गोस्वामी तुलसीदास हिंदू समाज के लिये आदर्श क्यों हैं ?  : Yogesh Mishra

 गोस्वामी तुलसीदास का नाम लेते ही व्यक्ति के ध्यान में रामचरितमानस का नाम स्वत: ही प्रगट हो जाता है लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, रामलला नहछू, गीतावली, दोहावली, विनय पत्रिका, बरवै रामायण और हनुमान बाहुक आदि जैसे 24 से अधिक ग्रन्थ गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा ही रचित किये गये हैं !

गोस्वामी तुलसीदास जिस काल में पैदा हुये वह उत्तर भारत में भक्ति काल का आरंभिक काल था ! इस भक्ति काल का विकास दक्षिण भारत में हुआ था ! भक्ति काल के आंदोलन का आरंभ दक्षिण भारत में सातवी शताब्दी में हुआ था जो बारहवीं शताब्दी तक विकसित होता रहा !

यही वह काल था जब भारत में सर्वाधिक मंदिरों के निर्माण हुये !  वैसे तो इस भक्ति काल के आंदोलन का उद्देश्य नयनार तथा अलवार संतों के बीच मतभेद को समाप्त करना था ! किन्तु इस आन्दोलन की लोकप्रियता ने हिन्दू समाज को मुसलिम आक्रान्ताओं और शासको के प्रति संघर्ष करने की नई चेतना दी ! इस आंदोलन के प्रथम प्रचारक भारत की भूमि से बौद्ध धर्म को उखाड़ फेकने वाले आदि गुरु शंकराचार्य को माना जाता है !

गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास स्वामी रामानंद जी को अपना गुरु मानते थे ! यही रामानंद जी महान तत्व ज्ञानी कबीर दास जी के भी गुरु थे ! जो दक्षिण भारत से भक्ति काल के आंदोलन को उत्तर भारत में लेकर आये थे !

 कालांतर में उत्तर भारत में जब भक्तिकालीन आंदोलन अपने चरम पर पहुंचा तो भारत के बहुत से ब्राह्मण युवाओं ने अपनी समस्त ऊर्जा मानव निर्मित भगवान के महिमामंडन में लगा दी और लाखों की संख्या में ब्राह्मण युवा भगवान के प्रतिनिधि लेखक, कवि और कथावाचक के रूप में पैदा हो गये !

 लेकिन भगवान के इस महिमामंडन का नाटकीय प्रयोग पहली बार गोस्वामी तुलसीदास जी ने काशी नरेश के सहयोग से बनारस के अस्सी घाट पर किया था ! जो राम लीला निरंतर 40 दिन तक चली थी ! इस तरह भारत में रामलीला की शुरुआत हुई ! इसके पहले रावण इतना बड़ा विलयन नहीं था और न ही रावण दहन होता था !

भगवान राम के नाटकीय चरित्र का वर्णन रामलीला के माध्यम से किये जाने से भगवान राम के प्रति लोगों का आकर्षण तेजी से विकसित होने लगा ! जिससे राम की लोकप्रियता विकसित हुई और अयोध्या क्षेत्र के आस पास के गरीब सरजूपारी ब्राह्मणों को एक नया रोजगार मिला !

जिसको लेकर वृंदावन के स्वामी संत शिरोमणि हरिदास जी को भगवान कृष्ण की लोकप्रियता को लेकर चिंता हुई और उन्होंने अकबर के नवरत्न में तानसेन जोकि संत शिरोमणि हरिदास के शिष्य थे ! उन के माध्यम से अकबर से आर्थिक मदद मांगी और रामलीला के समानांतर ही रासलीला की शुरुआत की !

 अकबर भी अपनी कूटनीति के तहत उत्तर भारत में हिंदू समाज को कमजोर करने के लिये उन्हें दो हिस्से में बांटा चाहता था ! अतः रासलीला के लिए अकबर ने अपने खजाने खोल दिये ! जिससे मथुरा वृंदावन क्षेत्र के ब्राह्मणों को भागवत कथा और रासलीला का रोजगार मिला !

रासलीला क्योंकि नायक नायिका के श्रृंगार पक्ष पर आधारित लीला थी ! अतः आम समाज ने धीरे-धीरे रामलीला के स्थान पर रासलीला में रुचि लेना आरंभ कर दिया ! जिससे उत्तर भारतीय समाज दो हिस्सों में बंट गया ! एक राधा भक्तों हो गया तो दूसरा राम भक्तों का !

 इस तरह रामलीला ने मुस्लिम सम्राटों के प्रति हिंदुओं को एकत्र करने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की ! जिसमें सबसे बड़ी भूमिका प्रथम रामलीला संयोजक गोस्वामी तुलसीदास जी की थी ! इसीलिए गोस्वामी तुलसीदास हिंदू समाज के लिये महापुरुष हैं !

गोस्वामी तुलसीदास ने समस्त उत्तर भारत में घूम घूम कर अपने 126 वर्ष के जीवन काल में 50 से अधिक स्थानों पर रामलीला की शुरुआत करवाई ! जो अब पूरे विश्व में लाखों की संख्या में हिंदू समाज द्वारा स्वप्रेरणा से संचालित है !

यह योगदान हिंदू समाज के लिए गोस्वामी तुलसीदास जैसा कोई महापुरुष ही कर सकता है इसीलिए वह आज हमारे आदर्श हैं !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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