल ग्रह की शान्ति के लिए धारण करना उपयुक्त है व हनुमान जी की साधना के लिए सर्वोत्तम है।

हकीक की माला- भाग्य वृद्धि व सौभाग्य प्राप्ति के लिए इसका विशेष महत्व है। इसमें भूत-प्रेत बाधा व दुर्भाग्य और कर्इ बुराइयों को नाश करने की विशेष शाक्ति होती है। मुसीबत आने पर यह टूट जाती है।

स्फटिक व रुद्राक्ष माला- रुद्राक्ष व स्फटिक माला शिवशक्ति का प्रतीक है। रुद्राक्ष निम्न रक्तचाप को व स्फटिक उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर समन्वय बनाए रखता है। इस माला पर शिव व शक्ति दोनों के जाप किये जाते हैं।

रुद्राक्ष व सोने के दानों की माला- रुद्राक्ष के साथ सोने के दाने रुद्राक्ष की शक्ति, शान्ति व समृद्धि में वृद्धि करते हैं। सोना सबसे शुद्ध धातु है। धारक को रुद्राक्ष के गुणों के साथ-साथ शान्ति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मोती की माला- मोती की माला भाग्य बढ़ाती है, पुत्र प्राप्ति के लिए उत्तम है। मानसिक शान्ति, कर्क राशि, लग्न व पारिवारिक दु:ख में लाभदायक है।
इसके अलावा टाइगर, लाजव्रत, गारनेट, फिरोजा, मरगज आदि की माला अपने राशि व ग्रह के अनुसार आपको कौन सा माला ठीक रहेगा इसकी सलाह लेकर धारण कर सकते हैं

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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