हमें अपने जीवन का संविधान स्वयं बनाना चाहिये

संविधान की प्रस्तावना और उसके आदर्श कागजों पर बहुत सुंदर और त्रुटिहीन लगते हैं, लेकिन यथार्थ की खुरदरी जमीन पर उतरते ही ये अक्सर खोखले और निरर्थक साबित होते हैं। समानता, न्याय और सार्वभौमिकता के यह सिद्धांत जब सत्ता, स्वार्थ…









