जूही चावला के 5G प्रकरण से षड्यंत्र की बू : Yogesh Mishra

प्रौढ़ावस्था प्राप्त अभिनेत्री जूही चावला जो कि मुंबई की स्थाई निवासी हैं ! उन्होंने अपने राज्य महाराष्ट्र के न्यायिक अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर मुंबई उच्च न्यायालय के स्थान पर दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष 5G टावर को स्थापित न किये जाने के संदर्भ में एक याचिका प्रस्तुत की !

जिसमें तर्क दिया गया कि 5G टावर के लग जाने के उपरांत पशु-पक्षी, जीव-जंतु, वनस्पति तथा मनुष्यों को उस 5G टावर के रेडिएशन से भारी क्षति होने की संभावना है ! अतः इस 5G टावर के इंस्टॉलेशन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाये !

जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीस लाख रुपये जुर्माना लगाते हुये कल खारिज कर दिया और इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि जूही चावला ने न्यायालय के न्याय प्रक्रिया का लिंक सोशल मीडिया पर डाल कर दुष्ट व्यक्तियों को अवसर प्रदान किया कि वह न्यायालय की प्रक्रिया को अवरोधित करें ! जिससे न्यायालय अपना कार्य सुचारु रुप से नहीं कर पाई ! अतः इस को गंभीर अवमानना मानते हुये माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीस लाख रुपये जुर्माना के साथ यह लोकहित याचिका खारिज कर दिया !

अब प्रश्न यह है कि यदि कोई व्यक्ति न्यायालय की सामान्य प्रक्रिया को बाधित करता है तो इसके लिये लोकहित की याचिका को उच्च न्यायालय बिना न्यायिक सुनवाई पूर्ण किये, बस सिर्फ इसलिये खारिज कर देगा कि एक व्यक्ति विशेष न्यायालय के सामान्य न्याय प्रक्रिया में अवरोध पैदा कर रहा है !

अगर किसी व्यक्ति द्वारा सामान्य न्याय प्रक्रिया में अवरोध पैदा करना इतना बड़ा अपराध है कि इस आधार पर लोकहित याचिका में न्यायिक सुनवाई ही नहीं की जायेगी बल्कि उसे अवरोध के आधार पर अर्थ दंड सहित बिना न्याय दिये ही खारिज कर दिया जाएगा, तो सामान्य जनमानस को जो उस लोकहित याचिका से न्याय प्राप्त होने वाला था वह कैसे प्राप्त होगा !
और यदि माननीय उच्च न्यायालय इस प्रकरण में पूरी तरह तटस्थ थी तो उसने इस उत्खल व्यवहार के कारण जूही चावला विरुद्ध भारतीय अवमानना अधिनियम के अंतर्गत जूही चावला को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार करके कारावास क्यों नहीं भेजा ! जिसका स्पष्ट विधान भारतीय अवमानना अधिनियम में दिया गया है !

अतः यह सिद्ध होता है कि एक तरफ जहां 5G कंपनियों ने वर्तमान सरकार को पूरी तरह से साध रखा है ! अतः लोगों के हित में संसद के अंदर 5जी के विरुद्ध कोई भी चर्चा नहीं हो पा रही है ! उसके साथ ही एक योजनाबद्ध षड्यंत्र के तहत जूही चावला के माध्यम से न्यायालय में भी योजनाबद्ध उत्पात मचाकर आम नागरिकों के लिये न्याय प्राप्त करने का दरवाजा बंद कर दिया गया है !

यह विषय लोगों के हित में अत्यंत संवेदनशील है ! यदि न्यायपालिका के किसी लिंक को किसी खुराफाती व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर डाल दिया जाये ! जिससे न्यायपालिका अपना कार्य सुचारू रूप से न कर पाये तो इसके लिये न्यायपालिका की तकनीकी व्यवस्था अधिकारी को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए और उसके विरुद्ध माननीय न्यायपालिका ने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की !

यह सब विश्व सत्ता के षड्यंत्रकारियों का विश्वव्यापी षड्यंत्र है ! जिसमें देश के कुछ खुराफाती लोग उनके इस षड्यंत्र में अपने हितों के कारण शामिल हैं ! जो आम आवाम को लोकहित में न्याय प्राप्त नहीं होने देना चाहते हैं और आम जनमानस पशु पक्षी जीव जंतु आदि इस घातक रेडिएशन से मर रहे हैं !

इस विषय पर संसद और न्यायपालिका दोनों संरक्षक संस्थान मौन हैं ! न तो इस पर संसद के किसी भी सदन में आज तक कोई चर्चा हुई और न ही न्यायपालिका की न्यायिक कार्य को डिस्टर्ब करने वाले लोगों की कोई खोजबीन तलाश शुरू की गई और न ही माननीय न्यायपालिका ने न्यायपालिका के तकनीकी अधिकारी के विरुद्ध ही कोई भी अवमानना संबंधी कार्यवाही की !

यह सभी विषय लोकहित में अत्यंत संवेदनशील विषय हैं ! यदि इस तरह के क्षणिक षडयंत्रों द्वारा समाज की आम जनमानस को न्याय से दूर रखा जायेगा तो न्यायपालिका का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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