रावण ने हनुमान के पूंछ में आग नहीं लगवाई थी : Yogesh Mishra

न ही हनुमान जी बंदर रूपी जानवर थे और न ही उनके कोई पूंछ लटका करती थी ! बल्कि वह एक अति विद्वान वन नर अर्थात जंगल में रहने वाले मनुष्यों के समूह के व्यक्ति थे ! जिन्होंने बचपन में ही अति मेधावी होने के कारण सूर्य के ज्योतिष सिद्धांतों को समझ लिया था ! इसीलिये कहा जाता है कि उन्होंने बचपन में ही सूर्य को निगल लिया था !

अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो जिस तरह कोई व्यक्ति किसी पुस्तक को अति गंभीरता के साथ पढ़ लेता है और कंठस्थ कर लेता है ! तो यह कहा जाता है कि उसने वह पुस्तक घोलकर पी ली ! इसका तात्पर्य कभी यह नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कोई पुस्तक पानी में घोलकर पी ली हो और वह विद्वान हो गया हो !

ठीक इसी तरह ज्योतिष के सूर्य सिद्धांतों को हनुमान जी ने बाल अवस्था में ही इतनी गहराई से स्पष्ट तरीके से समझ लिया था कि एक किवदंती बन गयी कि उन्होंने बाल अवस्था में ही सूर्य को निगल लिया था !

जब रावण द्वारा माता सीता का राजनीतिक अपहरण किया गया ! तब भगवान श्रीराम ने सीता का हाल-चाल लेने के लिये हनुमान जी को लंका भेजा ! हनुमान जी भगवान श्री राम की अंगूठी प्रमाण के तौर पर लेकर लंका गये और वहां पर अशोक वाटिका में माता सीता को उन्होंने यह अंगूठी प्रदान की तथा अपने को भगवान श्रीराम का दूत बतलाते हुये कुशल समाचार दिया !

माता सीता से मिलने के बाद उन्होंने रावण के व्यक्तिगत हवाई अड्डे “उसानगोड़ा हवाई अड्डा” की तरफ रुख किया और वहां पर उपलब्ध ईंधन में विस्फोट करके रावण के उस व्यक्तिगत हवाई अड्डे को जलाकर नष्ट कर दिया ! तब सैनिकों की सूचना पर रावण के पुत्र अक्षय कुमार गये ! जिनका हनुमान से युद्ध हुआ और हनुमान ने उसे जान से मार डाला और हवाई अड्डे को जलती आग में झोंक दिया !

उसके मृत्यु की सूचना मिलने पर मेघनाथ सैनिकों के साथ गये और हनुमान को गिरफ्तार करके रावण के दरबार में पेश किया और भाई अक्षय कुमार के मरने व हवाई अड्डा नष्ट होने की सूचना दी ! तब रावण ने अति क्रोधित होकर हनुमान को भी उसी हवाई अड्डे के अग्निकांड की अग्नि के हवाले करने का आदेश दिया !

जिस पर विभीषण ने तत्काल हस्तक्षेप किया और तर्क दिया कि हनुमान राम के दूत ही नहीं ! आपके जयमाता भी हैं अर्थात दमाद भी हैं ! ( हनुमान की पत्नी अनंग कुसुमा जो कि विद्याधर वंश के राजकुमार खरदूषण तथा चन्द्रनखा (सुपनखा) की पुत्री थी और हनुमान जी की पत्नी अनंग कुसुमा से प्राप्त संतान का नाम मकरध्वज था ! जिससे राम रावण युद्ध के समय हनुमान का युद्ध होता है ! ) अतः इनको हवाई अड्डे की आग में हनुमान को झोंकना उचित नहीं रहेगा !

जिस के उपरांत रावण ने हनुमान को माफ़ करके छोड़ दिया और हनुमान वापस माता सीता और रावण का संदेश लेकर श्री राम के पास चले आये !

अतः इस तरह यह सिद्ध होता है कि लंका का अग्निकांड हनुमान की पूंछ में लगी आग से नहीं हुआ था ! बल्कि रावण के व्यक्तिगत हवाई अड्डे पर हनुमान ने वहां के उपलब्ध ईंधन में आग लगाकर भयंकर विस्फोट किया था ! जिससे समस्त हवाई अड्डा के साथ-साथ रावण के राज महल का भी कुछ अंश भी जलकर नष्ट हो गया था ! जिसे कथावाचकों ने रोचक कथा का रूप देकर पूंछ में आग लगाने की घटना बतला कर प्रचारित किया !!

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योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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