धर्म के लाशों को ढ़ोते धार्मिक गिरोह : Yogesh Mishra

अनादि काल से सृष्टि में एक ही धर्म रहा है ! वह प्रकृति का धर्म ! जो निरंतर मानव कल्याण के अनुरूप प्रकृति की तरह परिवर्तनशील रहा है ! किंतु दुर्भाग्य यह रहा कि मनुष्य ने प्राकृतिक धर्म को छोड़ कर मानव निर्मित धर्मों को प्राकृतिक धर्म के विकल्प रूप में जानने और मनाने लगा !

आज इस्लाम मात्र 14 सौ साल पुराना मानव निर्मित धर्म है, इसाई 2000 साल पुराना, बौद्ध ढाई हजार वर्ष पुराना, यहूदी 3000 वर्ष पुराना आदि आदि ! इसी तरह इतिहास के अनंत क्रम में आज लगभग 14 सौ से अधिक धर्म समय समय पर पैदा हुये, विकसित हुये और विलुप्त हो गये !

आज भी इसी तरह 400 से अधिक धर्म मनुष्य को नियंत्रित कर रहे हैं ! कुछ बुद्धिहीन, तार्किक और बुद्धि विलासी लोग धर्म और संप्रदाय को अलग-अलग नाम देते हैं ! पर कुल मिलाकर यह सब मानवता के दुश्मन हैं !

यह सृष्टि निरंतर प्रगतिशील और परिवर्तनशील है अत: कोई भी एक लिखित या मौखिक सिद्धांत मनुष्य का लम्बे समय तक कल्याण नहीं कर सकता है ! जब तक कि धर्म देश काल परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन शील न हो !

हम भारतीयों की मानसिकता पुराने से चिपके रहने की है ! पुराना मंदिर, पुराना वृक्ष, पुराना महल, पुराने ग्रंथ, पुराने देवी-देवता आदि आदि ! इनके प्रति भारतीयों का जो मोह है वहीं हमारी दरिद्रता, गरीबी, लाचारी, बेचैनी का कारण है और इसी वजह से सारी क़ाबलियत रखते हुये भी हम समस्त विश्व से भीख मांगने को मजबूर हैं !

यदि भारत मानव निर्मित धार्मिक मान्यताओं को त्याग कर ईश्वरीय मान्यताओं को प्राथमिकता देते हुए विज्ञान के साथ मिला कर भविष्य की ओर उन्मुख हो जाये तो भारत आज पुन: सोने की चिड़िया बन सकता है और विश्व को नियंत्रित कर सकता है !

विश्व में जितने भी बड़े बदलाव हुए हैं, वह सभी विज्ञान की मदद से संभव हैं !

भारत की वर्तमान शिक्षा पद्धति ने मनुष्य के विचारों में ऐसा घुन लगाया कि न तो अब भारत युवा भारत की सरजमी के प्रति वफादार रहा और न ही वह भविष्य को ही देख पा रहा है ! इसलिए व्यक्ति को अब देश काल परिस्थिति के अनुसार मानव निर्मित धार्मिक सिद्धन्तों में परिवर्तन के लिए नये सिरे से सोचना होगा !

परन्तु आज धर्म के ठेकेदारों द्वारा जो मानव निर्मित धर्म की सड़ी गली लाश को ढ़ोया जा रहा है, उसे तत्काल दफनाना होगा, जलाना होगा वरना इसके बदबू से मानवता खुद व खुद डर कर मर जाएगी !

इसीलिये यथा स्थितीवादी मानव निर्मित कृतिम धर्म से परिवर्तनशील प्राकृतिक धर्म ज्यादा क्षेष्ठ है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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