शिक्षित गरीबी से कैसे निपटें : Yogesh Mishra

अंग्रेजों द्वारा स्थापित किये गये स्कूलों का एक मात्र उद्देश्य था कि अंग्रेज सरकार के लिए बौद्धिक मजदूर पैदा करना ! जिनसे अंग्रेज कानून, तकनीक, प्रशासन सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में अपने लाभ के लिये कार्य ले सकें !

अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई इस शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य कभी भी यह नहीं था कि व्यक्ति में धन की समझ पैदा की जाये ! जिससे व्यक्ति गरीबी से बाहर निकल सके !

आज भी हम लोग अंग्रेजों की इस विनाशकारी शिक्षा पद्धति का अनुकरण करके तरह-तरह की डिग्रियां तो प्राप्त कर लेते हैं और कई भाषाओं के ज्ञाता हो जाते हैं ! लेकिन धन के विषय में हमारी समझ अविकसित ही रह जाती है !

जिससे पूरे जीवन अच्छी पढ़ाई करने के बाद भी परिश्रम के साथ मेहनत करके हम गरीबी ही रह जाते हैं ! यही अधूरा ज्ञान आज युवाओं के बेरोजगारी और अवसाद का कारण है !

हमारे यहाँ निरंकुश शिक्षण संस्थाएं युवाओं के माता-पिता से मोटा पैसा वसूल कर उन्हें डिग्री तो दे देती हैं ! लेकिन न तो उन युवाओं में कोई का प्रतिभा विकसित हो पाती है और न ही धन की समझ !

इसीलिए आपने देखा होगा कि बहुत से उच्च शिक्षा प्राप्त युवा अपने जीवन निर्वाह के लिए छोटे-छोटे कार्य करने को मजबूर हो जाते हैं !

जिस संदर्भ में सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक श्री योगेश कुमार मिश्र एक विशेष सत्र युवाओं के लिए आरंभ करने जा रहे हैं ! जिसमें व्यक्ति में प्रतिभा के निखार के साथ धन की समझ किस तरह विकसित की जाये इस विषय पर विशेष संवाद होगा !

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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