Category Shaivgram

हिंदुत्व के सर्वनाश का कारण

समाज को प्रबुद्ध गुरुओं से आत्म कल्याण हेतु ज्ञान नहीं बौद्धिक मनोरंजन चाहिये, इसके लिये सबसे अधिक दोषी तथाकथित लालची, आडम्बरी धर्म गुरु हैं, जो पहने तो भगवा कपड़े हैं लेकिन धूर्तता, मक्कारी, लोभ, ईर्ष्या, उनके रग रग में बसी…

हम दरिद्र क्यों हो जाते हैं !

प्राय: लोग पूंछते हैं कि हम दरिद्र क्यों हैं ? उत्तर है ईश्वरीय निवेश न करने के कारण लोग दरिद्र होते हैं, अर्थात जब हम धनवान होते हैं, तो कार्य की प्राथमिकता और धन के अहंकार में जीव जंतु, पशु…

सुपर अल नीनो का समाधान मात्र शैवों के पास है

कृपया मुर्ख इस लेख को न पढ़ें ! सुपर अल नीनो अति प्राचीन काल से मानवीय षड्यंत्र का हिस्सा है ! जिसे कृषि आधारित विकासशील देशों को नष्ट करने के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाता रहा है…

शैवों को किसी कल्कि अवतार की जरुरत नहीं है

जब समाज में जब शासक कमज़ोर और अयोग्य होते हैं, तो जनता के विद्रोह को शांत करने के लिए वैष्णव धर्म गुरु ‘भविष्य के मसीहा’ या ‘अवतारवाद का सहारा’ लेते हैं। जो कि पूर्ण सुनी सुनाई कपोल कल्पित कल्पना है…

शैवों की जीव अघोर क्रिया साधना क्या है

भगवान शिव के उपासक जीव अघोर क्रिया साधना द्वारा दूसरे के ओरे में प्रवेश करके उसके रोग को अपने ओरे में खींच लेते हैं और उन रोगों को अपने जीवनी ऊर्जा के ताप से जला देते हैं। यह मृत संजीवनी…

शैवों का मोक्ष क्या है

यदि आप तनिक रुक कर अपनी दिनचर्या को अपने अस्तित्व से जोड़कर देखिये, तो आप पायेंगे कि आपका “मस्तिष्क” सामाजिक डेटा और अल्गोरिदम से प्रायोजित है ! धर्म, व्यवस्था और आस्था के नाम पर आपके रचनाकारों ने आपको अपने उद्देश्य…

शैव ही अपराध बोध से मुक्त हो पाता है

अपराध मनुष्य का स्वाभाविक गुण है ! अपराध या पाप का विचार प्रायः अज्ञान और अहंकार से उपजता है। इस मानसिक अवरोध से पार पाने के लिये शिव अनुगमन ही सर्वोच्च मार्ग है। शिव, जो स्वयं परम कल्याण के प्रतीक…

शैव जीवन दर्शन क्या है

( कार्मिक ऊर्जा की दृष्टि से ) मेरे पास बहुत से जिज्ञासुओं का फोन आता रहता है, वह जानना चाहते हैं कि “शैव जीवन दर्शन क्या है” ! मैं आज बहुत ही सरल शब्दों में व्याख्या करता हूँ ! शैव…

शैव चिकित्सा – अवसाद में हैं तो पेड़ों से सेवा लीजये

पेड़ों की सेवा करना मात्र आध्यात्मिक या भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि यह शैव चिकित्सा में अवसाद को दूर करने का एक प्रामाणिक वैज्ञानिक तरीका है। इसे मानव हार्मोन और वनस्पति विज्ञान के आपसी तालमेल से स्पष्ट करता हूँ ।…

शैव ग्राम सह अस्तित्व का प्रतीक

मनुष्य इस विशाल पृथ्वी पर एकाकी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता। हमारे अस्तित्व का आधार केवल हम स्वयं नहीं, बल्कि हमारे आस-पास मौजूद जीव-जंतु, पशु-पक्षी, नदियाँ और वनस्पतियां हैं। इसी शाश्वत सह-अस्तित्व और भगवान शिव की कल्याणकारी, प्राकृतिक जीवन शैली…