भारतीय शास्त्रीय संगीत पूर्णतया वैज्ञानिक है ! हमारे ऋषियों, मुनियों, मनीषियों, चिंतकों ने मानव चित्त, मन, बुद्धि, संस्कार और अहंकार पर गहन शोध करने के बाद, उनका ध्वनि से संबंध स्थापित किया और यह निष्कर्ष निकाला कि विभिन्न तरह की ध्वनियां मनुष्य के सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर सीधा प्रभाव डालती हैं !
आयुर्वेद में भी ध्वनि तरंगों से मनुष्य के चिकित्सा का विधान पाया जाता है ! इसलिए हम स्पष्ट रूप से यह कह सकते हैं कि जब कोई भी दवा काम नहीं कर रही है तो सही पद्धति से गाया गया भारतीय शास्त्रीय संगीत व्यक्ति के मन मस्तिष्क को बदलकर उसकी चिकित्सा करने में सक्षम है !
यही विज्ञान कर्मकांड और अनुष्ठान के साथ भी कार्य करता है ! जब मनुष्य पर सांसारिक दवाई का प्रभाव नहीं होता है, तब सही पद्धति से सही स्वर के साथ किया गया मंत्र उच्चारण, सही सामग्री से किया गया अनुष्ठान तथा पूर्ण पुरुषार्थ के साथ किया गया कर्मकांड दूर से भी व्यक्ति के लिए जीवन रक्षक औषधि का कार्य करता है ! इसके हजारों उदाहरण मेरे अपने जीवन में देखे गये हैं !
फिलहाल यहां पर बात भारतीय शास्त्रीय संगीत की कर रहा हूं ! भारतीय शास्त्रीय संगीत में विभिन्न राग होते हैं जिनका सीधा प्रभाव हमारे मन, मस्तिष्क और शरीर पर पड़ता है ! जिससे हमें बहुत से विकारों से मुक्ति मिलती है ! इन्हीं में से कुछ रागों के प्रभाव का वर्णन मैं नीचे कर रहा हूं !
आप इन्हें अपने व्यावहारिक जीवन में अपना सकते हैं और अपने को स्वस्थ और प्रसन्न रखने के लिए भारतीय शास्त्रीय संगीत का लाभ उठा सकते हैं !
1. राग दुर्गा – आत्मविश्वास बढानेवाला !
2. राग यमन – कार्यशक्ति बढानेवाला !
3. राग देसकार – उत्थान व संतुलन साधने वाला !
4. राग बिलावल – अध्यात्मिक उन्नति व संतुलन साधनेवाला !
5. राग हंसध्वनि – सत्य असत्य को परिभाषित करनेवाला राग !
6. राग शाम कल्याण – मुलाधार उत्तेजित करनेवाला और आत्मविश्वास बढानेवाला !
7. राग हमीर – आक्रामकता बढानेवाला, यश देनेवाला, शक्ति और उर्जा निर्माण करनेवाला !
8. राग केदार – स्वकर्तृत्व पर पूर्ण विश्वास, भरपूर उर्जा निर्माण करनेवाला और मुलाधार उत्तेजित करनेवाला !
9. राग भूप – शांति निर्माण, संतुलन साधकर अहंकार मिटाता है !
10. राग अहिर भैरव – शुद्ध इच्छा, प्रेम एवं भक्ति भाव निर्माण करता है व आध्यात्मिक उन्नति, पोषक वातावरण निर्मित कारक !
11. राग भैरवी – भावना प्रधान राग, सर्व सदिच्छा पूर्ण कर प्रेम सशक्त और वृद्धि करता है !
12. राग मालकौस – अतिशय शांत एवं मधुर राग ! प्रेमभाव निर्माण करता है व संसारिक सुख में वृद्धि करेगा !
13. राग भैरव – शांत वृत्ति व शुध्द इच्छा निर्माण करता है ! आध्यात्मिक प्रगति के लिये पोषक एवं शिवत्व जागृत करनेवाला राग !
14. राग जयजयवंती – सुख समृद्धि और यश देने वाला राग ! समस्या दूर करनेकी क्षमता !
15. राग भीम पलासी – संसार सुख व प्रेम देता है !
16. राग सारंग – अति मधुर राग ! कल्पना शक्ति व कार्यकुशलता बढाकर नवनिर्मित ज्ञान प्रदान करता है, आत्मविश्वास बढाकर परिस्थिति का ज्ञान देता है !
17. राग गौरी – गुण वर्घक राग – शुद्ध ईच्छा, मर्यादाशीलता, प्रेम, उत्थान, समाधान कारक !
इन रागों से संबंधित विभिन्न वीडियो यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं, लेकिन यदि साक्षात रूप से इन रागों को सुना जाये तो उनका प्रभाव बहुत ही स्पष्ट पड़ता है ! यूट्यूब पर सुने गये संगीत से अधिक प्रभावशाली परिणाम नहीं आते हैं ! ऐसा मेरा निजी अनुभव है !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये
मोबाईल : 9453092553
और अधिक जानकारी के लिये पढ़िये
www.sanatangyanpeeth.in
आन लाईन गुरुकुल के पाठ्यक्रम के लिये निम्न लिंक क्लिक कीजिये !
http://gurukul.sanatangyanpeeth.com/
