शैव सम्प्रदाय का वास्तविक इतिहास जानियें ! Yogesh Mishra

गोवर्धन पीठाधीश्वर पुरी शंकराचार्य महाभाग निश्चलानंद सरस्वती जी कहते हैं वैष्णव , शैव, शाक्त ,गाणपत्य और सौर ये पांच तरह के सनातनी हैं जो कि क्रमशः विष्णु , शिव , शक्ति, गणपति और सूर्य के उपासक होते हैं ये अपने उपास्य को ईश्वर तथा अन्य चारों को देवता मानकर उनकी आराधना करते हैं !

अतः शैव वो हैं तो शिव को ईश्वर था अन्य को देवता मानते हैं और वैष्णव वो हैं जो विष्णु को ईश्वर और अन्य समस्त को देवता मानते हैं !

भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं ! शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं ! महाभारत में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शैव (ii) पाशुपत (iii) कालदमन (iv) कापालिक ! शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं ! 12 रुद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए !

शैव धर्म से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य:

(1) भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव और शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहा जाता है !

(2) शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है !

(3) ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है !

(4) अथर्ववेद में शिव को भव, शर्व, पशुपति और भूपति कहा जाता है !

(5) लिंगपूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है !

(6) महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है !

(7) वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है: (i) पाशुपत (ii) काल्पलिक (iii) कालमुख (iv) लिंगायत

(7) पाशुपत संप्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन संप्रदाय है ! इसके संस्थापक लवकुलीश थे जिन्‍हें भगवान शिव के 18 अवतारों में से एक माना जाता है !

(8) पाशुपत संप्रदाय के अनुयायियों को पंचार्थिक कहा गया, इस मत का सैद्धांतिक ग्रंथ पाशुपत सूत्र है !

(9) कापलिक संप्रदाय के ईष्ट देव भैरव थे, इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र शैल नामक स्थान था !

(10) कालामुख संप्रदाय के अनुयायिओं को शिव पुराण में महाव्रतधर कहा जाता है ! इस संप्रदाय के लोग नर-पकाल में ही भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म मलते थे !

(11) लिंगायत समुदाय दक्षिण में काफी प्रचलित था ! इन्हें जंगम भी कहा जाता है, इस संप्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते थे !

(12) बसव पुराण में लिंगायत समुदाय के प्रवर्तक वल्लभ प्रभु और उनके शिष्य बासव को बताया गया है, इस संप्रदाय को वीरशिव संप्रदाय भी कहा जाता था !

(13) दसवीं शताब्दी में मत्स्येंद्रनाथ ने नाथ संप्रदाय की स्थापना की, इस संप्रदाय का व्यापक प्रचार प्रसार बाबा गोरखनाथ के समय में हुआ !

(14) दक्षिण भारत में शैवधर्म चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव और चोलों के समय लोकप्रिय रहा !

(15) नायनारों संतों की संख्या 63 बताई गई है ! जिनमें उप्पार, तिरूज्ञान, संबंदर और सुंदर मूर्ति के नाम उल्लेखनीय है !

(16) पल्लवकाल में शैव धर्म का प्रचार प्रसार नायनारों ने किया !

(17) ऐलेरा के कैलाश मदिंर का निर्माण राष्ट्रकूटों ने करवाया !

(18) चोल शालक राजराज प्रथम ने तंजौर में राजराजेश्वर शैव मंदिर का निर्माण करवाया था !

(19) कुषाण शासकों की मुद्राओं पर शिंव और नंदी का एक साथ अंकन प्राप्त होता है !

(20) शिव पुराण में शिव के दशावतारों के अलावा अन्य का वर्णन मिलता है ! ये दसों अवतार तंत्रशास्त्र से संबंधित हैं: (i) महाकाल (ii) तारा (iii) भुवनेश (iv) षोडश (v) भैरव (vi) छिन्नमस्तक गिरिजा (vii) धूम्रवान (viii) बगलामुखी (ix) मातंग (x) कमल

(21) शिव के अन्य ग्यारह अवतार हैं: (i) कपाली (ii) पिंगल (iii) भीम (iv) विरुपाक्ष (v) विलोहित (vi) शास्ता (vii) अजपाद (viii) आपिर्बुध्य (ix) शम्भ (x) चण्ड (xi) भव

(22) शैव ग्रंथ इस प्रकार हैं: (i) श्‍वेताश्वतरा उपनिषद (ii) शिव पुराण (iii) आगम ग्रंथ (iv) तिरुमुराई

(23) शैव तीर्थ इस प्रकार हैं: (i) बनारस (ii) केदारनाथ (iii) सोमनाथ (iv) रामेश्वरम (v) चिदम्बरम (vi) अमरनाथ (vii) कैलाश मानसरोवर

(24) शैव सम्‍प्रदाय के संस्‍कार इस प्रकार हैं: (i) शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते हैं ! (ii) इसके संन्यासी जटा रखते हैं ! (iii) इसमें सिर तो मुंडाते हैं, लेकिन चोटी नहीं रखते ! (iv) इनके अनुष्ठान रात्रि में होते हैं ! (v) इनके अपने तांत्रिक मंत्र होते हैं ! (vi) यह निर्वस्त्र भी रहते हैं, भगवा वस्त्र भी पहनते हैं और हाथ में कमंडल, चिमटा रखकर धूनी भी रमाते हैं ! (vii) शैव चंद्र पर आधारित व्रत उपवास करते हैं ! (viii) शैव संप्रदाय में समाधि देने की परंपरा है ! (ix) शैव मंदिर को शिवालय कहते हैं जहां सिर्फ शिवलिंग होता है ! (x) यह भभूति तीलक आड़ा लगाते हैं !

(25) शैव साधुओं को नाथ, अघोरी, अवधूत, बाबा,औघड़, योगी, सिद्ध कहा जाता है !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

 -: सम्पर्क :-
-090 444 14408
-094 530 92553

Check Also

संबंधों के बंधन का यथार्थ : Yogesh Mishra

सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करते करते मनुष्य कब संबंधों के बंधन में बंध जाता है …