शैव ग्राम में साधना का स्वरूप

शैव जीवन दर्शन के प्रवृत्ति साधना सूत्र के तहत यह सिद्धांत है कि जो व्यक्ति माया क्षेत्र में भगवान शिव की कृपा से संपन्न नहीं हो सका, वह मुक्त को भी प्राप्त नहीं कर सकता है।

अत: शैव ग्राम के सभी साधकों को “प्रवृत्ति साधना सूत्र” का अभ्यास करवा कर सर्वप्रथम कम से कम करोड़ पति अवश्य बनाया जायेगा ! जिससे वह अपना सांसारिक जीवन बिना किसी भय और आर्थिक तनाव के आराम से चला सकें तथा भविष्य में साधना की परिपक्वता के साथ इसी जीवन में माया के रहस्यों को समझ कर स्वयं को जन्म मारण के चक्र से मुक्त कर सकें !

शैव दर्शन के अनुसार ‘भोग’ (सांसारिक सुख और संपन्नता) और ‘मोक्ष’ (आध्यात्मिक मुक्ति) परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक ही शिव-शक्ति के दो अभिव्यक्ति आयाम हैं।

इसीलिये शिव को मात्र वैरागी ही नहीं सर्वेश्वर भी कहा गया है !

वेदांत दर्शन में ‘माया’ को अक्सर एक भ्रम मानकर उससे दूर भागने की बात कही जाती है। लेकिन शैव दर्शन में माया शिव की ही एक ‘स्वातन्त्र्य शक्ति’ है। शिव अपनी इसी शक्ति के माध्यम से सृष्टि की रचना करते हैं और स्वयं भी उसमें क्रीड़ा करते हैं।

इसलिए, माया क्षेत्र में प्राप्त भौतिक संपदा (धन, वैभव, ऐश्वर्य, आदि) शिव की ही ऊर्जा से संचालित है। तंत्र शास्त्रों में दरिद्रता को एक प्रकार का अज्ञान और अभिशाप स्वरूप माना गया है।

भगवान शिव के ‘स्वर्णाकर्षण भैरव’ स्वरूप की साधना विशेष रूप से दरिद्रता के नाश और अपार धन-संपदा (अरबपति बनने या अष्ट-ऐश्वर्य प्राप्त करने) के लिए ही है।

शैव और शाक्त तंत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति परम चेतना में स्थित है, उसके लिए संसार के सभी भोग ही योग बन जाते हैं।

इसीलिये कुलार्णव तंत्र में सूत्र दिया गया है कि

“योगो भोगायते साक्षात् दुष्कृतं सुकृतायते ।

मोक्षायते हि संसारः कुलधर्मे कुलेश्वरि ॥”

अर्थ: हे कुलेश्वरि! कुलधर्म (शैव-शाक्त मार्ग) में योग, साक्षात् सांसारिक भोग से उत्पन्न हुआ है, जो साधक पाप और पुण्य के रहस्य को समझ कर स्वयं को साधना द्वारा सुसंस्कारित कर लेता है, वह यह संसार के सुखों को भोगते हुये ही मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।

यही समर्थ शैव ग्राम में शिव-शक्ति (महात्रिपुरसुंदरी/महेश्वरी) के साधकों के लिए भोग और मोक्ष दोनों एक साथ प्राप्त करने की विद्या सिखाई जायेगी ! जिससे साधक इस संसार में सफल होते हुये इसी जीवन में मोक्ष को भी प्राप्त कर सके !!

विशेष सूचना :-

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योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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