क्या भारत गहरे बौद्धिक षडयंत्र की चपेट में है : Yogesh Mishra

बौद्धिक षड्यंत्र एक विश्व योजनाकारों के बुद्धि का खेल है ! जो अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये व्यक्ति के सोचने और समझने के तरीके को बदल देता है ! इसके लिये विश्व स्तर पर सभी बड़े-बड़े विकसित देशों में बौद्धिक षड्यंत्रकारों का एक पैनल होता है ! जिसका कार्य ही यह होता है कि शत्रु देश के नागरिकों के सोचने समझने के तरीके को बदल दिया जायह ! जिससे उस देश के नागरिकों का अपने शासन सत्ता के प्रति विश्वास खत्म हो जायह ! इसके लिये वह लोग टी.वी. चैनल, न्यूज़ पेपर, सोशल मीडिया, देश व्यापी गोष्ठी, बैठक व अन्य पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लेते हैं !

और यह मानव समाज में सदैव से होता चला आ रहा है ! इस तरह की साजिश का सिद्धांत यह है कि इन्हें रचने वाले कई लोग खुद अपनी पहचान समाज में “सच की खोज” करने वाले के तौर पर रखते हैं ! वह लोग अक्सर किसी व्यापक जन आंदोलन का हिस्सा होते हैं ! जिससे यह माना जाता है कि वह स्वतंत्र खयालों वाले व्यक्ति हैं ! उनमें सच को कहने व जानने के लिये पर्याप्त साहस है ! वह साहसी गुप्तचरों की तरह काम करते हैं ! वह शक्तिशाली समूहों का खुलासा करते रहते हैं ! जो समाज का ध्यान बराबर उनकी तरफ बनायह रखता है ! जो गोपनीयता में दुर्भावनापूर्ण नतीजों को हासिल करने के लिये नितन्तर किसी दूसरे राष्ट्र या समूह के इशारे पर कार्य करते हैं !

यह सब लोग उस समय और भी अधिक महत्‍वपूर्ण हो जाते हैं ! जब देश में लॉकडाउन जैसे हालत होते हैं ! लोगों का ज्‍यादातर समय सोशल मीडिया पर गुजर रहा होता है ! इंटरनेट की सुलभता के कारण जनमत परिवर्तन के लिये यह लोग समाज के हाशियों पर खड़े महत्वाकांक्षी लोगों को अपने साथ मिला लेते हैं ! हमखयाली व्यक्तियों की खोज करते हैं और उनसे बातचीत कर उन्हें शासन सत्ता के विरुद्ध खड़ा करते हैं ! अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये यह लोग व्यक्ति के साथ साथ संस्‍थाओं को भी अपने भरोसे में लेते हैं और पूरे देश में एक अज्ञात भय और अविश्वास का वातावरण बना देते हैं !
यह लोग किसी भी राष्ट्र के नागरिकों की दृष्टि और सोचने समझने के दृष्टिकोण को बदलकर उनका अपने शासकों के प्रति द्वेष जागृत कर देते हैं ! जिससे शासन सत्ता में अस्थिरता आ जाती है और शासन सत्ता का पूरा ध्यान इन मानसिक जन विद्रोहों की तरफ चला जाता है ! जिससे देश का विकास क्रम रुक जाता है !

जिससे इस प्रतिस्पर्धा के युग में शत्रु देश निरंतर आगे बढ़ता चला जाता है और जो देश इस षड्यंत्र का शिकार होते हैं ! वह आपसी गृह संघर्ष में उलझ कर पीछे छूट जाता है ! यही इन षड्यंत्रकारियों का उद्देश्य होता है !

आज भारत के अंदर भी व्याप्त अज्ञानत भय और मानसिक असंतोष जो गलत सूचनाओं के आधार पर अज्ञात लोगों द्वारा शासन सत्ता के विरुद्ध निरंतर बढ़ाया जा रहा है ! वह भारत में इसी तरह के षड्यंत्र की ओर इशारा करता है !

इसलिये इस समय समाज के बुद्धिजीवियों का यह कर्तव्य है कि वह समाज के सामने वास्तविक षड्यंत्रकारियों को उजागर करें ! जिससे आम जनमानस में अमन चैन शांति कायम हो सके जिससे लोगों का अपने शासकों के प्रति विश्वास दृढ़ हो !

क्योंकि हमारे शासक ही हमारे देश को आगे ले जा सकते हैं ! उन्हें हमने चुना है ! अन्य किसी के बहकावे में आकर यदि हम अपने शासकों पर विश्वास खो देंगे तो हम और हमारे राष्ट्र का सर्वनाश सुनिश्चित है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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