Adhyatm

क्या कोरोना काल में भारत को आध्यात्मिक क्षमता का प्रदर्शन करना चाहिये : Yogesh Mishra

हमारा ऐतराज़ इस नई विश्व व्यवस्था की वक़ालत करने वाले मूल्यों और नियमों को लेकर नहीं है ! बल्कि हमारी आपत्ति उन तरीक़ों और माध्यमों को लेकर है जिन्हें ईजाद करके नई विश्व व्यवस्था लागू करने के लिये किया जा रहा है ! मानो दुनिया से छल किया जा रहा …

Read More »

चौथा आयाम और दूसरी दुनिया के रहस्य : Yogesh Mishra

हम सभी जानते हैं कि यह संसार सामान्यतया तीन आयाम में चलता है ! लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई इसके अलावा एक आयाम और है जो बहुत महत्वपूर्ण होता है ! उसको कहते हैं समय अर्थात काल ! यह चौथा आयाम इतना शक्तिशाली होता है कि यह अकेले ही पिछले तीनों …

Read More »

न देव मरेंगे न दानव ! : Yogesh Mishra

विश्व में सदैव से दो आध्यात्मिक केंद्र प्रकृति द्वारा निर्धारित किये गये हैं ! पहला हिमालय और दूसरा नॉर्थ ईस्ट एशिया ! इसीलिये अधिकतर धर्मों की उत्पत्ति किन्ही दोनों आध्यात्मिक केंद्र की जीवनशैली से हुई है ! इसमें हिमालय और सनातन जीवन शैली विश्व की देव शक्तियों का आध्यात्मिक केंद्र …

Read More »

विवेक चूड़ामणि ग्रन्थ का आध्यात्मिक रहस्य : Yogesh Mishra

विवेकचूडामणि आदि शंकराचार्य द्वारा संस्कृत भाषा में रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है ! जिसमें अद्वैत वेदान्त का निर्वचन किया गया है ! इसमें ब्रह्मनिष्ठा का महत्त्व, ज्ञानोपलब्धि का उपाय, प्रश्न-निरूपण, आत्मज्ञान का महत्त्व, पंचप्राण, आत्म-निरूपण, मुक्ति कैसे होगी ! आत्मज्ञान का फल आदि तत्त्वज्ञान के विभिन्न विषयों का अत्यन्त सुन्दर निरूपण …

Read More »

ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य-एंटीमैटर : Yogesh Mishra

खुद को आईने में देखियह ! वहां भी आप ठीक आपने सामने आपने को वैसे ही पाते हैं ? तब आप कहेंगे कि यह मेरा प्रतिबिम्ब है ! ठीक इसी तरह कभी सोंचा है कि जिस पृथ्वी पर आप रहते हैं ! शास्त्रों के अनुसार उसी पृथ्वी जैसी हू-ब-हू दर्जनों …

Read More »

मोक्ष के प्राप्ति लिये कर्मफल के बंधन से छुटकारा कैसे पा सकते हैं ! : Yogesh Mishra

श्रीमद् भगवत गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है ‘न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ’ गीता 3/5 अर्थात, कोई भी व्यक्ति कर्म किये बिना क्षण भर भी नहीं रह सकता है ! अर्थात कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग किसी भी मार्ग में साधक कर्म किये बिना नहीं रह सकता है …

Read More »

मंदिरों में बैठा हुआ भगवान ईश्वर नहीं है ! : Yogesh Mishra

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्य: स सुपर्णो गरुत्मान् ! एकं सद् विप्रा बहुधा वदंत्यग्नि यमं मातरिश्वानमाहु: !! – ऋग्वेद (1/164/46) जिसे लोग इन्द्र, मित्र, वरुण आदि कहते हैं, वह सत्ता केवल एक ही है, ऋषि लोग उसे भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं ! जिसे कोई नेत्रों से भी नहीं देख सकता, …

Read More »

यथा ब्रह्माण्डे तथा पिण्डे का रहस्य : Yogesh Mishra

‘यथा ब्रह्माण्डे तथा पिण्डे’ -चरक संहिता का यह श्लोकांश हमें समझाता है कि जो-जो इस ब्रह्माण्ड में है वही सब हमारे शरीर में भी है ! यह भौतिक संसार पंचमहाभूतों से बना है ! आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ! उसी प्रकार हमारा हमारा यह शरीर भी इन्हीं पाँचों …

Read More »

संस्कारों की ऊर्जा सतत व अनंत चिरजीवी होती है ! : Yogesh Mishra

हम सभी जानते हैं कि हमारे जीवन की 99% दिनचर्या संस्कारों के प्रभाव से स्वत: संचालित होती है ! अब प्रश्न यह है कि यह संस्कार विकसित कैसे होते हैं ! इस संदर्भ को मैं एक उदाहरण से समझता हूँ ! जैसे कोई व्यक्ति जब खिचड़ी खाता है तो खिचड़ी …

Read More »

हिमालय दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है | Yogesh Mishra

हिमालय में आज भी हजारों ऐसे स्थान हैं ! जहाँ पूर्व में कभी देवी-देवताओं और तपस्वी आदि रह कर तप किया करते थे ! हिमालय में अनेकों जैन, बौद्ध और हिन्दू संतों के कई प्राचीन मठ और गुफायें हैं ! इन गुफाओं में आज भी कई ऐसे तपस्वी हैं ! …

Read More »