वायरस उन्मूलन अभियान आपके डी.एन.ए. बदलने की साजिश तो नहीं है : Yogesh Mishra

आज मेरी आयु 54 वर्ष है ! जब से मैंने होश संभाला तब से आज तक भारत में नागरिकों के स्वास्थ्य सुधार के लिए सदैव से विश्व स्वास्थ्य संगठन का कोई न कोई तथाकथित वायरस उन्मूलन कार्यक्रम चलते देख रहा हूं !

 फिर चाहे वह खसरा, चेचक, पोलियो, एड्स, फ़्लू, बर्ड फ़्लू, स्वाइन फ़्लू या कोरोना अर्थात कोविड-19 जैसी बीमारियां से बचाव का प्रयास ही क्यों न बताया गया हो !

लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि आज तक मेडिकल साइंस ने किसी भी वायरस को मानव शरीर से बीमारी के रूप में आइसोलेट नहीं किया है ! जिससे उस वायरस को मानवता के लिये खतरा बतलाया जा सके ! किन्तु फिर भी सम्पूर्ण विश्व में विश्व स्वास्थ्य संगठन के उन्मूलन कार्यक्रम लोगों के टैक्स के पैसे से या विश्व बैंक से कर्ज लेकर धड़ा धड चल रहे हैं !

जबकि मेडिकल साइंस यह कहता है कि आज तक प्रमाणित तौर पर विश्व के किसी भी लैब में किसी मरीज़ के थूक, बलग़म या ख़ून के सैंपल से किसी भी वायरस को “रोगाणु” के रूप में प्राप्त नहीं किया जा सका है !

अब प्रश्न यह है कि जब दुनियां के किसी लैब में “रोगाणु” वायरस प्राप्त करने के प्रथम चरण ही कभी पूरा नहीं किया गया है, तो उस रोग के उन्मूलन के लिये दवाओं का निर्माण कैसे कर लिया गया और उन दवाओं की मदद से उन रोगों का उन्मूलन अभियान कैसे चलाये जा रहे हैं !

इसका सीधा जवाब है पूरी दुनिया में विभिन्न वायरस उन्मूलन कार्यक्रम के नाम पर जन्म से लेकर मृत्यु तक हमारे शरीर में जो तथाकथित दवाइयां डाली जा रही है ! वह वास्तव में दवाइयां न होकर हमारे मूल प्राकृतिक डी.एन.ए. को बदलने का अटूट प्रयास है ! जो कई दशकों से चल रहा है !

अब डी.एन.ए. पर चर्चा करने से पहले हम यह जान ले कि डी.एन.ए. होता क्या है ? डी एन ए वास्तव में जीवित कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले तंतुनुमा अणु के डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल को कहते हैं ! इसमें हर व्यक्ति की प्रकृतिक रूप से अलग अलग विशेष अनुवांशिक कूट निबद्धता निहित रहती है ! डी एन ए अणु की संरचना घुमावदार सीढ़ी की तरह होती है ! यह आमतौर पर क्रोमोसोम के रूप में होता है !

शरीर की हर कोशिका में गुणसूत्रों के सेट अपने अपने जीनोम का निर्माण करते हैं ! जो  मानव जीनोम 46 गुणसूत्रों की व्यवस्था में डी.एन.ए. के लगभग 3 अरब आधार से जोड़े के रूप में निर्मित होते हैं ! इसीलिये हर व्यक्ति का डी.एन.ए. अलग अलग होता है ! यह व्यक्ति के जीन में आनुवंशिक जानकारी के प्रसारण की पूरक आधार के माध्यम से हासिल होते हैं !

अर्थात आमतौर पर हर व्यक्ति का प्राकृतिक डी.एन.ए. अलग अलग होता है ! इसलिए इनके समूहों को बनाना अभी तक विज्ञान में असंभव है !

 वैश्विक स्तर पर आधुनिक विज्ञान आश्रित पेटेंट अधिनियम आ जाने के बाद अब क़ानूनी रूप से पूरी दुनिया में वैश्विक सत्ता के चलाने वालों के लिए यह सरल हो गया है कि वह मनुष्य को अलग-अलग कृतिम डी.एन.ए. समूह में बदल कर उन पर अपना विधिक अधिकार जमा सकें ! जिससे भविष्य में उन्हें गुलामों की तरह प्रयोग किया जा सके !

 इस हेतु अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में डी.एन.ए. बदलने वाले कंपनियों ने ऐसे व्यक्तियों के ऊपर अपना पेटेंट अधिकार प्राप्त करने के लिए अनेकों याचिका फाइल की हैं ! जिसमें यह कहा गया है कि विशेष कृतिम डी.एन.ए. पर विकसित मानव समूह पर उन्हें पेटेंट अधिकार प्रदान किया जाए ! जिससे कि वह भविष्य में उस विशेष कृतिम डी.एन.ए. के मानव समूह का उपयोग बिना किसी औद्योगिक प्रतिष्पर्धा के कर सकें ! जिस पर मानव अधिकार और पेटेंट अधिनियम के दायरे में नियमित सुनवाई चल रही है !

अर्थात कहने का तात्पर्य है कि पूरी दुनियां में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वास्थ्य सुधार के नाम पर रोगों के उन्मूलन अभियान के षडयंत्र के तरह विशेष प्रत्येक मनुष्य में विशेष कृतिम डी.एन.ए. का निर्माण कर उसकी ओट में विभिन्न मानव समूहों पर औद्योगिक घरानों का वैश्विक नियंत्रण का अभियान पिछले 50 साल से पूरी दुनिया में छद्म में रूप से चल रहा है !

इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि पी.एम. मोदी ने एलान किया कि भारत में अब लोगों को डी.एन.ए. आधारित कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी ! ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश होगा और हम अज्ञानता वश बूस्टर डोज लगवाने के लिये स्वत: ही लाईन में खड़े हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये

www.sanatangyanpeeth.in

आन लाईन गुरुकुल के पाठ्यक्रम के लिये निम्न लिंक क्लिक कीजिये !

http://gurukul.sanatangyanpeeth.com/

Share your love
yogeshmishralaw
yogeshmishralaw
Articles: 2133

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *