जानिये : महूर्त विज्ञान के महाविनाशकारी योग : Yogesh Mishra

महूर्त विज्ञान के कुयोग या दुर्योग वह योग हैं | जिनमे आरम्भ किये गए कार्यों में असफलता और निराशा हाथ लगती है | इन योगों में आरम्भ अथवा प्रतिष्ठित किये गए कार्यों का प्रतिफल हानि, संकट और कष्ट के रूप में सामने आता है | कई बार तो व्यक्ति इन योगों के फलस्वरूप मृत्युतुल्य कष्ट पाता है या फिर उसकी मृत्यु ही हो जाती है |

कुयोग या दुर्योग इस प्रकार से बनते हैं –

1. कालदण्ड – रविवार को यदि भरणी, सोमवार को आर्द्रा, मंगलवार को मघा, बुधवार को चित्रा, गुरूवार को ज्येष्ठा, शुक्रवार को अभिजित और शनिवार को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र हो तो यह कुयोग बनता है | इसके परिणाम स्वरुप मृत्युतुल्य कष्ट की संभावना होती है |

2. वज्र – रविवार को यदि आश्लेषा, सोमवार को हस्त, मंगलवार को अनुराधा, बुधवार को उत्तराषाढ़ा, गुरूवार को शतभिषा, शुक्रवार को अश्विनी और शनिवार को मृगशिरा नक्षत्र हो तो यह योग बनता है | इसके परिणामस्वरूप हानि की संभावना होती है |

3. लुम्बक – रविवार को स्वाति, सोमवार को मूल, मंगलवार को श्रवण, बुधवार को उत्तराभाद्रपद, गुरूवार को कृतिका, शुक्रवार को पुनर्वसु और शनिवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप धनहानि की संभावना होती है |

4. उत्पात – रविवार को विशाखा, सोमवार को पूर्वाषाढ़ा, मंगलवार को धनिष्ठा, बुधवार को रेवती, गुरूवार को रोहिणी, शुक्रवार को पुष्य और शनिवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप प्राणों को भय रहता है |

5. मृत्यु – रविवार को अनुराधा, सोमवार को उत्तराषाढ़ा, मंगलवार को शतभिषा, बुधवार को अश्विनी, गुरूवार को मृगशिरा, शुक्रवार को आश्लेषा और शनिवार को हस्त नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप मृत्यु की आशंका रहती है |

6. काण – रविवार को ज्येष्ठा, सोमवार को अभिजित, मंगलवार को पूर्वाभाद्रपद, बुधवार को भरणी, गुरूवार को आर्द्रा, शुक्रवार को मघा और शनिवार को चित्रा नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप क्लेश की आशंका होती है |

7. मूसल – रविवार को अभिजित, सोमवार को पूर्वाभाद्रपद, मंगलवार को भरणी, बुधवार को आर्द्रा, गुरूवार को मघा, शुक्रवार को चित्रा और शनिवार को ज्येष्ठा नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप धनहानि की सम्भावना होती है |

8. गदा – रविवार को श्रवण, सोमवार को उत्तराभाद्रपद, मंगलवार को कृतिका, बुधवार को पुनर्वसु, गुरूवार को पूर्वाफाल्गुनी, शुक्रवार को स्वाति और शनिवार को मूल नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसके परिणामस्वरूप रोग की सम्भावना रहती है |

9. रक्ष – रविवार को शतभिषा, सोमवार को अश्विनी, मंगलवार को मृगशिरा, बुधवार को अश्लेषा, गुरूवार को हस्त, शुक्रवार को अनुराधा और शनिवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र हो तो यह नक्षत्र होता है | इसके परिणामस्वरूप महाकष्ट की सम्भावना होती है |

10. यमदंष्ट्र – रविवार को मघा, धनिष्ठा सोमवार को विशाखा, मूल मंगलवार को भरणी, कृतिका बुधवार को पुनर्वसु, रेवती गुरूवार को अश्विनी, उत्तराषाढ़ा शुक्रवार को रोहिणी, अनुराधा और शनिवार को श्रवण या शतभिषा नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इस योग में कार्य करने से असफलता प्राप्त होती है |

11. यमघण्ट – रविवार को मघा, सोमवार को विशाखा, मंगलवार को आर्द्रा, बुधवार को मूल, गुरूवार को कृतिका, शुक्रवार को रोहिणी और शनिवार को हस्त नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इस योग को शुभकार्यों और यात्रा के लिए निषिद्ध माना गया है |

12. ज्वालामुखी – जैसा की नाम से ही स्पष्ट है यह एक खतरनाक योग है | इसकी भी मूल की ही भांति शांति कराई जाती है | प्रतिपदा तिथि को मूल, पंचमी को भरणी, षष्ठी को कृतिका, नवमी को रोहिणी और दशमी को आश्लेषा नक्षत्र हो तो यह योग होता है | इसमें समस्त शुभ कार्य वर्जित हैं |

13. दग्ध नक्षत्र – रविवार को भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगलवार को उत्तराषाढ़ा, बुधवार को धनिष्ठा, गुरूवार को उत्तराफाल्गुनी, शुक्रवार को ज्येष्ठा और शनिवार को रेवती नक्षत्र हो तो नक्षत्र दग्ध हो जाता है | दग्ध नक्षत्र किसी भी शुभ कार्य के लिए निषिद्ध होता है |

14. घात नक्षत्र – प्रत्येक राशि का एक घात नक्षत्र होता है | जैसे की मेष का मघा, वृषभ का हस्त, मिथुन का स्वाति, कर्क का अनुराधा, सिंह का मूल, कन्या का श्रवण, तुला का शतभिषा, वृश्चिक का रेवती, धनु का भरणी, मकर का रोहिणी, कुम्भ का आर्द्रा और मीन का अश्लेषा |
प्रत्येक राशि को शुभ कार्य करते समय अपने घात नक्षत्र का त्याग करना चाहिए अन्यथा हानि और संकटों का सामना करना पड़ सकता है |

14. जन्म नक्षत्र – जन्म नक्षत्र और उसका दसवां तथा उन्नीसवां नक्षत्र जन्म नक्षत्र कहलाते हैं | शुभ कार्यों के लिए इनका निषेध कहा गया है वरना हानि होती है |

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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