हिन्दू शहरों के इस्लामीकरण का मनोविज्ञान : Yogesh Mishra

अकबर ने दीने इलाही धर्म चला कर हिंदू के के मन मस्तिष्क पर ही नहीं हिन्दू शहरों पर भी कब्जा कर लिया और हिंदू शहरों के नाम बदलना शुरू कर दिया जैसे अयोध्या का नाम फैजाबाद, प्रयाग का नाम इलाहाबाद, लक्ष्मणपुरी का लखनऊ, वृंदावन का मोमिनाबाद आदि आदि !

बाद में इसी परम्परा के तहत औरंगजेब ने मथुरा का नाम इस्लामाबाद रख दिया था । यह तो भला हो जाट राजा सूरजमल का जिन्होंने मथुरा को आताताई मुगलों से मुक्त करवाया था ।

इसी तरह अंग्रेजों द्वारा पाटलिपुत्र को पटना, बनारस से वाराणसी, इन्द्रप्रस्थ को दिल्ली, मगध को बिहार आदि आदि ! इसी तरह सोपारा, अग्रोहा, कुरुक्षेत्र, पैथन, वल्लभी, कालिंजर और तिरुनेलवेली आदि न जाने कितने प्राचीन नाम हैं जिन्हें सत्ता धारियों ने अपने सत्ता के मद में उनके नाम बदल दिये ! जिस पर आज भी प्रायोजित इतिहास मौन है !

शहरों के नाम परिवर्तन के पीछे दो मनोविज्ञान काम करते हैं ! पहला अपने शक्ति और सामर्थ्य का परिचय देना और दूसरा गुलाम को यह बता देना कि तुम्हारी कोई औकात नहीं है !

यही काम प्राचीन काल से वैष्णव अश्वमेध यज्ञ द्वारा करते चले आ रहे हैं ! वहां पर भी सामर्थवान वैष्णव राजा कमजोर शासकों को अश्वमेध यज्ञ द्वारा यह बतला देना चाहते हैं कि उनके आगे कमजोर वर्ग के शासक की कोई औकात नहीं है और अब हम समाज में शक्तिशाली और सामर्थ्य मान हो गये हैं ! इसलिए तुम्हें मन, मस्तिष्क और विचारों से मेरी अधीनता स्वीकार कर लेनी चाहिए !

इसी वजह से इतिहास में सभी शक्तिशाली वैष्णव शासकों ने अश्वमेध यज्ञ आयोजित किये थे और अपना साम्राज्य विस्तार किया !

वर्तमान परिपेक्ष में अमेरिका, रूस, चीन जैसे अति आधुनिक विज्ञान के भरोसे संपन्न और शक्तिशाली बने हुए देश कमोवेश इसी पद्धति का प्रयोग करके अपनी शक्ति सामर्थ और कमजोर देश को उनकी औकात समय-समय पर बतलाते रहते हैं !

इससे स्पष्ट होता है कि मनुष्य का मनोवैज्ञानिक स्वभाव शक्ति प्रदर्शन और साम्राज्य विस्तार करना है और जिन्होंने इस तरह के सामर्थ का प्रदर्शन किया, उनको हमने पीढ़ी दर पीढ़ी भगवान की तरह पूजा है ! चाहे भले ही उन्होंने लाशों के ढेर लगा कर ही अपने शक्ति का प्रदर्शन क्यों न किया हो और इस तरह शक्तिशाली लोगों को पूजने का क्रम आज भी चल रहा है !

और आगे भी मनुष्य की उदासीनता के कारण चलता रहेगा ! इसलिए नाम परिवर्तन के मनोविज्ञान पर चर्चा करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह मनुष्य को मनुष्य का हत्यारा बनाता है !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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