Category Shaivgram

साथी पीछे क्यों छूट जाते हैं

जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही योजना, गहरे अनुभव, उत्साह और स्फूर्ति की जरुरत है ! जो प्राय: हर व्यक्ति में नहीं होता है ! किसी भी बड़े लक्ष्य में ऐसे लोग साथ हो तो लेते हैं, लेकिन उनकी…

शैव शरीर का तिरस्कार नहीं करते हैं

शैव दर्शन में शरीर को हेय या तुच्छ नहीं माना गया है, बल्कि इसे शिव की एक पवित्र अभिव्यक्ति और ईश्वरीय वरदान माना गया है। शरीर अपने आप में अंतिम साध्य नहीं है, बल्कि सर्वोच्च लक्ष्य अर्थात् मोक्ष तक पहुँचने…

शैव जीवन दर्शन के चार कदम  

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :– पहला कदम :–  दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा। दूसरा कदम :–  दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द…

शैव ग्राम में साधकों की दिनचर्या

शैव ग्राम एक ऐसा जीवंत और ऊर्जावान केंद्र बन सकता है जहाँ शिक्षा बोझ न होकर आत्म-विकास का माध्यम हो। इस संस्थागत परियोजना का उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित, प्राकृतिक और समग्र विकास वाला वातावरण प्रदान करना है। आधुनिक ज्ञान…

शैव ग्राम मानवता का जीवन्त धाम है

एक वैचारिक क्रांति और सनातन चेतना का पुनर्जागरण केंद्र शैव ग्राम केवल ईंट-पत्थरों से निर्मित कोई पारंपरिक आश्रम या भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह एक युगांतरकारी वैचारिक क्रांति का जीवंत केंद्र है। जहाँ एक ओर आधुनिकता की अंधी दौड़…

शैव को दवा की कोई जरुरत नहीं है

शैव जीवन दर्शन मानता है कि “हर रोग अवचेतन का प्रगट स्वरूप है” ! अर्थात हमारे मन और शरीर के मध्य एक गहरा और अविभाज्य संबंध है। अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इस अवधारणा को ‘मनोदैहिक रोग’ के रूप में…

शिक्षा जगत में शैव ग्राम अंतिम विकल्प

वर्तमान शिक्षा प्रणाली और कोचिंग का बढ़ता व्यवसायीकरण बच्चों को एक अंधी दौड़ में धकेल रहा है, जहां सफलता का पैमाना सिर्फ अच्छे अंक रह गए हैं। इस दमघोंटू और तनावपूर्ण माहौल में “शैव ग्राम” की संकल्पना निश्चित रूप से…

ब्रह्मास्मि क्रिया योग की घुमंतु फ्रेंचायाजी

युवाओं के लिये विशेष सन्देश भटकाव से शिवत्व की ओर आध्यात्म में रूचि रखने वाले बेरोजगार युवाओं के लिये बिना किसी इन्वेस्मेंट के भगवान शिव के जीवन का अनुगमन करने वाली ब्रह्मास्मि क्रिया योग की घुमंतु फ्रेंचायाजी सनातन ज्ञान पीठ…

जीव ही सदाशिव है

कुलार्णव तंत्र के नौवें उल्लास के आधार पर माता पार्वती भगवान शिव से कहती हैं :– “जीवः शिवः शिवो जीवः स जीवः केवलः शिवः। पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तः सदाशिवः॥” आपके द्वारा उद्धृत यह पंक्तियाँ सनातन धर्म के ‘अद्वैत वेदांत’ और…

हिंदुत्व के सर्वनाश का कारण

समाज को प्रबुद्ध गुरुओं से आत्म कल्याण हेतु ज्ञान नहीं बौद्धिक मनोरंजन चाहिये, इसके लिये सबसे अधिक दोषी तथाकथित लालची, आडम्बरी धर्म गुरु हैं, जो पहने तो भगवा कपड़े हैं लेकिन धूर्तता, मक्कारी, लोभ, ईर्ष्या, उनके रग रग में बसी…