“नारी स्वतंत्रता” के नाम पर ही नारियों पर सर्वाधिक आक्रमण क्यों : Yogesh Mishra

आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि विभिन्न माध्यमों से हिन्दू लड़कियों को ही सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत महिलाओं को “नारी स्वतंत्रता” का पाठ पढ़ा कर लिबरल, कम्यूनिस्ट आदि में क्यों परिवर्तित किया जा रहा है ! आप अगर ध्यान देंगे तो पायेंगे कि वर्तमान समय में हिन्दू कन्यायें ही सबसे अधिक विभिन्न धर्मों में विवाह कर रही हैं !

यह एक अन्तराष्ट्रीय षडयंत्र है ! जिसका उद्देश्य है ! सनातन हिन्दू धर्म का सर्वनाश करना है ! क्योकि सनातन धर्म को नष्ट करने में इन षडयंत्रकारियों को सबसे बड़ी बाधा आज सनातन धर्मियों संस्कारी माँ ही हैं क्योकि उनका रक्त शुद्ध है !

अर्थात जब तक सनातन धर्मियों के रक्त में शुद्धता है तब तक सनातन धर्म का कोई बाल नहीं बांका कर सकता है ! इसलिये आज पूरा विश्व सनातन धर्मियों के बीज विलोप के षड्यन्त्र में लगे हुये हैं ! इसी उद्देश्य से सनातन धर्मी कन्याओ के मस्तिष्क में ज़हर बोया जा रहा है कि वह स्वतन्त्र हैं, दूसरे धर्म में विवाह करने ले लिये और यही आधुनिकता की निशानी है !

क्योंकि वह षडयंत्रकारी जानते हैं कि इन संस्कार विहीन माताओं से उत्पन्न होने वाली संतानें वर्णसंकर होगी ! जो स्वयं ही अपने धर्म को खा जायेंगी क्योंकि वर्णसंकर संतान विवेक शील नहीं होती हैं और न ही उनमें संघर्ष करने की उतनी शक्ति ही होती है ! जो शुद्ध रक्त मैं होती है !

हमारे यहाँ इसीलिये अनादि काल से स्त्रीयों के शील पर बल ऐसे ही नहीं दिया गया है ! स्त्री ही हमारी परम्पराओं, संस्कारो आदि को अपनी संतान में भरती है ! धर्म की रक्षा का एक विशेष दायित्व मातृशक्ति पर ही है ! स्त्री ही अपनी कोख में एक संस्कारित सृष्टि को पालती हैं ! उसी सृष्टि पर धर्म का भविष्य टिका होता है !

अतः यह बात षडयंत्रकारी जानते हैं कि यदि स्त्री के शील को दूषित कर दिया जाये तो समस्त सृष्टि ही दूषित हो जायेगी ! संतानों में संस्कारों का लोप हो जायेगा ! इसीलिये स्त्रीयों के संस्कारी और पतिव्रता रहने हेतु सनातन धर्म में अनेक नियम, व्रत, पूजा आदि का वर्णन किया गया है !

शायद इसीलिये सनातन धर्म में स्त्रीयों को स्वस्थ संतान को उत्पन्न कर उसे उचित शिक्षा दीक्षा आदि देकर धर्मरक्षक बनाने का दायित्व दिया गया है ! स्त्री का सफल दाम्पत्य जीवन ही उनका सफल यज्ञ है ! जिस स्त्री का शील नष्ट हो जाता है ! वह स्त्री यह कार्य कभी नहीं कर सकती है ! शायद इसलिये स्त्री के शील की रक्षा पर सनातन ऋषियों ने सबसे अधिक विशेष बल दिया है !
हमारे यहां अनादि काल से स्त्रियों के शिक्षा की विशेष व्यवस्था रही है ! उन्हें गृह कार्य के अतिरिक्त विशेष शास्त्र और शस्त्र की भी शिक्षा भी दी जाती थी ! जिससे वह अपनी रक्षा स्वयं कर सकें तथा विपरीत परिस्थितियों में भी पूर्ण आत्मविश्वास के साथ उस विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकें ! जैसे कि माता सीता और द्रौपदी ने किया था !

रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई, अहिल्याबाई, रानी दुर्गावती, रानी रुद्रम्मा देवी, रानी चेनम्मा, रानी अवंती बाई आदि अनेकों ऐसे उदाहरण है जिन्होंने अपने संस्कारों के बल पर युद्ध कौशल से दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिये और इतिहास में अमर हो गई !

यह सब सनातन धर्म की व्यवस्था के तहत स्त्रियों को दिये जाने वाले सम्मान और शिक्षा के द्वारा ही संभव हो सका है !

किंतु अब योजनाबद्ध तरीके से षडयंत्रकारी लोग सनातन धर्मी छोटी-छोटी बच्चियों को गुमराह करके “नारी स्वतंत्रता” के नाम पर उन्हें आधे अधूरे कपड़े पहना कर आधुनिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं और अब तो उन्हें आधुनिकता के नाम पर उनके परिवार वालों की सहमति से अश्लील नृत्य के अलावा और कोई संस्कार नहीं दिया जा रह है !

जिसका सबसे बड़ा उदाहरण इस लॉकडाउन के समय में सामने आया जब भारत के लाखों लड़कियों और महिलाओं ने आधे अधूरे नंगे होकर अश्लील से अश्लीलतम नृत्य और भोग कलाओं को मनोरंजन के नाम पर इंटरनेट पर प्रस्तुत किया हैं !

इससे यह बात सिद्ध होती है कि अब “नारी स्वतंत्रता” के नाम पर सनातन धर्मी बच्चियों के द्वारा ही सनातन धर्म पर बहुत बड़ा प्रहार किया जा रहा है ! जिस षड्यंत्र में हमारे नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, न्यायालय और प्रशासन के कुछ लोग भी शामिल हैं !!

अपने बारे में कुण्डली परामर्श हेतु संपर्क करें !

योगेश कुमार मिश्र 

ज्योतिषरत्न,इतिहासकार,संवैधानिक शोधकर्ता

एंव अधिवक्ता ( हाईकोर्ट)

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