वर्तमान शिक्षा व्यवस्था एक ऐसी ‘अनुपयोगी फैक्ट्री’ बन चुकी है, जिसका उद्देश्य बच्चों का बैद्धिक विकास नहीं बल्कि बच्चों के माता पिता के मेहनत की कमाई लूटना है !
यहाँ केवल डिग्रियों का थोक उत्पादन हो रहा है, बच्चों में कोई प्रतिभा या कौशल विकास नहीं हो रहा है। हमारी सबसे बड़ी दुर्व्यवस्था यह है कि हम बच्चों के जीवन के सीमित मूल्यवान समय के महत्व को नहीं समझते हैं, बल्कि वर्षों तक केवल रटंत विद्या, भारी बस्ते और अंकों की अंधी दौड़ में बिना सोचे समझे अपने बच्चों को दौड़ाते रहे हैं।
परिणामस्वरूप, जब युवा स्कूल या कॉलेज से बाहर निकलते हैं, तो उनके पास वास्तविक जीवन या उद्योग में काम आने वाली न कोई विद्या होती है और न ही अपने जीवकोपार्जन का कोई व्यावहारिक हुनर होता है।
जबकि बच्चों को शुरुआत से ही किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक जीवन कौशल, नैतिक अनुशासन और समस्या-समाधान का व्यावहारिक अभ्यास सिखाया जाना चाहिये। शिक्षा का अर्थ केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि एक सक्षम और आत्मनिर्भर नागरिक बनना भी है।
इसलिये शैव ग्राम की आत्मनिर्भर बनाने वाली “शैव शिक्षा पद्यति” को अपनाइये ! अव्यवाहारिक पढ़ाई में मूल्यवान जीवन के व्यर्थ का समय बर्बाद मत कीजिये, व्यवहारिक कौशल सीखिये’ और एक जिम्मेदार नागरिक बनिये !
शैव ग्राम की व्यवहारिक शिक्षा प्रणाली का अर्थ शिक्षा का त्याग करना नहीं है, बल्कि उस खोखली और लक्ष्यहीन पढ़ाई का त्याग है जो केवल बेरोजगारी को जन्म देती है। जिससे युवाओं में निरंतर आत्मविश्वास कम हो रहा है और वह घर परिवार समाज पर बोझ बनते जा रहे हैं !
वर्तमान दूषित और अनुपयोगी शिक्षा व्यवस्था को अपने समग्र विकास के लिये हमें ही छोड़ना होगा और व्यवहारिक कौशल पारंगत कला के द्वारा स्वयं को विकसित करना होगा !
शैव शिक्षा पध्यति बस सिर्फ अपको जीवकोपार्जन ही नहीं करवाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को विश्व का मार्गदर्शक भी बनाती है, जो भारत की गरिमामयी औअर वैश्विक प्रतिष्पर्धी यात्रा के लिये आवश्यक है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
शैव ज्ञान के लिये संस्थान की कक्षा से जुड़िये
मोबाईल : 9453092553

