मोटीवेशनल स्पीच, धंधा है जो गंदा है : Yogesh Mishra

प्राय: मोटीवेशनल स्पीच सुनता कौन है जो दुनियांदारी से अनभिज्ञ है और मोटीवेशनल स्पीच देता कौन है ? जो खुद कभी किसी धंधे में नहीं रहा है !

अर्थात मोटीवेशनल स्पीच का धंधा ठीक उस धार्मिक वैष्णव कथा वाचन जैसा होता है, जो भगवान के होने का दावा तो करता है, पर उसने स्वयं कभी किसी भगवान को न तो देखा न ही अनुभूत किया है ! वह बस सिर्फ भगवान के नाम पर समाज को मुर्ख बना कर अपने लाभ के लिये ठगता है !

ठीक यही स्थिती मोटीवेशनल स्पीकर की होती है ! वह बातें तो बहुत अच्छी-अच्छी, रोचक, उत्साह वर्धक करता है पर व्यावहारिक रूप से वह सभी बातें अव्यवहारिक होती हैं ! जो नितांत झूठ या अर्ध सत्य पर टिकी होती हैं !

जिन्हें अज्ञानता में अपनाकर दुनियांदारी से अनभिज्ञ व्यक्ति या तो अपना घर मकान बैंक को गिरवीं रख कर नष्ट हो जाता है या फिर अव्यवहारिक मार्ग अपनाने से असफल होकर वह व्यक्ति परिवार और रिश्तेदारों की निगाह में गिर कर सामाजिक रूप से स्वयं अपनी हत्या कर लेता है !

हर देश की व्यावसायिक परिस्थिती, विधिक और सामाजिक स्थिती अलग अलग होती है, इसलिये एक देश का उदाहरण दूसरे देश में देना समाज को धोखा देना है ! जिस मार्ग पर विश्वास करके व्यवहारिकता से युवा चल तो पड़ता है और अपना घर मकान आदि गिरवीं रख कर लोन लेकर बहुत उत्साह के साथ अपना स्टार्टप शुरू तो करता है पर बहुत जल्द ही वह भ्रष्टाचार की व्यवस्था में फंस कर नष्ट हो जाता है ! तब उसका मार्गदर्शन करने कोई मोटीवेशनल स्पीकर नहीं आता है !

भारत में 98% स्टार्टप अव्यवहारिक ज्ञान की वजह से मात्र तीन साल के अन्दर ही बंद हो जाते हैं और युवाओं की सिविल बिगाड़ कर उनका आर्थिक जीवन नष्ट कर देते हैं ! जिससे वह जीवन में कभी भी पुन: स्टार्टप शुरू करने लायक नहीं बचते हैं और पूरी जिन्दगी प्राश्चित की आग में जलते रहते हैं !

इसलिये युवाओं से मेरा अनुरोध है कि मात्र किसी मोटीवेशनल स्पीकर का भाषण सुन कर बिना किसी अनुभव के कभी कोई स्टार्टप अपनी घर सम्पत्ति लोन पर रख कर शुरू मत कीजिये ! नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा !

सदैव किसी भी स्टार्टप से पहले उस तरह के किसी पूर्व के स्थापित व्यवसाय में कम से कम तीन वर्ष का समय जरुर दीजिये और अनुभव के आधार पर दो प्रमोशन अवश्य लीजिये तब अपना निजी स्टार्टप शुरू कीजिये वर्ना जल्दबाजी में अनुभव के आभाव में आप बड़ी समस्या में फंस सकते हैं !
और यह मानिये कि सफलता के लिये अनुभव का कोई भी शार्टकट नहीं है ! चाहे कोई भी मोटीवेशनल स्पीकर कुछ भी भाषण देता रहे क्योंकि उसका उद्देश्य आपको सफल बनाना नहीं है बल्कि सफल का अव्यवहारिक ख्वाब दिखा कर आपको ठगना है या फिर अपना काम निकलना है !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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