क्या वास्तविक लंका समुद्र में जल मग्न है : Yogesh Mishra

आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि कभी रावण काल में श्री लंका का भूभाग वर्तमान आस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था ! रावण की अधिकांश सैन्य छावनी इसी भू भागा में थीं ! जो राम रावण युद्ध में हुये विनाशक परमाणु हमले से बाद 49 टुकड़ों में टूट कर हिन्द महासागर में समा गया ! जो वास्तविक लंका थी ! वर्तमान में जिसे हम लंका कहते हैं ! वह वास्तविक लंका का अंश मात्र है !

तमिल लेखकों के अनुसार आधुनिक मानव सभ्यता का विकास अफ्रीका महाद्वीप में न होकर हिन्द महासागर में स्थित ‘कुमारी कंदम’ नामक द्वीप में हुआ था ! हालांकि ‘कुमारी कंदम’ या लुमेरिया को हिन्द महासागर में विलुप्त हो चुकी घटना काफी प्राचीन होने के कारण काल्पनिक सभ्यता कही जाती है !

फिर भी कुछ शोध कर्ता लेखक इसे रावण की लंका का क्षेत्र आज भी मानते हैं क्योंकि दक्षिण भारत को श्रीलंका से जोड़ने वाला राम सेतु भी इसी आठवें महाद्वीप में पड़ता है ! ‘कुमारी कंदम’ का क्षेत्र उत्तर में कन्याकुमारी से लेकर पश्चिम में ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट और मेडागास्कर तक फैला हुआ करता था ! जिसे राम के विनाशकारी हथियारों ने समुद्र में डुबो दिया ! शायद यही कारण है कि आज भी आस्ट्रेलिया के बड़े-बड़े रेगिस्तान वनस्पति विहीन हैं !

तमिल इतिहासकारों के अनुसार ‘कुमारी कंदम’ आज के भारत के दक्षिण में स्थित भारत से कई गुना बड़ी हिन्द महासागर में खो चुकी एक प्राचीन तमिल सभ्यता है ! इसे ‘कुमारी नाडू’ के नाम से भी जाना जाता है ! तमिल शोधकर्ताओं और विद्वानों के एक वर्ग ने तमिल और संस्कृत साहित्य के आधार पर समुद्र में खो चुकी इस भूमि को पांडियन महापुरुषों के साथ जोड़ा है ! जो शिव भक्त होने के साथ-साथ तमिल भाषा और संस्कृति के जनक थे !

तमिल पुनर्जागरणवादियों के अनुसार ‘कुमारी कंदम’ के पांडियन ब्राह्मण राजा का पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन था ! जिसे वैष्णव क्षत्री शासक कब्ज़ा करना चाहते थे ! जिसके लिये उन्होंने एक षडयंत्र के तहत लंका को देवताओं के दक्षिण भाग की राजधानी बनायी थी और अपने कोषाध्यक्ष कुबेर को लंका में स्थापित पर दिया था !

क्योंकि लंका देवताओं की दक्षिण राजधानी थी इसीलिये देवताओं ने इसे सोने का बनवाया था ! जिसमें उस समय अस्थायी रूप से कुबेर रहा करता था ! जिसे कालांतर में रावण ने लंका से भगा दिया था ! दक्षिण भारत के लोकगीतों के इतिहास में आज भी इस सभ्यता और संस्कृति का वर्णन मिलता है !

इस महाद्वीप का लेमुरिया नाम से भूगोलवेत्ता फिलीप स्क्लाटर ने 19वीं सदी में पता लगाया था ! सन् 1903 में वी.जी. सूर्यकुमार ने इसे सर्वप्रथम ‘कुमारी कंदम’ नाम दिया था ! यह ‘कुमारी कंदम’ ही रावण के देश ‘लंका’ का विस्तृत स्वरूप था, जो कि वर्तमान भारत से भी दो गुना बड़ा था !

फिलीप स्क्लाटर ने तमिल लोक गीतों के आधार पर प्रारम्भ की गयी खोज में मेडागास्कर और ‘कुमारी कंदम’ में बहुत बड़ी मात्रा में राम रावण युद्ध काल में मारे गये राक्षसों और वानरों के जीवाश्मों के मिलने पर यहां एक विलुप्त नई सभ्यता के होने का अनुमान व्यक्त किया था ! उन्होंने इस विषय पर एक किताब भी लिखी जिसका नाम ‘The Mammals of Madagascar’ था ! जो कि पहली बार 1864 में प्रकाशित हई थी !

19वीं सदी में अमेरिकी और यूरोपीय विद्वानों के एक वर्ग ने अफ्रीका, भारत और मेडागास्कर के बीच जियोलॉजिकल और अन्य समानताएं समझाने के लिये जलमग्न हो चुके एक महाद्वीप का अनुमान लगाया था और उसे लेमुरिया (Lemuria) का नाम दिया था ! हलांकि इस दौरान एक और महाद्वीप खोजा गया था ! जिसका नाम मु (mu) दिया गया था !

‘कुमारी कंदम’ का क्षेत्र उत्तर में कन्याकुमारी से लेकर पश्चिम में ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट और मेडागास्कर तक फैला था ! भूगोलवेत्ता ए.आर. वासुदेवन के शोधानुसार मानव सभ्यता का विकास अफ्रीका महाद्वीप में न होकर हिन्द महासागर के ‘कुमारी कंदम’ नामक द्वीप पर हुआ था ! उनके अध्ययन कहते हैं कि जब ‘कुमारी कंदम’ राम रावण युद्ध से जलमग्न हो गया तो यहाँ के लोग यहां से पलायन कर अफ्रीका, यूरोप, चीन, मिस्र, रूस, तिब्बत अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित पूरे विश्व में फैल गये और इनसे कई नई सभ्यताओं ने जन्म लिया !

राम रावण युद्ध के कारण प्रयोग हुये विनाशक हथियारों की गर्मी से पृथ्वी के तापमान में काफी वृद्धि हो गयी अत: ग्लैशियरों ने पिघलना शुरू कर दिया जिससे समुद्र का जलस्तर बहुत बढ़ गया और अंतत: यह सभ्यता खण्ड खण्ड होकर समुद्र में डूब गई ! जिसका वर्णन किसी भी वैष्णव साहित्य में वैष्णव चाटुकार साहित्यकारों ने नहीं किया !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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